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Makar Sankranti 2026: 14 या 15 जनवरी? कन्फ्यूजन खत्म, जानिए सही तारीख और दुर्लभ संयोग!

Published on: 6 January 2026
Makar Sankranti 2026: 14 या 15 जनवरी? कन्फ्यूजन खत्म, जानिए सही तारीख और दुर्लभ संयोग!

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति हिंदू धर्म का प्रमुख त्योहार है, जो सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर मनाया जाता है। मकर संक्रांति न केवल धार्मिक पर्व है, बल्कि जीवन में सकारात्मकता, समृद्धि और नई शुरुआत का संदेश देता है। इस पर्व पर पवित्र नदियों में स्नान और दान कर सूर्य देव की कृपा प्राप्त करने का बड़ा महत्त्व है।

ऐसे में मकर संक्रांति का पर्व नजदीक आते ही भक्तों के मन में बड़ा सवाल उठ रहा है कि इस बार त्योहार 14 जनवरी को मनाएं या 15 को?, हलांकि द्रिक पंचांग और ज्यादातर वैदिक गणनाओं के अनुसार, मकर संक्रांति 2026 बुधवार, 14 जनवरी को ही मनाई जाएगी। इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे, जो उत्तरायण की शुरुआत का प्रतीक है।

देश के अधिकांश हिस्सों में 14 जनवरी को ही स्नान-दान, सूर्य पूजा और अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे। दिल्ली, उज्जैन जैसे शहरों में संक्रांति का सटीक समय दोपहर लगभग 2:49 से 3:13 बजे के बीच रहेगा। चूंकि यह दिन के समय हो रहा है, इसलिए सभी शुभ कार्य 14 जनवरी को ही संपन्न होंगे।

महा पुण्य काल – सबसे शुभ समय
गंगा स्नान और दान-पुण्य के लिए महा पुण्य काल अत्यंत फलदायी माना जाता है। द्रिक पंचांग के अनुसार:
– सुबह का शुभ समय: 7:15 से 9:00 बजे तक
– दोपहर का महा पुण्य काल: 3:13 से 5:00 बजे तक (कुछ पंचांगों में 2:49 से 3:42 बजे तक)
-पवित्र स्नान का सबसे उत्तम मुहूर्त सुबह सूर्योदय के बाद 9:03 से 10:48 बजे तक रहेगा।

Makar Sankranti 2026 पर इस बार का खास संयोग
2026 में मकर संक्रांति पर षटतिला एकादशी का भी दुर्लभ योग बन रहा है। सूर्य देव के साथ भगवान विष्णु की पूजा से परिवार में सुख-शांति और पितरों को तृप्ति मिलती है। गंगा जैसी पवित्र नदियों में डुबकी लगाने और दान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन शुभ समयों में स्नान और दान करने से नकारात्मक कर्मों का प्रभाव कम होता है और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।

क्या दान करें?
तिल-गुड़ का दान सूर्य दोष दूर करता है। खिचड़ी, अन्न, कंबल, वस्त्र और तिल से बने पदार्थ दान करने से आर्थिक संकट दूर होते हैं और धन-धान्य की वृद्धि होती है। कुछ क्षेत्रीय पंचांगों में मामूली अंतर हो सकता है, लेकिन मुख्य पर्व 14 जनवरी को ही श्रद्धा से मनाएं। यह पावन अवसर जीवन में नई ऊर्जा और समृद्धि लाएगा!

मकर संक्रांति का महत्व
मकर संक्रांति हिंदू धर्म का प्रमुख त्योहार है, जो सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर मनाया जाता है। यह उत्तरायण की शुरुआत का प्रतीक है – जब सूर्य दक्षिण से उत्तर की ओर मुड़ता है, दिन बड़े होने लगते हैं और प्रकृति में नई सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। शास्त्रों में इसे देवताओं का दिन माना जाता है, जबकि दक्षिणायन को रात्रि।

-धार्मिक महत्व पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन सूर्य अपने पुत्र शनि की राशि में जाते हैं, जो पिता-पुत्र मिलन का प्रतीक है।
-महाभारत में भीष्म पितामह ने उत्तरायण का इंतजार कर इसी दिन देह त्यागी थी, क्योंकि इस काल में मृत्यु मोक्ष दिलाती है।
-भगवान विष्णु ने इस दिन राक्षसों का अंत कर नकारात्मकता को दफनाया, जो बुराइयों पर अच्छाई की जीत दर्शाता है।
-गीता में श्रीकृष्ण ने उत्तरायण को शुभ काल बताया है।

कृषि प्रधान भारत में यह नई फसल का उत्सव है। किसान सूर्य और प्रकृति का आभार व्यक्त करते हैं। देशभर में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है, जैसे  गुजरात में पतंगबाजी, तमिलनाडु में पोंगल, पंजाब में लोहड़ी, उत्तर भारत में खिचड़ी और तिल-गुड़। यह पर्व सूर्य की उत्तरायण गति से जुड़ा है, जो सर्दी के अंत और गर्मी की शुरुआत का संकेत है। तिल-गुड़ खाने से शरीर को गर्मी और ऊर्जा मिलती है।

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