Bilaspur News Today: जिला बिलासपुर में संचालित सभी जल गतिविधियों को लेकर जिला प्रशासन ने सुरक्षा मानकों को लेकर निर्देश जारी किए है। हाल ही में देश के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर मध्य प्रदेश के जबलपुर में हुई नौका दुर्घटना जैसे मामलों को ध्यान में रखते हुए उपायुक्त एवं अध्यक्ष जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण राहुल कुमार ने जन सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए तत्काल प्रभाव से अनिवार्य सुरक्षा दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
जिला बिलासपुर में गोविंद सागर झील तथा कोल डैम जलाशय में नाव संचालन, जल क्रीड़ा, पर्यटन गतिविधियां एवं फेरी सेवाएं बड़े स्तर पर संचालित की जा रही हैं, जिनमें पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय लोग भी शामिल रहते हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की लापरवाही जान-माल के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकती है। आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत जारी इन निर्देशों का पालन सभी संबंधित संचालकों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है।
जारी निर्देशों के अनुसार सभी जल गतिविधियों में शामिल प्रत्येक व्यक्ति के लिए मानक लाइफ जैकेट पहनना अनिवार्य होगा तथा बिना लाइफ जैकेट किसी भी गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रत्येक नाव या जलयान में पर्याप्त संख्या में लाइफ ब्वॉय, विभिन्न आकार के लाइफ जैकेट, सुरक्षा रस्सियां, प्राथमिक उपचार किट एवं अन्य स्वीकृत जीवन रक्षक उपकरण उपलब्ध होना अनिवार्य किया गया है। साथ ही नावों की वहन क्षमता स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जाएगी और किसी भी स्थिति में निर्धारित सीमा से अधिक सवारियां नहीं बैठाई जाएंगी। मोटर बोट के इंजन की क्षमता भी उसकी बैठने की क्षमता के अनुरूप सुनिश्चित की जाएगी ताकि संचालन सुरक्षित गति से किया जा सके।
जारी निर्देशों में कहा गया है कि केवल प्रशिक्षित एवं प्रमाणित कर्मियों की ही तैनाती की जाएगी। नाव संचालक, जल क्रीड़ा संचालक एवं लाइफगार्ड के पास तैराकी, बचाव कार्य, प्राथमिक उपचार एवं आपदा प्रबंधन से संबंधित वैध प्रमाणपत्र होना अनिवार्य होगा। बिना प्रशिक्षण या प्रमाणन वाले व्यक्तियों की तैनाती पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी।
सभी नावों, इंजनों एवं जल क्रीड़ा उपकरणों का नियमित तकनीकी निरीक्षण सक्षम प्राधिकरण द्वारा किया जाएगा और किसी भी प्रकार से अनुपयुक्त पाए जाने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से संचालन से बाहर कर दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त प्रत्येक यात्रा से पहले पर्यटकों को सुरक्षा नियमों, आपातकालीन प्रक्रियाओं एवं आचरण संबंधी निर्देशों की विस्तृत जानकारी देना भी अनिवार्य किया गया है।
महत्वपूर्ण जल स्थलों पर 24 घंटे प्रशिक्षित बचाव दल, रेस्क्यू बोट, प्राथमिक उपचार सुविधाएं एवं आपात संचार प्रणाली उपलब्ध करवाई जाएगी। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए व्यवस्थित बचाव एवं निकासी योजना भी सुनिश्चित की जाएगी। जल मार्गों पर जल की गहराई, मौसम संबंधी जोखिम, प्रतिबंधित क्षेत्र एवं सुरक्षा निर्देशों से संबंधित स्पष्ट एवं बहुभाषी चेतावनी बोर्ड लगाए जाएंगे, जबकि चिन्हित उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में जल गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
उपायुक्त राहुल कुमार ने कहा कि इन दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वाले संचालकों या एजेंसियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें लाइसेंस रद्द करना, आर्थिक दंड एवं आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत कानूनी कार्रवाई शामिल है। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा और जन सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
















