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PF Withdrawal Rules: क्या नौकरी के दौरान निकाला जा सकता है PF का पूरा पैसा? जानिए EPFO के जरूरी नए नियम

EPFO PF Withdrawal Rules: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के कड़े नियमों के तहत एक्टिव नौकरी के दौरान पीएफ का पूरा फंड निकालने पर प्रतिबंध है, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में ही 100% निकासी की अनुमति मिलती है।
Published on: 27 June 2026
PF Withdrawal Rules: क्या नौकरी के दौरान निकाला जा सकता है PF का पूरा पैसा? जानिए EPFO के जरूरी नए नियम

PF Withdrawal Rules: कर्मचारी भविष्य निधि को मुख्य रूप से रिटायरमेंट यानी बुढ़ापे की सुरक्षा के लिए एक अनिवार्य बचत के रूप में तैयार किया गया है। लेकिन अक्सर कर्मचारियों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या वे जब चाहें अपने पीएफ खाते से 100% पैसा निकाल सकते हैं? खासकर ऐसे समय में जब EPFO 3.0 और डिजिटल सेवाओं के अपग्रेडेशन की चर्चाएं जोरों पर हैं, पीएफ विड्रॉल के नियमों को सही तरीके से समझना बेहद जरूरी हो गया है।

अगर आप भी अपने पीएफ का पूरा पैसा निकालने की सोच रहे हैं, तो इसका सीधा जवाब है- नहीं। आप नौकरी के दौरान जब चाहें तब पूरा पैसा नहीं निकाल सकते हैं। ईपीएफओ के नियमों के मुताबिक, एक्टिव नौकरी के दौरान पूरा फंड निकालने पर पूरी तरह रोक है। हालांकि, कुछ बेहद खास और अनिवार्य परिस्थितियों में ही सदस्यों को इसकी इजाजत दी जाती है।

ईपीएफओ के मौजूदा नियमों के अनुसार, केवल दो मुख्य परिस्थितियों में ही आप अपने खाते से पूरा 100% फंड निकाल सकते हैं। पहली स्थिति रिटायरमेंट की है। जब कर्मचारी की उम्र 58 वर्ष हो जाती है, तब वह फाइनल सेटलमेंट के लिए आवेदन करने का पात्र बनता है और अपने खाते में जमा पूरा पैसा निकाल सकता है। इसके अलावा दूसरी स्थिति नौकरी छूटने या बेरोजगारी की है।

अगर आपकी नौकरी चली जाती है, तो आप बेरोजगारी के दौरान वित्तीय मदद के लिए पैसा निकाल सकते हैं। इसके लिए भी समय की सीमाएं तय की गई हैं। एक महीना बेरोजगार रहने की स्थिति में आप अपने कुल पीएफ बैलेंस का केवल 75% तक हिस्सा ही निकाल सकते हैं। वहीं, यदि आप दो महीने या उससे अधिक समय तक बेरोजगार रहते हैं, तो आप बचे हुए 25% हिस्से के लिए भी क्लेम कर सकते हैं और इस तरह पूरा 100% फंड निकाल सकते हैं।

कई कर्मचारियों को यह गलतफहमी होती है कि जब वे कंपनी बदलते हैं, तो उन्हें पुराना पीएफ का पैसा निकाल लेना चाहिए। लेकिन EPFO हमेशा यही सलाह देता है कि नौकरी बदलने पर पैसा निकालने के बजाय अपने यूनिवर्सल अकाउंट नंबर का इस्तेमाल करके पीएफ को नई कंपनी में ट्रांसफर कर लें। ऐसा करने से फंड ट्रांसफर होने पर आपके पैसे पर सालाना ब्याज मिलना लगातार जारी रहता है और आपका सर्विस रिकॉर्ड भी बिना टूटे चलता रहता है। इसके विपरीत, बार-बार पैसा निकालने से रिटायरमेंट फंड कम होता है और कुछ मामलों में टैक्स भी देना पड़ सकता है।

भले ही नौकरी के दौरान पूरा पैसा निकालने पर पाबंदी हो, लेकिन ईपीएफओ अपने सदस्यों को कुछ खास और जरूरी आवश्यकताओं के लिए एडवांस के रूप में आंशिक निकासी की अनुमति देता है। आप उच्च शिक्षा और बच्चों या खुद की शादी के लिए, घर खरीदने, जमीन खरीदने या मकान बनवाने के लिए, होम लोन का पुनर्भुगतान करने के लिए और खुद के या परिवार के गंभीर इलाज के लिए नौकरी के दौरान भी आंशिक पैसा निकाल सकते हैं। इन सभी श्रेणियों के लिए सर्विस की अवधि और विड्रॉल की लिमिट के नियम अलग-अलग तय हैं।

पीएफ का पैसा निकालने से आपको तुरंत कैश जरूर मिल जाता है, लेकिन ऐसा करने से आपके बुढ़ापे की वित्तीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचता है। ईपीएफ एक बेहतरीन निवेश माध्यम है जहां आपको अनिवार्य बचत, नियोक्ता का योगदान और टैक्स-फ्री सालाना ब्याज का लाभ मिलता है। इसलिए, जब तक कोई बेहद गंभीर इमरजेंसी न हो, अपने पीएफ कॉर्पस को हाथ न लगाएं और नौकरी बदलने पर इसे हमेशा ट्रांसफर ही करें।

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