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चैत्र नवरात्रि 2023: शुभ योगों में प्रारंभ हो रहे चैत्र नवरात्रि व नव संवत्सर

नवरात्रि में नवदुर्गा को यह 9 भोग लगाने से जागेगा आपका भाग्य

-कुछ प्रांतों में सत्ता परिवर्तन, विग्रह, राजनीतिक उथल-पुथल व राजनैतिक अस्थिरता बढ़ेगी
सत्यदेव शर्मा सहोड़
सनातन धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व होता है, चैत्र माह और शारदीय नवरात्रि को प्रमुख माना जाता है। चैत्र नवरात्रि का प्रारंभ चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होता है, इस वर्ष चैत्र नवरात्रि बुधवार 22 मार्च 2023 से प्रारंभ हो रहे हैं। जिसका समापन 30 मार्च गुरुवार में होगा। जाने माने अंक ज्योतिषी एवं वशिष्ठ ज्योतिष सदन के अध्यक्ष पंडित शशिपाल डोगरा बताते हैं कि इस वर्ष मां दुर्गा जी का आगमन नौका पर होगा। शास्त्रों में मां के इस रूप को भक्तों की समस्त इच्छाएं पूर्ण करने वाला माना जाता है। पंडित डोगरा ने बताया कि चैत्र नवरात्र के पहले दिन कई शुभ योग बन रहे हैं। इस समय में घटस्थापना आपके लिए बहुत ही लाभदायक और उन्नतिकारक सिद्ध होगा।

पंडित शशिपाल डोगरा।
फोटो :- पंडित शशिपाल डोगरा

उन्होंने बताया कि चैत्र नवरात्रि प्रतिपदा तिथि से ही नया हिंदू वर्ष प्रारंभ हो जाता है, चैत्र नवरात्रि में अबकी बार पूरे नौ दिनों की नवरात्रि होगी, नवरात्रि के दौरान तीन सर्वार्थ सिद्धि योग 23 मार्च, 27 मार्च, 30 मार्च को लगेगा। जबकि अमृत सिद्धि योग 27 और 30 मार्च को लगेगा। रवि योग 24 मार्च, 26 मार्च और 29 मार्च को लगेगा और नवरात्रि के अंतिम दिन रामनवमी के दिन गुरु पुष्य योग भी रहेगा। सनातन धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व होता है, चैत्र माह और शारदीय नवरात्रि को प्रमुख माना जाता है।

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नवरात्रि के दौरान तीन सर्वार्थ सिद्धि योग 23 मार्च, 27 मार्च, 30 मार्च को लगेगा। चैत्र नवरात्र का आरंभ अबकी बार बुधवार को हो रहा है इसी दिन से हिंदू नववर्ष भी आरंभ भी हो जाएगा चैत्र नवरात्रि 22 मार्च से शुरू होने जा रही है। इसी दिन से अनल तदुपरांत पिंगल नामक संवत भी शुरू होगा। इस वर्ष चैत्र नवरात्रि पर माता का वाहन नाव होगा जो इस बात का संकेत है इस वर्ष खूब वर्षा होगी। अश्विन और चैत्र मास की नवरात्रि सबसे ज्यादा प्रचलित है। कहा जाता है कि सतयुग में सबसे ज्यादा प्रसिद्ध और प्रचलित चैत्र नवरात्रि थी, इसी दिन से युग का आरंभ भी माना जाता है। इसलिए संवत का आरंभ चैत्र नवरात्रि से ही होता है।

घटस्थापना शुभ मुहूर्त
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 22 मार्च को सुबह 6:29 बजे से शुरू होकर सुबह 7:40 बजे तक रहेगा। इन मुहूर्तों में ही नवरात्रि पूजा का आरंभ किया जा सकेगा। साथ ही यदि किसी विशेष अनुष्ठान को करना है तो उसके लिए भी यही सही समय रहेगा।

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अंक ज्योतिष के अनुसार नव संवत्सर
अंक ज्योतिषी पंडित शशिपाल डोगरा ने बताया कि 22 मार्च (बुधवार) को नव संवत 2080 की शुरुआत होने जा रही है। इसका राजा बुध व मंत्री शुक्र होगा। बुध युवाओं व वाणी का कारक है और शुक्र स्त्री व विलासिता का कारक है। अंक ज्योतिष के हिसाब से संवत 2080 = 2 + 0 + 8 + 0 = 10 = 1 + 0 = 1 अंक सूर्य का अंक है। सूर्य यश व सत्ता का कारक है। 22 मार्च 2+2=4 अंक जो राहु का अंक है। राहु एक ऐसा ग्रह है जो भ्रमित करता है। राहु जो श्मशान योग बनाता है। राहु जो सत्ता में अचानक ही बदलाव ले आता है। 2023 जिसका 2 + 0 + 2 + 3 = 7 अंक केतु का बनता है। केतु बिना सिर का ग्रह है जो बिना दिशा का है। ये वर्ष राहु व केतु की चपेट में रहेगा। युवाओं को संकट का सामना करना पड़ेगा। युवाओं को खोने का भय इस वर्ष में बहुत रहेगी। विश्व में युद्ध व अशांति का माहौल बनेगा। भारत वर्ष विश्व में आगे बढ़ेगा व अपना नाम ऊंचा करेगा।

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साहित्य की आड़ में छिपे विरोधी होंगे उजागर
पंडित डोगरा ने बताया कि संवत 2080 में वर्षा अच्छी होने की संभावना है। राजा बुध होने से उस वर्ष देश में ठगी छल कपट करने वाले लोगों का बोलबाला व प्रभाव अधिक रहेगा। देश में कुछ सफेदपोश अपराधियों का भंडाफोड़ होगा। इस संवत में गीतकार, संगीतकार, अभिनेता, लेखकों की गैर कानूनी एवं देश विरोधी गतिविधियां उजागर और दृष्टिगोचर होगी। शासक वर्ग द्वारा किसी विशेष वर्ग को प्रसन्न करने के लिए लोकप्रिय एवं लोकलुभावन घोषणाएं भी की जाएगी, व्यापारियों को विशेष सुविधाएं दी जाएगी। परंतु उनका विशेष लाभ नहीं मिल पाएगा। संतों एवं महंतों का वर्चस्व बढ़ेगा, प्रतिष्ठित लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई होगी। जिसके कारण उन्हें जेल का योग बन रहा है। कुछ प्रांतों में शासन परिवर्तन, विग्रह एवं राजनीतिक उथल-पुथल, राजनीतिक अस्थिरता बनेगी। प्रजा में रोग व आर्थिक परेशानियां बढ़ेंगी। संवत का मंत्री शुक्र होने के कारण भूस्खलन व प्राकृतिक प्रकोप से कृषि धन आदि की हानि होगी। शुक्र के कारण वात-पित, शुगर एवं यौन रोगों का प्रकोप बढ़ेगा। ऐश्वर्या एवं सौंदर्य प्रसाधनों तथा भडक़ाऊ फैशन पर अधिक खर्च करेंगे। इस संवत में 3 सूर्य ग्रहण व 1 चंद्र ग्रहण लगेगा। जिसके कारण विश्व में बड़ी उथल पुथल के योग बन रहे है। युद्ध की तरफ विश्व जा सकता है।

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