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Churdhar Temple Mahashivratri 2026: इस वजह से महाशिवरात्रि पर चूड़धार मंदिर में शिव के दर्शन नहीं कर पाएंगे भक्त! प्रशासन ने जारी की सख्त रोक..!

Churdhar Temple Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर प्रसिद्ध चूड़धार मंदिर में भक्त दर्शन नहीं कर पाएंगे। प्रशासन ने आदेश जारी कर 14 और 15 फरवरी 2026 को चूड़धार मंदिर यात्रा पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
Churdhar Temple Mahashivratri 2026: इस वजह से महाशिवरात्रि पर चूड़धार मंदिर के शिव के दर्शन नहीं कर पाएंगे भक्त! प्रशासन ने जारी की सख्त रोक..!

Churdhar Temple Mahashivratri 2026: भोले बाबा के भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर है, क्योंकि इस साल महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भी हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध चूड़धार मंदिर में भक्त दर्शन नहीं कर पाएंगे। दरअसल, हिमाचल प्रदेश के चूड़धार मंदिर में शिवरात्रि पर भक्तों के दर्शन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।

जानकारी के मुताबिक उप-मंडलाधिकारी चौपाल के आदेश के अनुसार 8-10 फुट बर्फ और फिसलन भरे रास्ते के कारण यात्रा जोखिम भरी है। भारी बर्फबारी और बारिश की आशंका के चलते अप्रैल 2026 तक चूड़धार यात्रा पर रोक जारी रहेगी। शिवरात्रि (14-15 फरवरी 2026) पर पुलिस तैनात रहेगी ताकि कोई भक्त मंदिर न जा सके।

बता दें कि चूड़धार मंदिर प्रबंधन कमेटी और प्रशासन ने जारी आदेश (संख्या CPL-Temple/101/2023-4604-10 दिनांक 28.11.2025) में कहा है कि पहले से जारी प्रतिबंध को अप्रैल 2026 तक बढ़ाया जा रहा है। मंदिर मार्ग पर अभी 8 से 10 फुट तक बर्फ जमी हुई है। रास्ता बेहद फिसलन भरा है और शिवरात्रि के दौरान भारी बारिश व बर्फबारी की संभावना बनी हुई है। ऐसे में यात्रा अत्यंत जोखिम भरी हो गई है और दुर्घटना का खतरा बहुत ज्यादा है।

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प्रशासन ने स्थानीय लोगों और यात्रियों से अपील की है कि वे शिवरात्रि पर चूड़धार मंदिर जाने से पूरी तरह बचें। 14 और 15 फरवरी को चूड़धार मंदिर मार्ग पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी ताकि कोई भी भक्त इस जोखिम भरे रास्ते पर न जा सके।

बता दें कि यह प्रतिबंध पहले से चल रहे आदेशों का हिस्सा है, जिसे अब शिवरात्रि के मौके पर सख्ती से लागू किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि भक्तों की सुरक्षा सर्वोपरि है और बर्फ हटने तथा रास्ता सुरक्षित होने तक यात्रा पर रोक बरकरार रहेगी। भक्तों से अनुरोध है कि वे अन्य सुरक्षित शिव मंदिरों में पूजा-अर्चना करें।Churdhar Temple Mahashivratri 2026: इस वजह से महाशिवरात्रि पर चूड़धार मंदिर के शिव के दर्शन नहीं कर पाएंगे भक्त! प्रशासन ने जारी की सख्त रोक..!

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चूड़धार मंदिर का महत्व और यात्रा में छिपे जोखिम
उल्लेखनीय है कि चूड़धार मंदिर हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में स्थित है। यह राज्य की सबसे ऊंची चोटी चूड़धार (लगभग 11,965 फीट) पर बसा है। यहां भगवान शिव (चूड़ेश्वर महादेव ) और शिरगुल महाराज (शिरगुल देवता) के रूप में पूजे जाते हैं। शिरगुल महाराज सिरमौर, चौपाल, शिमला, सोलन और उत्तराखंड के देहरादून क्षेत्र के लोगों के प्रमुख देवता हैं। मंदिर में शिवलिंग स्थापित है और यह क्षेत्र के लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है।

मान्यताओं के अनुसार, शिरगुल महाराज भगवान शिव का अवतार हैं। उन्होंने यहां राक्षसों से लोगों की रक्षा की और गांवों में शांति स्थापित की। मंदिर प्राचीन है और स्थानीय लोककथाओं में इसका वर्णन मिलता है। नवरात्रि और अन्य पर्वों पर यहां मेले लगते हैं, जहां भक्त गीत-नृत्य करते हैं। यह जगह धार्मिक के साथ-साथ प्राकृतिक सौंदर्य और ट्रेकिंग के लिए भी प्रसिद्ध है।

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लेकिन चूड़धार यात्रा में बड़े जोखिम हैं। मंदिर 8 से 10 फुट तक बर्फ से ढका रहता है। रास्ता बहुत फिसलन भरा होता है। सर्दियों में भारी बर्फबारी और बारिश की वजह से रास्ते बंद हो जाते हैं और दुर्घटना का खतरा बहुत बढ़ जाता है। प्रशासन ने इसलिए अप्रैल 2026 तक यात्रा पर रोक लगाई है। शिवरात्रि जैसे पर्वों पर भी भक्तों को मना किया जाता है क्योंकि ठंड, फिसलन और खराब मौसम से जान का खतरा रहता है।

भक्तों की सुरक्षा के लिए प्रशासन सख्त है। यात्रा करने से पहले मौसम और रास्ते की स्थिति जांचना जरूरी है। चूड़धार धार्मिक महत्व रखता है, लेकिन सर्दियों में जोखिम इतना ज्यादा होता है कि जान जोखिम में डालना उचित नहीं। चूड़धार मंदिर यात्रा में पहले भी कई हादसे हो चुके हैं, जिनमें लोगों की जान गई है। यह यात्रा बहुत ऊंचाई वाली और खतरनाक है, खासकर सर्दियों में बर्फबारी और फिसलन के कारण..!

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