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iitian baba abhay singh marriage: कॉरपोरेट की चकाचौंध और संन्यास के बाद अब गृहस्थी की राह, जब ‘आईआईटीयन बाबा’ ने थामा सॉफ्टवेयर इंजीनियर का हाथ

IITian Baba Abhay Singh marriage news: IIT बॉम्बे से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग छोड़ आध्यात्मिक पथ चुनने वाले अभय सिंह अपनी पत्नी प्रतीका के साथ झज्जर पहुंचे। दंपत्ति ने धर्मशाला की सादगीपूर्ण जीवनशैली और भविष्य में गुरुओं व साधकों के लिए 'सनातन यूनिवर्सिटी' स्थापित करने के अपने बड़े संकल्प को साझा किया।
iitian baba abhay singh marriage: कॉरपोरेट की चकाचौंध और संन्यास के बाद अब गृहस्थी की राह, जब 'आईआईटीयन बाबा' ने थामा सॉफ्टवेयर इंजीनियर का हाथ
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iitian baba abhay singh marriage: आईआईटी बॉम्बे की डिग्री, कनाडा में लाखों का पैकेज और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग का शानदार भविष्य – यह सब कुछ छोड़कर अध्यात्म की राह चुनने वाले अभय सिंह ने एक बार फिर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। दरअसल, प्रयागराज महाकुंभ 2025 में अपनी वैराग्य यात्रा से करोड़ों लोगों का ध्यान खींचने वाले ‘आईआईटीयन बाबा’ अब वैवाहिक बंधन में बंध गए हैं।

जानकारी के मुताबिक हरियाणा के झज्जर के रहने वाले अभय सिंह ने हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत वादियों में कर्नाटक की रहने वाली सॉफ्टवेयर इंजीनियर प्रतीका के साथ सात फेरे लेकर अपने जीवन का एक नया अध्याय शुरू किया है। धर्मशाला के पास स्थित ऐतिहासिक अघंजर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर यह विवाह संपन्न हुआ, जिसने अब सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक नई चर्चा छेड़ दी है।

यह पूरी कहानी किसी फिल्मी पटकथा जैसी लगती है, जहां एक मेधावी युवा भौतिक सुख-सुविधाओं के शिखर पर पहुंचकर अचानक सब कुछ त्याग देता है। अभय सिंह ने जब अपनी हाई-प्रोफाइल नौकरी और एयरोस्पेस करियर को तिलांजलि देकर सनातन धर्म का मार्ग चुना था, तब देश भर में उनके इस साहसिक फैसले की सराहना हुई थी। वे सादगी और ज्ञान के प्रतीक बनकर उभरे थे।

लेकिन समय का चक्र ऐसा घूमा कि जिस शांति की तलाश में वे पहाड़ों और कुंभ के मेलों में भटक रहे थे, वह उन्हें प्रतीका के साथ जीवन साझा करने के निर्णय तक ले आई। 15 फरवरी को खनियारा गांव के अघंजर महादेव मंदिर में बेहद सादगीपूर्ण तरीके से पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ यह शादी की गई। इस मिलन को कानूनी जामा पहनाने के लिए दंपती ने 19 फरवरी को विवाह का रजिस्ट्रेशन भी करा लिया है।

धर्मशाला की पहाड़ियों के बीच बसे इस मंदिर के महंत करण गिरी ने इस विवाह की पुष्टि की है। उनके अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन यह जोड़ा मंदिर परिसर में आया था और उन्होंने बिना किसी तामझाम या शोर-शराबे के बहुत ही साधारण ढंग से शादी की रस्में पूरी कीं। हालांकि, इस हाई-प्रोफाइल शादी को लेकर स्थानीय प्रशासन की ओर से अब भी थोड़ी अनभिज्ञता जताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक धर्मशाला के तहसीलदार गिरी राज ठाकुर का कहना है कि उनके पास इस विवाह की कोई आधिकारिक सूचना अब तक नहीं पहुंची है, फिर भी मंदिर और कानूनी पंजीकरण के दावों ने इस खबर को पक्का कर दिया है।

हरियाणा के झज्जर में आज 6 अप्रैल को अभय सिंह अपनी पत्नी प्रतीका के साथ पारिवारिक मिलन के लिए पहुँचे। इस दौरान उन्होंने अपने वैवाहिक जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि वे वर्तमान में धर्मशाला (हिमाचल प्रदेश) में सादगीपूर्ण जीवन व्यतीत कर रहे हैं। कर्नाटक की रहने वाली और पेशे से इंजीनियर प्रतीका से उनकी मुलाकात करीब एक साल पहले हुई थी, जो समय के साथ विवाह में बदल गई।

अभय ने अपने भविष्य के लक्ष्यों पर चर्चा करते हुए कहा कि अब वे दोनों मिलकर आध्यात्मिक पथ पर अग्रसर होंगे। झज्जर प्रवास के दौरान उन्होंने अपने पिता के चैंबर का भी दौरा किया, जहाँ कभी वे कानून का कार्य देखते थे। उन्होंने बताया कि जीवन के वास्तविक अर्थ की खोज उन्हें अध्यात्म की ओर ले आई। वहीं प्रतीका ने अभय की सादगी और ईमानदारी की सराहना की। इस दंपत्ति ने भविष्य में एक ‘सनातन यूनिवर्सिटी’ स्थापित करने का संकल्प भी जताया है, जो अध्यात्म प्रेमियों के लिए एक साझा केंद्र होगा।

इस विवाह ने एक बार फिर इस बहस को जन्म दे दिया है कि क्या संन्यास का मार्ग अपनाने के बाद गृहस्थी में लौटना सही है या नहीं, लेकिन अभय सिंह के करीबियों का मानना है कि यह उनकी अपनी निजी पसंद और धर्म के प्रति उनका अपना नजरिया है। जिस तरह उन्होंने बिना किसी डर के अपना करियर छोड़ा था, उसी निडरता के साथ उन्होंने अब विवाह का फैसला लिया है।

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