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पुलिस कांस्टेबल वेतन विसंगति मामला फिर लटका, गठित कमेटी 3 सप्ताह में भी नही दे पाई रिपोर्ट

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प्रजासत्ता|
दिन-रात कानून व्यवस्था और प्रदेश के नागरिकों की सुरक्षा में तैनात हिमाचल पुलिस बल सरकार में वेतन विसंगति की मार से जूझ रहा है। वेतनमान के लाभाें से वंचित रहने वाले 2015 के बाद भर्ती हुए पुलिस कांस्टेबल इस पेचीदे मामले को मुख्यमंत्री और सरकार के सामने उठा चुके हैं। जहां उन्होंने वित्त सचिव से चर्चा कर मामले को सुलझाने का आश्वासन दिया गया था| लेकिन 3 सप्ताह का समय बीत जाने के बाद इस मामले में कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

मामला डीजीपी एचपी के संज्ञान में भी लाया गया और उन्होंने एक सप्ताह के भीतर पुन: रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश के साथ समिति का गठन किया, लेकिन दो सप्ताह बीत गए और समिति द्वारा कोई रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई। सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार रिपोर्ट प्रस्तुत करने के स्थान पर समिति के अध्यक्ष को 4 सप्ताह का चिकित्सीय विश्राम दिया जाता है और एक सदस्य को 24 दिसम्बर तक अवकाश पर भेजा जाता है, इससे पता चलता है कि विभाग इस मामले को लेकर कितना गंभीर है।

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पुलिस कांस्टेबलों का कहना है कि अन्य विभाग/संगठन (जैसे एचआरटीसी पीस मील वर्कर, स्वर्ण आयोग, ओपीएस कर्मचारी और मृतक कर्मचारियों के परिवार) जिन्होंने विधानसभा में अपनी मांगों को लेकर विरोध किया, उनकी मांगों को सरकार द्वारा प्राथमिकता के आधार पर हल किया गया। उनका कहना है कि पुलिस कांस्टेबल अनुशासित बल में हैं, हम अपनी मांगों से संबंधित विरोध नहीं कर सकते। यही कारण है कि सरकार उनके मामले को नहीं सुलझा रही है| वह बंधुआ मजदूर की तरह महसूस कर रहे हैं।

बता दें कि 2013 के बाद भर्ती हुए पुलिस कांस्टेबल के वेतन विसंगतियों के मामले में आईजी के नेतृत्व में चार सदस्य पुलिस कमेटी गठित की थी। इस कमेटी ने 1 सप्ताह के भीतर पूरे मामले का अध्ययन कर उसकी रिपोर्ट डीजीपी को सौंपेनी थी। डीजीपी ने यह रिपोर्ट को राज्य सरकार को सौंपनी थी । लेकिन 3 सप्ताह का समय बीत जाने के बाद इस मामले में कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

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गौरतलब है कि प्रभावित पुलिस कान्सटेबल ने संयुक्त सलाहकार समिति की बैठक में मांग पूरी न होने पर मैस में भोजन करना त्याग दिया था। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इस मसले पर प्रभावित पुलिस कर्मी को मदद का भरोसा दिया था। राज्य पुलिस मुख्यालय ने भी एडवायजरी जारी कर अनुशासन बनाए रखने की अपील की थी। इस संबंध में डीजीपी संजय कुंडू ने आइजी सीटीएस एपी सिंह की अगुवाई में कमेटी का गठन किया था|लेकिन अभी तक वह अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत नही कर पाई है|

वहीँ, पुलिस कांस्टेबलों की माने तो सरकार न तो मामले को सुलझा रही है और न ही विभाग इस मामले में कोई दिलचस्पी दिखा रहा है। उन्होंने मांग की है कि मामले को जल्द से जल्द हल करें, ताकि बल का नैतिक पतन न हो और बंधुआ मजदूरी की तरह भी महसूस न हो।

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