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Rupee vs Dollar: रिकॉर्ड गिरावट के साथ ₹95.58 के स्तर पर पहुँचा रुपया, 14 वर्षों में सबसे बड़ी सालाना कमजोरी

Indian Rupee Fall Today: इजराइल-ईरान युद्ध और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारतीय रुपया 88 पैसे टूटकर ₹95.58 प्रति डॉलर पर पहुँच गया है। चालू वित्त वर्ष में 10% से ज्यादा की यह गिरावट पिछले 14 वर्षों में सबसे बड़ी है।
Rupee vs Dollar USD to INR Exchange Rate Today: रुपया 94.70 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर, डॉलर की मजबूती और FII की भारी बिकवाली ने बढ़ाई टेंशन

Rupee vs Dollar: भारतीय मुद्रा बाजार के लिए सोमवार का दिन भारी उथल-पुथल भरा रहा। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 88 पैसे की बड़ी गिरावट के साथ 95.58 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर बंद हुआ।

वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल ने घरेलू मुद्रा पर दबाव को और गहरा कर दिया है। यह लगातार तीसरा कारोबारी सत्र है जब रुपए के मूल्य में गिरावट दर्ज की गई है।

14 वर्षों की सबसे बड़ी गिरावट का रिकॉर्ड
आंकड़ों के अनुसार, भारतीय रुपए के लिए मौजूदा वित्त वर्ष (2025-26) पिछले 14 वर्षों में सबसे चुनौतीपूर्ण रहा है। इस दौरान रुपया 10% से अधिक टूट चुका है। केवल पिछले एक महीने के भीतर ही मुद्रा की कीमत में 4% की कमी आई है।

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विदेशी ब्रोकरेज फर्म ‘बर्नस्टीन’ की हालिया रिपोर्ट बाजार की चिंता को और बढ़ा रही है, जिसमें चेतावनी दी गई है कि यदि मध्य पूर्व में इजराइल-ईरान युद्ध लंबा खिंचता है, तो रुपया 98 प्रति डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर तक भी गिर सकता है।

वैश्विक अस्थिरता और कच्चे तेल का दबाव
रुपए की इस कमजोरी का मुख्य कारण पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का $100 प्रति बैरल के पार पहुंचना है। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिससे डॉलर की मांग में भारी वृद्धि हुई है। इसके साथ ही, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FIIs) द्वारा भारतीय बाजार से लगातार की जा रही बिकवाली ने स्थिति को और नाजुक बना दिया है।

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आम आदमी की जेब पर पड़ेगा सीधा असर
डॉलर की मजबूती और रुपए के अवमूल्यन का सीधा प्रभाव घरेलू महंगाई और आम उपभोक्ता की क्रय शक्ति पर पड़ेगा। प्रमुख प्रभावित क्षेत्रों का विवरण इस प्रकार है:

ईंधन और परिवहन: कच्चा तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना है, जिससे माल ढुलाई और रसद (logistics) की लागत बढ़ेगी।

इलेक्ट्रॉनिक्स और गैजेट्स: स्मार्टफोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के कलपुर्जे आयात किए जाते हैं। डॉलर में अधिक भुगतान करने के कारण इन उत्पादों की कीमतें बढ़ सकती हैं।

सोना और चांदी: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं का व्यापार डॉलर में होता है, अतः रुपया कमजोर होने से भारत में सोने और चांदी के भाव में तेजी आएगी।

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शिक्षा और पर्यटन: विदेश में शिक्षा प्राप्त कर रहे भारतीय छात्रों और विदेशी यात्रा की योजना बना रहे लोगों का बजट 10% तक बढ़ सकता है।

आरबीआई की निगरानी और बाजार हस्तक्षेप
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सक्रिय है। केंद्रीय बैंक ने बाजार में डॉलर की तरलता सुनिश्चित करने और जमाखोरी रोकने के उद्देश्य से बैंकों के लिए ‘फॉरेक्स पोजीशन लिमिट’ को सख्त कर दिया है। हालांकि, वैश्विक अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की निकासी के चलते इन उपायों का प्रभाव फिलहाल सीमित नजर आ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम नहीं होता, तब तक मुद्रा बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।

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