Shimla News: हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार गांधी की प्रशासनिक मुश्किलें बढ़ गई हैं। उनके खिलाफ सरकारी धन के कथित दुरुपयोग, धोखाधड़ी और गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में सदर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है। शिमला में मीडिया को जारी सूचना के अनुसार यह कानूनी कार्रवाई पुलिस लाइन कैथू में तैनात एक पुलिस कॉन्स्टेबल द्वारा दी गई आधिकारिक शिकायत के आधार पर की गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता कॉन्स्टेबल को वर्ष 2024 और 2025 के दौरान विभिन्न सरकारी कार्यों, आधिकारिक व्यवस्थाओं तथा आवश्यक सामान जुटाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उस समय कॉन्स्टेबल को यह आश्वासन दिया गया था कि वे अस्थायी रूप से अपनी जेब से धन खर्च करें, जिसका बाद में नियमानुसार पूरा भुगतान कर दिया जाएगा।

स्वीकृत बिलों का भुगतान रोकने और फंड में हेराफेरी का दावा
शिकायत के मुताबिक दिए गए निर्देशों के तहत कॉन्स्टेबल ने विभिन्न सरकारी व्यवस्थाओं पर कुल 1,87,890 रुपये अपनी जेब से खर्च किए थे। इसके बाद खर्च किए गए धन से संबंधित सभी आवश्यक बिल और दस्तावेज संबंधित कार्यालय में जांच के लिए जमा करवा दिए गए थे। जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद बिलों को स्वीकृति दे दी गई थी और अधिकारियों के हस्ताक्षर भी हो चुके थे। हालांकि, इसके बावजूद कॉन्स्टेबल को स्वीकृत राशि का भुगतान नहीं किया गया।
घटनाक्रम में बड़ा मोड़ जुलाई 2026 में आया, जब शिकायतकर्ता ने अपने बकाया भुगतान के संबंध में जानकारी जुटानी शुरू की। जांच के दौरान पता चला कि संबंधित राशि फंड से निकाली जा चुकी थी, लेकिन वह कॉन्स्टेबल के बैंक खाते में जमा ही नहीं हुई थी। इसके बाद जब वित्तीय रिकॉर्ड्स की गहराई से पड़ताल की गई, तो प्राथमिक जांच में सामने आया कि जिला पुलिस के एक विशिष्ट फंड से बीते दो वर्षों में लगभग 2.35 लाख रुपये की अवैध निकासी की गई थी।
स्थानांतरण के दौरान फंड की कमी पूरी करने का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि निकाले गए 2.35 लाख रुपये के खर्च का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इसके अतिरिक्त, शिकायतकर्ता ने दावा किया कि जब संजीव कुमार गांधी का स्थानांतरण शिमला के एसएसपी पद से कार्मिक विभाग में हुआ, तो उस समय विभागीय फंड में दिख रही कमी को पूरा करने का प्रयास किया गया।
आरोप है कि कॉन्स्टेबल के स्वीकृत बिलों के एवज में निकाली गई राशि को उन्हें देने के बजाय सीधे संबंधित फंड के खाते में स्थानांतरित कर दिया गया। इस प्रक्रिया के कारण कॉन्स्टेबल को उनकी मेहनत और जेब से खर्च की गई स्वीकृत राशि नहीं मिल सकी, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
भारतीय न्याय संहिता की इन धाराओं में मामला दर्ज
शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत तथ्यों और प्राथमिक पड़ताल के आधार पर शिमला पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज कर लिया है। सदर थाना पुलिस ने पूर्व एसएसपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(5), 314, 318, 336 और 340 के तहत प्राथमिकी पंजीकृत की है।
पुलिस प्रशासन का कहना है कि मामले की गहनता से जांच की जा रही है। जांच अधिकारी सभी वित्तीय दस्तावेजों और लेन-देन के रिकॉर्ड की बारीकी से समीक्षा कर रहे हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि लगाए गए सभी आरोपों की आधिकारिक पुष्टि निष्पक्ष जांच और आगामी कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संभव होगी।




















