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भाजपा इलेक्शन कमेटी की मीटिंग दिल्ली में शुरू: कैंडिडेट्स को लेकर जबरदस्त उलझन, बगावत का भी खतरा

भाजपा इलेक्शन कमेटी की मीटिंग दिल्ली में शुरू: कैंडिडेट्स को लेकर जबरदस्त उलझन, बगावत का भी खतरा

प्रजासत्ता ब्यूरो|
हिमाचल विधानसभा चुनाव 2022 के लिए कल से चुनाव नामांकन शुरू हो रहे हैं। लेकिन सतारूढ़ भाजपा में चुनाव उम्मीदवार तय करने के लिए माथापच्ची चल रही है। पहाड़ी प्रदेश हिमाचल में पड़ोसी राज्यों उत्तराखंड और हरियाणा की तरह मिशन रिपीट का दम भर चुकी भाजपा हिमाचल में भी रिवाज बदलने को लेकर पिछले काफी समय से माहौल बनाए हुए हैं,लेकिन अभी तक एक भी प्रत्याशी फाइनल नहीं हुए हैं।

हालांकि मंगलवार को भाजपा की स्टेट इलेक्शन कमेटी की बैठक दिल्ली में शुरू हो गई है। इसमें राज्य के तकरीबन 15 से ज्यादा नेता शिरकत कर रहे हैं। हरियाणा भवन के गेस्ट हाउस में शुरू हुई इस बैठक में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर सहित भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और चुनाव प्रभारी सुदान सिंह, केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल,प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना,इलेक्शन सह प्रभारी देवेंद्र सिंह राणा, चुनाव प्रबंध समिति के अध्यक्ष डॉ राजीव बिंदल, महासचिव सतपाल सत्ती, त्रिलोक कपूर,राकेश जमवाल, त्रिलोक जमवाल, राज्य संगठन सचिव पवन राणा महिला मोर्चा की अध्यक्ष रश्मि धर सूद बैठक में भाग ले रही हैं।

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बता दें कि स्टेट इलेक्शन कमेटी की इस बैठक के बाद जिन उम्मीदवारों की सूची तैयार होगी, उस पर पार्लियामेंट्री बोर्ड अंतिम मुहर लगाएगा, क्योंकि यह बैठक आज देर तक चलेगी। इलेक्शन कमेटी की मीटिंग में जो नाम फाइनल होंगे, उन्हें भाजपा पार्लियामेंट्री बोर्ड के सामने रखा जाएगा। टिकट किसे दिया जाएगा, इस पर अंतिम फैसला पार्लियामेंट्री बोर्ड ही लेगा, गौर हो कि भाजपा में टिकट बंटवारे को लेकर इस बार तगड़ी कशमकश चल रही है। ऐसे में पार्टी कैंडिडेट्स की लिस्ट 2 चरण में आ सकती है और 23 अक्टूबर से पहले सभी प्रत्याशियों की घोषणा हो जाने की उम्मीद है।

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हालांकि भाजपा नेता हिमाचल में रिवाज बदलने को लेकर पिछले काफी समय से माहौल बनाए हुए हैं, लेकिन प्रत्याशियों के चयन में जिताऊ उम्मीदवारों की सिलेक्शन में कई पेंच चुभे हुए दिख रहे हैं। गुटबाजी का प्रभाव टिकटों के ऐलान में अंदरूनी तौर पर भारी पड़ रहा है। आलाकमान ने टिकट आवंटन को फाइनल टच देने से ठीक पहले मंडल स्तर पर वोटिंग कराकर नया माहौल बनाने का प्रयास किया है, लेकिन उस पर भी सवाल उठ रहे हैं।

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इलेक्शन कमेटी की इस बैठक के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सेंट्रल इलेक्शन कमेटी की बैठक में आखिर गुटबाजी की कोई दशा-दिशा दिखेगी या नहीं? या फिर हाईकमान अपने हिसाब से प्रत्याशियों के चयन पर मुहर लगाएगी? जिसके लिए सर्वे को तो आधार बनाएगी ही। माना जा रहा है कि मिशन रिपीट के लिए इस बार भाजपा के 10 से ज्यादा सीटिंग विधायकों और हारे हुए नेताओं के टिकट कटने की संभावना बनी हुई है। क्योंकि मिशन रिपीट इसके बगैर संभव नहीं है। ऐसा आलाकमान पहले ही समझ चुकी है। यह प्रयोग उत्तराखंड में पार्टी आलाकमान को ‘चमत्कार’ दिखा चुका है।

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