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Retirement Planning: रिटायरमेंट फंड की कर रहे हैं तैयारी? निवेश शुरू करने से पहले इन बातों का रखें खास ख्याल

रिटायरमेंट के बाद के खर्चों का सही अनुमान न होना बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकता है। उम्र बढ़ने के साथ कुछ पुराने खर्च खत्म होते हैं, तो मेडिकल जैसे नए खर्च जुड़ जाते हैं। महंगाई और लंबी उम्र को ध्यान में रखकर सही समय पर निवेश शुरू करना जरूरी है।
Retirement Planning: रिटायरमेंट की तैयारी में कहां चूक जाते हैं लोग, बाद में होता है पछतावा

Retirement Planning: रिटायरमेंट के बाद के जीवन को आर्थिक रूप से सुरक्षित बनाने के लिए योजना बनाना बेहद महत्वपूर्ण है। अक्सर लोग रिटायरमेंट के बाद होने वाले वास्तविक खर्चों का सही अंदाजा नहीं लगा पाते। आज आप हर महीने जितना पैसा खर्च करते हैं, जरूरी नहीं कि रिटायरमेंट के बाद भी आपको उतने ही पैसों की जरूरत पड़े। उस समय आपके बजट में बड़े बदलाव आते हैं, जहां कुछ पुराने खर्च आपके बजट से पूरी तरह बाहर हो जाते हैं, वहीं कुछ बिल्कुल नए खर्च आपके मासिक बजट में शामिल हो जाते हैं।

उदाहरण के तौर पर देखा जाए तो रिटायरमेंट की उम्र तक आते-आते आमतौर पर लोगों के घर की ईएमआई खत्म हो जाती है, जिससे एक बड़ा वित्तीय बोझ कम हो जाता है। इसके विपरीत, बढ़ती उम्र के साथ मेडिकल केयर यानी स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं पर होने वाला खर्च काफी हद तक बढ़ जाता है। इसलिए, यदि आपने अब तक अपने रिटायरमेंट फंड के लिए पैसे जुटाने की शुरुआत नहीं की है, तो इसमें अब बिल्कुल भी देरी नहीं करनी चाहिए। निवेश शुरू करने से पहले यह समझना जरूरी है कि आपका कुल रिटायरमेंट फंड कितना बड़ा होना चाहिए।

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रिटायरमेंट फंड का सटीक आकलन करना सुनने में जितना आसान लगता है, असल में यह उतना ही मुश्किल सवाल है। इसकी मुख्य वजह यह है कि आज की तारीख में आपको अपने लिए जो फंड पर्याप्त लग रहा है, उसकी वैल्यू आने वाले 10 से 15 साल बाद काफी कम रह जाएगी। बाजार में बढ़ती महंगाई के असर से पैसे की वैल्यू लगातार घटती रहती है। इसे एक सीधे उदाहरण की मदद से आसानी से समझा जा सकता है।

मान लीजिए कि आज की तारीख में आपके परिवार का मासिक खर्च 45,000 रुपये है। यदि महंगाई की यही रफ्तार बनी रही, तो ठीक 20 साल बाद आपको अपनी इसी समान लाइफस्टाइल को बनाए रखने के लिए हर महीने 1 लाख रुपये से भी ज्यादा खर्च करने की आवश्यकता पड़ेगी। इसका मुख्य कारण यह है कि हर साल इनफ्लेशन की वजह से आपके पैसे की परचेजिंग पावर यानी वैल्यू लगभग 6 फीसदी तक घटती चली जाती है।

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इसके अलावा, निवेश की योजना बनाते समय लोगों के सामने दूसरी बड़ी चुनौती यह होती है कि उन्हें यह अंदाजा नहीं होता कि रिटायरमेंट के बाद उन्हें कितने सालों तक खर्चों के लिए पैसों की जरूरत पड़ने वाली है। कोई भी व्यक्ति जितने लंबे समय तक जीवित रहेगा, उसे अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए उतने ही लंबे समय तक फंड की आवश्यकता होगी। यदि कोई व्यक्ति 60 साल की उम्र में रिटायर होता है, तो उसे कम से कम अगले 25 सालों तक के खर्च को ध्यान में रखकर अपने फंड का इंतजाम करना चाहिए।

विशेषज्ञों के अनुसार, रिटायरमेंट के लिए एक बड़ा और सुरक्षित फंड तैयार करने के लिए बाजार में निवेश के कई बेहतरीन विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इन विकल्पों में पब्लिक प्रोविडेंट फंड,  नेशनल पेंशन सिस्टम  और म्यूचुअल फंड की विभिन्न स्कीम्स मुख्य रूप से शामिल हैं। इसके साथ ही, अगर आप एक वेतनभोगी कर्मचारी हैं और नौकरी करते हैं, तो आपकी रिटायरमेंट प्लानिंग में कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। आप जितनी जल्दी निवेश की शुरुआत करेंगे, उतना ही बड़ा फंड तैयार करने की गुंजाइश बढ़ेगी और लंबी अवधि में कंपाउंडिंग का फायदा मिलेगा।

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