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AIIMS Bilaspur Hand Surgery: मशीन में कटकर लगभग अलग हो चुका था हाथ, AIIMS बिलासपुर के डॉक्टरों ने 7 घंटे की सर्जरी से रचा इतिहास!

Bilaspur News: हिमाचल प्रदेश के एम्स बिलासपुर में डॉक्टरों की टीम ने 7 घंटे तक चली जटिल माइक्रोसर्जरी के माध्यम से मरीज का लगभग कट चुका हाथ सफलतापूर्वक जोड़कर स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है।
By PNT
Published on: 11 August 2026
AIIMS Bilaspur Hand Surgery: मशीन में कटकर लगभग अलग हो चुका था हाथ, AIIMS बिलासपुर के डॉक्टरों ने 7 घंटे की सर्जरी से रचा इतिहास!

सुभाष  गौतम | बिलासपुर
AIIMS Bilaspur Hand Surgery: हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान बिलासपुर के डॉक्टरों ने एक बेहद जटिल और दुर्लभ चिकित्सा प्रक्रिया को सफलता पूर्वक अंजाम दिया है। एम्स बिलासपुर के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने एक मरीज के लगभग पूरी तरह कट चुके हाथ को सर्जरी के जरिए जोड़कर उसकी जिंदगी और कार्यक्षमता दोनों को बचा लिया है।

यह मामला पूरे हिमाचल प्रदेश का पहला ‘हैंड रीवैस्कुलराइजेशन’ (Hand Revascularization) मामला बताया जा रहा है। मरीज जब बेहद गंभीर स्थिति में अस्पताल लाया गया था, तब उसका हाथ शरीर से लगभग अलग हो चुका था। मामले की गंभीरता को देखते हुए एम्स के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने बिना समय गंवाए आपातकालीन स्थिति में तुरंत ऑपरेशन की योजना बनाई।

यह जटिल और संवेदनशील सर्जरी लगातार करीब 7 घंटे तक चली। इस मैराथन ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों की उच्च प्रशिक्षित टीम ने अत्याधुनिक माइक्रोसर्जरी तकनीकों का प्रयोग किया। शल्य चिकित्सा के दौरान डॉक्टरों ने मरीज के हाथ की सूक्ष्म नसों, धमनियों और टूटी हुई हड्डियों को आपस में बेहद सटीकता से जोड़ा। नसों और धमनियों के सफल संयोजन के बाद कटे हुए हिस्से में दोबारा रक्त संचार बहाल किया गया, जो इस प्रक्रिया का सबसे चुनौतीपूर्ण चरण था।

इस जटिल और ऐतिहासिक सर्जरी का कुशल नेतृत्व एम्स बिलासपुर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. नवनीत शर्मा ने किया। उनकी देखरेख में सर्जनों और मेडिकल स्टाफ की टीम ने अत्यधिक सूक्ष्मता और धैर्य के साथ इस ऑपरेशन को पूरा किया। एम्स बिलासपुर के इतिहास में इस स्तर की अत्याधुनिक और जटिल माइक्रोसर्जरी को पहली बार अंजाम दिया गया है।

सर्जरी के सफल समापन के बाद मरीज को गहन चिकित्सा निगरानी में रखा गया था। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की निरंतर देखभाल के चलते मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार देखने को मिला। अब मरीज पूरी तरह से सुरक्षित और स्वस्थ है। सफल उपचार के बाद, सर्जरी के 10 दिन बीत जाने पर मरीज को अस्पताल से छुट्टी (डिस्चार्ज) दे दी गई है। डॉक्टरों की इस अभूतपूर्व उपलब्धि को हिमाचल प्रदेश के संपूर्ण स्वास्थ्य और चिकित्सा क्षेत्र के लिए एक मील का पत्थर माना जा रहा है।

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