Amazon Now: भारत के क्विक कॉमर्स बाजार में पैर जमाने की रेस अब बेहद आक्रामक मोड़ पर पहुंच चुकी है। दुनिया की दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी Amazon ने भारतीय बाजार में अपनी 10 मिनट की डिलीवरी सर्विस ‘अमेजन नाउ’ (Amazon Now) का तेजी से विस्तार करना शुरू कर दिया है। अमेजन के इस कदम ने पहले से बाजार में मौजूद ब्लिंकिट, स्विगी इंस्टामार्ट और जेप्टो जैसी दिग्गज कंपनियों के सामने कड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
अमेजन की इस आक्रामक रणनीति की खबर सामने आते ही शेयर बाजार के निवेशकों में गहरी चिंता देखी गई, जिसके चलते ब्लिंकिट की पैरेंट कंपनी इटरनल (Eternal) और स्विगी (Swiggy) के शेयरों में भारी बिकवाली का दौर शुरू हो गया। बता दें कि अमेजन की इस आक्रामक एंट्री का सीधा और बड़ा असर दोनों कंपनियों की मार्केट वैल्यू पर पड़ा है।

निवेशकों के बीच पैदा हुए डर के कारण इटरनल और स्विगी की संयुक्त मार्केट वैल्यू में करीब 1.5 बिलियन डॉलर यानी लगभग 1500 करोड़ रुपये की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि अमेजन की वित्तीय ताकत और उसका विशाल बुनियादी ढांचा इस सेक्टर में पहले से काम कर रही कंपनियों के लिए सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरा है।
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अमेजन ने भारत में साल 2030 तक करीब 4 बिलियन डॉलर (लगभग 35,000 करोड़ रुपये) के अतिरिक्त निवेश की प्रतिबद्धता को दोहराया है, जिससे साफ है कि कंपनी बाजार में लंबे समय तक टिकने की तैयारी के साथ उतरी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेजन अपने इस क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए भारी डिस्काउंट, आकर्षक कैशबैक, फ्री डिलीवरी और अपनी प्राइम मेंबरशिप के विशेष फायदों का इस्तेमाल कर सकती है। इस रणनीति के कारण क्विक कॉमर्स सेक्टर में एक नया और विनाशकारी ‘प्राइस वॉर’ शुरू होने की पूरी आशंका जताई जा रही है।
गौरतलब है कि बाजार में जब दो बड़े खिलाड़ी एक-दूसरे से कम कीमत पर सामान बेचने की होड़ में उतरेंगे, तो इसका सीधा असर कंपनियों के मुनाफे पर पड़ेगा। इटरनल और स्विगी जैसी कंपनियां जो अब तक सिर्फ ऑर्डर बढ़ाने के बजाय सस्टेनेबल बिजनेस मॉडल और प्रॉफिटेबिलिटी की तरफ कदम बढ़ा रही थीं, उन्हें अब अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर होना पड़ सकता है।
क्विक कॉमर्स का यह पूरा बिजनेस मॉडल बेहद खर्चीला और जटिल माना जाता है। 10 से 15 मिनट के भीतर सामान की सफल डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए कंपनियों को हर दो से तीन किलोमीटर के दायरे में छोटे फुलफिलमेंट सेंटर यानी ‘डार्क स्टोर्स’ का एक बड़ा नेटवर्क तैयार करना पड़ता है। इन डार्क स्टोर्स में लगातार इन्वेंटरी का प्रबंधन करना, डिलीवरी राइडर्स का बड़ा नेटवर्क बनाए रखना और उन्नत तकनीक पर भारी-भरकम खर्च करना शामिल है।
ऐसी स्थिति में, यदि अमेजन लंबे समय तक कम मार्जिन या नुकसान उठाकर भी सामान बेचती है, तो पहले से मौजूद कंपनियों के लिए अपने मार्जिन को बचाए रखना और मुनाफा कमाना एक बेहद गंभीर और चुनौतीपूर्ण कार्य हो जाएगा। इस त्रिकोणीय मुकाबले में देश के दूसरे बड़े ई-कॉमर्स खिलाड़ी Flipkart ने भी अपनी ‘फ्लिपकार्ट मिनट’ (Flipkart Minutes) सर्विस के साथ एंट्री कर ली है।
हालांकि, बाजार के जानकारों का कहना है कि अमेजन के पास मजबूत सप्लाई चेन, करोड़ों एक्टिव कस्टमर्स और विशाल लॉजिस्टिक नेटवर्क होने के बावजूद, उसके लिए सबसे बड़ी चुनौती ब्लिंकिट और जेप्टो की तरह हर इलाके में डार्क स्टोर्स का मजबूत नेटवर्क खड़ा करने की होगी। क्विक कॉमर्स में सफलता का सीधा संबंध डिलीवरी की स्पीड से है, और यह स्पीड तभी संभव है जब डार्क स्टोर ग्राहक के घर से महज 2-3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हो।
इस बढ़ते कॉर्पोरेट मुकाबले के बीच अगर किसी को सीधा और तात्कालिक फायदा मिलता दिख रहा है, तो वह देश का आम उपभोक्ता है। प्रतिस्पर्धा बढ़ने से ग्राहकों को आने वाले दिनों में सस्ते दाम, बेहतर ऑफर्स, अधिक कैशबैक और तेज डिलीवरी की बेहतर सर्विस मिलने की पूरी उम्मीद है। दूसरी तरफ, पारंपरिक रूप से व्यापार करने वाले स्थानीय किराना दुकानदारों और मोहल्ले की दुकानों के सामने भी प्रतिस्पर्धा का संकट गहरा गया है।
हालांकि, राहत की बात यह है कि भारतीय ग्रोसरी बाजार का एक बहुत बड़ा हिस्सा, जो कि करीब 90 प्रतिशत से अधिक है, आज भी इन पारंपरिक किराना दुकानों के पास ही सुरक्षित है। क्विक कॉमर्स की हिस्सेदारी वर्तमान में कुल बाजार में महज 4 से 5 प्रतिशत के आसपास है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से आपातकालीन खरीदारी के लिए किया जाता है। आने वाले दो से तीन साल यह तय करेंगे कि इस अरबों डॉलर के बाजार में कौन सी कंपनी अपने टिकाऊ कारोबार मॉडल के साथ टिक पाती है।
















