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Personal Loan or Credit Card EMI: पर्सनल लोन बनाम क्रेडिट कार्ड EMI – जानिए किस पर कम चुकाना पड़ता है?

Personal Loan or Credit Card EMI: पर्सनल लोन बनाम क्रेडिट कार्ड EMI - जानिए किस पर कम चुकाना पड़ता है?

Personal Loan or Credit Card EMI: आज के वक्त में, पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड ईएमआई दोनों ही फाइनेंस के ऐसे जरिए हैं जो जेब खाली होने पर काम आते हैं। लेकिन यह समझना ज़रूरी है कि दोनों में क्या फर्क है, ताकि आप अपनी ज़रूरत के हिसाब से सही और बेहतर विकल्प चुन सकें। अचानक बड़ी खरीदारी करनी हो, जैसे घरेलू सामान, मेडिकल इमरजेंसी या छुट्टियों का खर्च, तो पर्सनल लोन लेना या क्रेडिट कार्ड से EMI कन्वर्ट करना आम विकल्प हैं।

पर्सनल लोन पर ब्याज दर आमतौर पर क्रेडिट कार्ड ईएमआई से कम होती है और यह पूरे लोन की अवधि के लिए तय (फिक्स्ड) रहती है। इससे एक फायदा यह होता है कि आपकी महीने-दर-महीने किश्त (ईएमआई) और कुल ब्याज की रकम पहले से ही पता होती है, जिससे बजट बनाना आसान हो जाता है।

वहीं दूसरी ओर, क्रेडिट कार्ड ईएमआई की शुरुआती ब्याज दर आकर्षक लग सकती है, लेकिन इसमें प्रोसेसिंग फीस जैसे छुपे हुए खर्च, आपकी क्रेडिट लिमिट पर पड़ने वाला असर और अगर कोई किश्त चूक गए तो लगने वाला जुर्माना… ये सब मिलकर इसकी असली लागत को बढ़ा सकते हैं।

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बैंकों के ताजा रेट्स के मुताबिक, ज्यादातर मामलों में पर्सनल लोन सस्ता पड़ता है, खासकर बड़ी रकम और लंबे समय के लिए। लेकिन छोटी खरीदारी के लिए क्रेडिट कार्ड EMI ज्यादा सुविधाजनक हो सकता है। आइए, विस्तार से समझते हैं।

कितना पैसा और कितने समय के लिए?
अगर आपको एक बड़ी रकम की जरूरत है, जैसे घर का सामान खरीदने के लिए या शादी का खर्चा उठाने के लिए, तो पर्सनल लोन ज़्यादा मुफीद रहेगा। साथ ही, इसे चुकाने के लिए आपको लंबा समय (6 महीने से लेकर 8 साल तक) मिल जाता है, जिससे महीने का बोझ हल्का रहता है। जबकि क्रेडिट कार्ड ईएमआई उन छोटे-मझोले खर्चों के लिए बना है, जिन्हें आप कम समय में चुका सकते हैं, जैसे कोई नया गैजेट या छुट्टियों का टूर पैकेज।

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आपकी क्रेडिट लिमिट और स्कोर पर क्या पड़ेगा असर?
क्रेडिट कार्ड से ईएमआई चुनने का सीधा असर आपकी कार्ड लिमिट पर पड़ता है। अगर आप भुगतान में चूक करते हैं, तो इससे आपके क्रेडिट स्कोर को भी नुकसान पहुँच सकता है। पर्सनल लोन एक अलग कर्ज़ होता है, इसलिए यह आपकी क्रेडिट कार्ड लिमिट को ब्लॉक नहीं करता और इसका आपके क्रेडिट स्कोर पर असर भी अपेक्षाकृत कम होता है।

तो आखिर क्या चुनें?

  • पर्सनल लोन तब चुनें: जब ज़रूरत बड़ी हो, पैसा लंबे समय तक चाहिए और आप एक निश्चित ईएमआई के साथ प्लानिंग करना चाहते हैं। यह विकल्प आमतौर पर ज़्यादा किफायती और व्यवस्थित रहता है।
  • क्रेडिट कार्ड ईएमआई तब चुनें: जब खर्चा छोटा हो और आप उसे जल्दी चुका सकते हों। बस यह ज़रूर जाँच लें कि इसमें कोई छुपे हुए चार्जेस न हों।
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बता दें कि पर्सनल लोन बड़े और लंबे वक्त के लोन के लिए एक सस्ता और तयशुदा विकल्प है, जबकि क्रेडिट कार्ड ईएमआई छोटे और जल्दी निपटा देने वाले खर्चों के लिए सुविधाजनक है। फैसला लेते वक्त ब्याज दर, कुल लागत, समय सीमा और अपनी वित्तीय स्थिति पर गौर करें, ताकि ईएमआई का बोझ आप पर भारी न पड़े।

वहीं वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि क्रेडिट कार्ड EMI सुविधा देता है, लेकिन पर्सनल लोन लंबे समय में जेब हल्की होने से बचाता है। 2025 में बढ़ती महंगाई के बीच, उधार लेने से पहले बजट प्लान करें – अन्यथा छोटी EMI बड़ी फाइनेंशियल समस्या बन सकती है। अगर आपका क्रेडिट स्कोर मजबूत है, तो पर्सनल लोन से ही शुरू करें।

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स्वाति सिंह वर्तमान में प्रजासत्ता मीडिया संस्थान में बतौर पत्रकार अपनी सेवाएं दे रही है। इससे पहले भी कई मीडिया संस्थानों के साथ पत्रकारिता कर चुकी है।

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