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October Krishi Advisory Himachal Pradesh: अक्तूबर में खेतों में क्या बोएं, कैसे करें तैयारी? कृषि विश्वविद्यालय ने किसानों को बताया पूरा फसलवार प्लान

Agriculture News: चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय ने अक्तूबर माह के प्रथम पखवाड़े के लिए फसलवार एडवाइजरी जारी की है। इसमें गेहूं, चना, राया, मटर और सब्जियों की उन्नत किस्मों की बिजाई, बीज उपचार और कीट नियंत्रण के सटीक दिशा-निर्देश शामिल हैं।
Published on: 1 अक्टूबर 2026
October Krishi Advisory Himachal Pradesh: अक्तूबर में खेतों में क्या बोएं, कैसे करें तैयारी? कृषि विश्वविद्यालय ने किसानों को बताया पूरा फसलवार प्लान

October Krishi Advisory Himachal Pradesh: चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर के प्रसार शिक्षा निदेशालय की ओर से अक्तूबर 2026 के प्रथम पखवाड़े में किए जाने वाले कृषि कार्यों को लेकर किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की गई है। कृषि एवं पशुपालन वैज्ञानिकों की ओर से जारी सलाह में किसानों को गेहूं, चना और राया की बुआई के साथ मटर, लहसुन व विभिन्न सब्जियों की खेती को लेकर जरूरी जानकारी दी गई है।

कृषि विज्ञान केंद्र धौलाकुआं के प्रभारी एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. पंकज मित्तल ने बताया कि किसानों को फसल के अनुसार बीज की मात्रा, बुआई की गहराई, खाद एवं उर्वरक, बीज उपचार और रोग-कीट नियंत्रण का विशेष ध्यान रखना चाहिए। एडवाइजरी में गृह विज्ञान से जुड़े परिवार के भोजन, मौसमी सब्जियों के संरक्षण, स्वच्छता और महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर भी सुझाव दिए गए हैं।

गेहूं की अगेती किस्मों की अक्तूबर के पहले पखवाड़े में करें बिजाई
जिला सिरमौर के ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों के सिंचित एवं असिंचित क्षेत्रों में अक्तूबर के पहले पखवाड़े में गेहूं की अगेती किस्मों की बिजाई की जा सकती है। किसानों को एचएस-542, एचपीडब्ल्यू-360 और वीएल-829 जैसी अनुमोदित उन्नत किस्मों के बीज का समय पर प्रबंध करने की सलाह दी गई है। गेहूं के लिए बीज की मात्रा 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रखें। बिजाई से पहले गेहूं के बीज को फफूंदनाशक बैविस्टिन 2.5 ग्राम, वीटावैक्स 2.5 ग्राम या रैक्सिल 1 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करें।

मध्य अक्तूबर चना बिजाई का सही समय
चना की खेती के लिए अच्छे जल निकास वाली दोमट तथा रेतीली भूमि उत्तम रहती है। जमीन थोड़ी ढेलों वाली होनी चाहिए, जिससे जड़ों में हवा का अच्छी तरह प्रवेश हो सके। चने की बिजाई का मुख्य समय मध्य अक्तूबर है। चने की उन्नत किस्मों में हिमाचल चना-1, हिमाचल चना-2, जीपीएफ-2 और एचपीजी-17 शामिल हैं। छोटे व मध्यम दाने वाली किस्मों के लिए 40 से 45 किलोग्राम तथा बड़े दाने वाली किस्मों के लिए 80 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर रखें।

बिजाई से पहले बीज को बैविस्टिन 1.5 ग्राम और थीरम 1.5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करें। जीपीएफ-2, हिमाचल चना-2 और हिमाचल चना-1 की बिजाई 30 सेंटीमीटर की लाइन दूरी पर, जबकि एचपीजी-17 की बिजाई 50 सेंटीमीटर की दूरी पर करें। बीज को 10 से 12.5 सेंटीमीटर गहराई पर डालें। कम गहराई पर बिजाई करने से उखेड़ा या विल्ट रोग लगने का खतरा रहता है।

राया की बिजाई के समय खेत में पर्याप्त नमी रखें
राया तिलहनी फसल है। इसे निचले पर्वतीय क्षेत्रों में शुद्ध तथा गेहूं के साथ मिश्रित खेती के रूप में लगाया जा सकता है। इसकी खेती बारानी और सिंचित दोनों परिस्थितियों में की जा सकती है। आरसीसी-4 और करण राई इसकी अनुमोदित किस्में हैं। राया के लिए बीज की मात्रा 6 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रखें। बिजाई पंक्ति में 30 सेंटीमीटर की दूरी पर करें और बीज को 2 से 3 सेंटीमीटर की गहराई पर डालें। बिजाई के समय खेत में पर्याप्त नमी होना जरूरी है।

मटर की अगेती किस्मों की बिजाई के साथ खाद की मात्रा का रखें ध्यान
प्रदेश के निचले पर्वतीय क्षेत्रों में मटर की अगेती किस्मों पालम त्रिलोकी, अरकल, वीएल-7 तथा मटर अगेता की बिजाई करें। बिजाई के समय प्रति हेक्टेयर 200 क्विंटल गोबर की खाद के अतिरिक्त 185 किलोग्राम इफको 12:32:16 मिश्रित खाद, 50 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश तथा 60 किलोग्राम यूरिया डालने की सलाह दी गई है।

लहसुन की इन किस्मों की करें रोपाई
लहसुन की सुधरी प्रजातियों जीएचसी-1 और सोलन सलेक्शन की रोपाई की जा सकती है। खेत तैयार करते समय अंतिम जुताई के दौरान प्रति हेक्टेयर 234 किलोग्राम इफको 12:32:16 मिश्रित खाद, 37.5 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश और 210 किलोग्राम यूरिया डालें।

निचले पर्वतीय क्षेत्रों में चाइनीज बंदगोभी की रोपाई करें
निचले पर्वतीय क्षेत्रों में चाइनीज बंदगोभी की पौध की रोपाई 45 और 30 सेंटीमीटर की दूरी पर करने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही पालक, मेथी, धनिया, मूली, गाजर और शलजम आदि की बिजाई भी अक्तूबर के पहले पखवाड़े में करें।

मध्यवर्ती पहाड़ी क्षेत्रों में फूलगोभी से ब्रॉकली तक की रोपाई
मध्यवर्ती पहाड़ी क्षेत्रों में फूलगोभी, बंदगोभी, गांठगोभी, चाइनीज बंदगोभी तथा ब्रॉकली की तैयार पौध की रोपाई करें। रोपाई के समय खेत की अंतिम जुताई में प्रति हेक्टेयर 250 क्विंटल गोबर की खाद के अतिरिक्त 234 किलोग्राम इफको 12:32:16 मिश्रित खाद, 54 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश और 100 किलोग्राम यूरिया डालें।इन्हीं क्षेत्रों में पालक, मेथी, धनिया, मूली, गाजर और शलजम की बिजाई करें। इसके अलावा कसूरी मेथी आईसी-74 तथा लहसुन की जीएचसी-1 और एग्री फाउंडेशन पार्वती किस्म की भी बिजाई की जा सकती है।

पहले से लगी सब्जियों में निराई-गुड़ाई के साथ यूरिया डालें
खेतों में लगी अन्य सब्जियों में निराई-गुड़ाई करते रहें। गुड़ाई के समय पौधों की जड़ों के पास 40 से 50 किलोग्राम यूरिया प्रति हेक्टेयर की दर से नत्रजन डालने की सलाह दी गई है।

आलू में अंकुरण से कंद बनने तक तापमान का रखें ध्यान
आलू की फसल विभिन्न जलवायु क्षेत्रों में सफलतापूर्वक लगाई जा सकती है। तापमान और जल आलू के उत्पादन को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण कारक हैं। अच्छे अंकुरण के लिए 24 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान, उत्पादन एवं वानस्पतिक वृद्धि के लिए 18 से 20 डिग्री सेल्सियस तथा कंद निर्माण के लिए 17 से 20 डिग्री सेल्सियस औसत तापमान की जरूरत होती है।

फूलगोभी-बंदगोभी की नर्सरी में मिट्टी का करें उपचार
फूलगोभी और बंदगोभी आदि सब्जियों की स्वस्थ एवं रोगमुक्त पौध तैयार करने के लिए क्यारियों की मिट्टी को बिजाई से 20 दिन पहले शोधित करें। इसके लिए एक भाग फार्मोलीन और सात भाग पानी का घोल बनाकर मिट्टी का उपचार करने की सलाह दी गई है। बिजाई से पूर्व बीज का उपचार भी कर लें।

कटुआ कीट वाले खेतों में पौधों के आसपास करें उपचार
जिन खेतों में कटुआ कीट की समस्या रहती है, वहां पौधरोपण के बाद क्लोरपाइरिफॉस 20 ईसी की 2.5 मिलीलीटर मात्रा प्रति लीटर पानी के घोल में मिलाकर पौधों के आसपास सिंचाई करने की सलाह दी गई है।

मटर में बीज उपचार से बीमारियों का खतरा होगा कम
मटर में लगने वाली विभिन्न बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए बिजाई से पहले बीज उपचार करना जरूरी है। किसानों को मटर के बीज को बैविस्टिन या वीटावैक्स 2.5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करने की सलाह दी गई है।

राया में तेला दिखे तो करें फसल का उपचार
तिलहनी फसलों में तेला के नियंत्रण के लिए 750 मिलीलीटर साइपरमेथरिन (रिपकार्ड 10 ईसी) या 750 मिलीलीटर मिथाइल डैमिटान अथवा 750 मिलीलीटर डाईमिथोएट (रोगर 30 ईसी) को 750 लीटर पानी में प्रति हेक्टेयर घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

परिवार के भोजन में शामिल करें ये अनाज
एडवाइजरी में गृह विज्ञान से जुड़े सुझाव भी दिए गए हैं। परिवार के भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, दूध उत्पाद, मौसमी फल और मोटे अनाज शामिल करने की सलाह दी गई है। बच्चों के भोजन में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक पदार्थ जैसे दालें, दूध, अंडा, फल और सब्जियां शामिल करने को कहा गया है।

मौसमी फल-सब्जियों से बनाएं अचार, चटनी और मुरब्बे
उपलब्ध मौसमी फलों और सब्जियों से स्वच्छता का ध्यान रखते हुए अचार, चटनी और मुरब्बे तैयार किए जा सकते हैं। मौसमी सब्जियों को सुखाकर या उचित तरीके से संरक्षित कर बाद के लिए रखा जा सकता है। घर में उपलब्ध उत्पादों से अचार, जैम, स्क्वैश, सूखी सब्जियां, पापड़ और अन्य मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने की सलाह भी दी गई है।

पानी की स्वच्छता और रसोई की सफाई पर दें ध्यान
पीने के पानी को स्वच्छ एवं ढके हुए बर्तन में रखें तथा आवश्यकता होने पर पानी को उबालकर पिएं। रसोई को नियमित रूप से साफ करें और अनाज एवं दालों को नमी व कीटों से बचाकर रखें। खेतों में काम करने वाली महिलाओं को पर्याप्त पानी, पौष्टिक भोजन और काम के बीच उचित विश्राम देने की सलाह दी गई है।

क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुसार कृषि विशेषज्ञों से लें सलाह
प्रसार शिक्षा निदेशालय की ओर से किसानों से आग्रह किया गया है कि वे अपने क्षेत्र की भौगोलिक एवं पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुसार कृषि कार्य करें। अधिक और अति विशिष्ट जानकारी के लिए नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क बनाए रखें। अतिरिक्त जानकारी के लिए कृषि तकनीकी सूचना केंद्र एटिक के 01894-230395 या 1800-180-1551 पर संपर्क किया जा सकता है।

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