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SC-ST और अश्लील फोटो विवाद में चिंतपूर्णी विधायक सुदर्शन बबलू बरी, बोले- ‘सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं’

Chintpurni MLA Sudarshan Babloo: हिमाचल प्रदेश के चिंतपूर्णी से विधायक सुदर्शन सिंह बबलू और सह-आरोपी राकेश सोनी को सेशन कोर्ट ने वर्ष 2022 के सोशल मीडिया विवाद और एससी-एसटी मामले में सभी आरोपों से बरी कर दिया है।
Published on: 11 August 2026
MLA Sudarshan Babloo News:: SC-ST और अश्लील फोटो विवाद में चिंतपूर्णी विधायक सुदर्शन बबलू बरी, बोले- 'सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं'

MLA Sudarshan Babloo News: हिमाचल प्रदेश की राजनीति में वर्ष 2022 से चर्चित रहे इंटरनेट मीडिया विवाद और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम से जुड़े मामले में बड़ा अदालती फैसला आया है। चिंतपूर्णी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक सुदर्शन सिंह बबलू और उनके सह-आरोपी राकेश सोनी को सेशन जज नरेश ठाकुर की अदालत ने निर्दोष करार देते हुए बाइज्जत बरी कर दिया है। अदालत के इस निर्णय से दोनों नेताओं को कानूनी प्रक्रिया से बड़ी राहत मिली है।

दरअसल, यह पूरा प्रकरण शिकायतकर्ता अमनप्रीत कौर की शिकायत के आधार पर संबंधित पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 90/22 से शुरू हुआ था। शिकायतकर्ता महिला ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि विधायक सुदर्शन बबलू और राकेश सोनी ने मिलकर उनकी तस्वीरों को अश्लील तरीके से एडिट किया और फिर उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल कर दिया। इस मामले के सामने आने के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में इसे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और आपसी रंजिश के रूप में देखा जा रहा था।

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपों को अदालत में साबित करने के लिए पूरा जोर लगाया। इस सिलसिले में अदालत के समक्ष कुल 19 गवाह पेश किए गए और कई तरह के साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। हालांकि, अदालत ने जब लंबी सुनवाई के बाद प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का गहनता से अवलोकन किया, तो अभियोजन पक्ष कानूनी कसौटी पर आरोपों को सिद्ध करने में पूरी तरह से नाकाम साबित हुआ।

न्यायालय ने अपने निष्कर्ष में पाया कि शिकायतकर्ता महिला द्वारा लगाए गए सभी संगीन आरोप बेबुनियाद और साक्ष्य-विहीन थे। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास कश्यप और अधिवक्ता रोहित जोशी ने प्रभावी ढंग से पैरवी की। दोनों पक्षों की दलीलों, गवाहों के बयानों और मामले से जुड़े तकनीकी तथ्यों की विस्तृत समीक्षा करने के बाद सेशन कोर्ट ने दोनों आरोपियों को बेकसूर मानते हुए बरी करने का निर्णय सुनाया।

फैसले के बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बचाव पक्ष के अधिवक्ता विकास कश्यप ने इसे लोकतंत्र और देश की न्याय व्यवस्था की एक बड़ी जीत करार दिया। वहीं, अदालती निर्णय से राहत महसूस कर रहे विधायक सुदर्शन सिंह बबलू ने कहा कि “सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं।”

विधायक बबलू ने अपने राजनीतिक विरोधियों पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि यह प्रकरण उन्हें राजनीतिक रूप से बदनाम करने और उनके जन-प्रतिनिधि के रूप में उभरते करियर को नुकसान पहुँचाने की एक सोची-समझी साजिश थी। उन्होंने कहा कि उन्हें देश की न्यायपालिका पर शुरुआत से अटूट विश्वास था और आज अदालत के फैसले ने यह साबित कर दिया है कि षड्यंत्र चाहे कितना भी बड़ा हो, अंततः जीत सत्य की ही होती है।

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