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Himachal News: जानिए सरकारी विभागों में खाली चल रहे पदों को निरस्त करने पर क्या बोले सीएम सुक्खू

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Published on: 26 October 2024
Himachal News: जानिए सरकारी विभागों में खाली चल रहे पदों को निरस्त करने पर क्या बोले सीएम सुक्खू

Himachal News: हिमाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में दो साल या उससे अधिक समय से रिक्त पदों को समाप्त करने के आदेश पर स्थिति स्पष्ट की है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया कि ऐसे कोई भी पद खत्म नहीं किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन पदों को वर्तमान आवश्यकताओं के अनुसार भरने के लिए विभागों से प्रस्ताव मांगे गए हैं।

शनिवार को ओकओवर में पत्रकारों से बातचीत में सीएम ने बताया कि वर्तमान में टाइपिंग क्लर्क की आवश्यकता नहीं है, और उन पदों को नई पोस्टों में परिवर्तित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर एक अधिसूचना का जिक्र किया जा रहा है, जिसमें पदों के समाप्त होने की बात कही गई है, लेकिन यह सही नहीं है।

सीएम सुक्खू ने बताया कि पिछले 20 सालों से कई पदों को भरा नहीं गया था, हालांकि उनके लिए बजट आवंटित किया गया था। इसीलिए, अब केवल उन्हीं पदों को खत्म किया गया है जो अब आवश्यक नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के कार्यकाल के दो साल पूरे होने से पहले 19,000 पदों को भरने का काम शुरू किया गया है, जिसमें से 3,000 पद अभी भरे जा रहे हैं।

सीएम ने यह भी बताया कि न्यायालय के मामलों को सुलझाया गया है और 19,103 पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू की गई है। शिक्षा विभाग में 5,061, स्वास्थ्य विभाग में 2,679, गृह विभाग में 1,924, वन विभाग में 2,266, जल शक्ति में 486 और लोक निर्माण विभाग में 363 पद भरे गए हैं। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वे भ्रामक प्रचार न करें, खासकर भाजपा की ओर से।

बता दें, वित्त विभाग की ओर से एक पत्र जारी किया गया था। पत्र में वर्ष 14 अगस्त, 2012 के दिशा-निर्देशों का हवाला दिया गया। इसमें कहा गया कि विभाग इनकी अनुपालना नहीं कर रहे हैं और न ही वित्त विभाग को इससे संबंधित ब्योरा भेज रहे हैं। प्रधान सचिव वित्त ने स्पष्ट किया है कि इसे प्रदेश सरकार ने गंभीरता से लिया है। इसलिए यह निर्णय लिया गया है कि दो साल या इससे अधिक समय से खाली चल रहे अस्थायी या नियमित पदों को खत्म माना जाए और यह भी सुनिश्चित किया जाए कि संबंधित विभाग एक हफ्ते में इन्हें बजट बुक से भी हटवा दें।

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