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Union Budget 2026: पढ़े ये रिपोर्ट.! ,सरकार रख सकती है 9% विकास दर का लक्ष्य, पूंजीगत व्यय 12 लाख करोड़ के पार होगा

Published on: 14 January 2026
Union Budget 2026: पढ़े ये रिपोर्ट.! ,सरकार रख सकती है 9% विकास दर का लक्ष्य, पूंजीगत व्यय 12 लाख करोड़ के पार होगा

Union Budget 2026: मोदी सरकार केंद्रीय बजट 2026 में देश की आर्थिक रफ्तार को और तेज करने पर जोर दे सकती है। अनुमान है कि अगले वित्तीय वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि का लक्ष्य 8.5 से 9 फीसदी के बीच रखा जा सकता है। बैंक ऑफ बड़ौदा की अर्थशास्त्री सोनल बाधन के मुताबिक इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार पूंजीगत खर्च को बढ़ाकर 12 से 12.2 लाख करोड़ रुपये तक ले जा सकती है।

गुड रिटर्न में छप्पी एक खबर के मुताबिक सोनल बाधन का कहना है कि सरकार चालू वित्त वर्ष में पूंजीगत खर्च के लक्ष्य का बड़ा हिस्सा पहले ही पूरा कर चुकी है। नवंबर 2025 तक करीब 60 फीसदी कैपेक्स खर्च हो चुका है, जिससे साफ है कि बुनियादी ढांचे पर निवेश सरकार की प्राथमिकता बना हुआ है। इसी वजह से बजट 2026 में कैपेक्स सबसे अहम घटक रहेगा।

राजकोषीय मोर्चे पर सरकार के लक्ष्य संतुलित रहने की उम्मीद है। FY26 में राजकोषीय घाटा 4.4 फीसदी के लक्ष्य पर रखा जा सकता है, जबकि अगले साल इसे घटाकर 4 से 4.1 फीसदी तक लाने की संभावना जताई जा रही है। वहीं, अगले साल नाममात्र जीडीपी वृद्धि करीब 10 फीसदी रह सकती है।

हालांकि बजट 2026 में इनकम टैक्स या अप्रत्यक्ष करों में किसी बड़ी राहत की उम्मीद कम है। सोनल बाधन के अनुसार पिछले बजट और GST 2.0 के बाद कर प्रणाली में पहले ही बड़े सुधार हो चुके हैं, इसलिए सरकार इस मोर्चे पर सतर्क रह सकती है।

बदलते वैश्विक हालात के बीच सरकार एमएसएमई और निर्यात से जुड़े क्षेत्रों पर ज्यादा फोकस कर सकती है। इसके तहत निर्यातकों और छोटे उद्योगों के लिए ब्याज सबवेंशन योजना की घोषणा संभव है। साथ ही कस्टम ड्यूटी को और सरल बनाने और कुछ कच्चे माल पर शुल्क घटाने पर भी विचार हो सकता है, जिससे उद्योगों को राहत मिलेगी।

मौद्रिक नीति को लेकर सोनल बाधन का अनुमान है कि भारतीय रिजर्व बैंक FY26 की आखिरी नीति बैठक में विकास को सहारा देने के लिए 25 आधार अंकों की ब्याज दर कटौती कर सकता है। हालांकि जीडीपी और महंगाई के अनुमानों में बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। बाजार में तरलता बनाए रखने के लिए आरबीआई ओपन मार्केट ऑपरेशंस बढ़ा सकता है।

उन्होंने यह भी बताया कि सरकारी निवेश मजबूत बना हुआ है, लेकिन निजी निवेश फिलहाल कुछ चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित है। इसके बावजूद निजी निवेश में धीरे-धीरे सुधार के संकेत दिख रहे हैं। इसे और बढ़ाने के लिए सरकार PLI योजना में बदलाव कर सकती है और रिसर्च एवं डेवलपमेंट के लिए नई PLI योजना लाने पर भी विचार हो सकता है।

भविष्य के क्षेत्रों पर नजर डालें तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्पेस सेक्टर और रोबोटिक्स जैसे नए क्षेत्रों को सरकारी समर्थन मिलने की संभावना है। इससे विदेशी निवेश बढ़ सकता है। सोनल बाधन का कहना है कि वैश्विक चुनौतियां बनी रहेंगी, लेकिन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, कस्टम ड्यूटी में राहत और बेहतर निर्यात नीतियों से देश की विकास दर को संभाले रखा जा सकता है। साथ ही विनिवेश और परिसंपत्ति मुद्रीकरण से सरकारी राजस्व को लगातार सहारा मिलता रहेगा।

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