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Himachal Digital Arrest: एंटी टेररिस्ट अफसर बन ठगे ₹80 हजार, 20 घंटे तक रखा कैद, जानें कैसे बची बाकी पूंजी

Digital arrest fraud in Himachal: हिमाचल प्रदेश में एक शख्स को 20 घंटे तक 'डिजिटल अरेस्ट' रखकर साइबर ठगों ने ₹80,000 ठग लिए। खुद को एंटी टेररिस्ट अफसर बताने वाले इन ठगों के जाल से बाकि पैसे कैसे बचे, पढ़ें पूरी खबर।
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Himachal Digital Arrest: हमीरपुर जिले में साइबर ठगों ने एक बुजुर्ग दंपती के साथ बड़ा धोखा किया। 78 साल के एक सेवानिवृत्त अधिकारी और उनकी पत्नी को ठगों ने करीब 20 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट में रखा और 80 हजार रुपये ठग लिए। ठग खुद को एंटी टेररिस्ट सेल के बड़े अधिकारी बताकर आए और दंपती को डराया-धमकाया।

पुलिस के अनुसार, 19 फरवरी को ठगों ने दंपती को फोन किया। उन्होंने कहा कि आपके बैंक खाते और मोबाइल नंबर का इस्तेमाल आतंकी कामों में हो रहा है। दिल्ली में हुए बम ब्लास्ट से भी आपका नाम जोड़ा जा रहा है। बुजुर्गों ने जब संदेह जताया तो ठगों ने वीडियो कॉल पर फर्जी दस्तावेज दिखाए। वे खुद को एंटी टेररिस्ट अधिकारी बताकर बोले कि जांच के लिए सबूत चाहिए।

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इसके बाद ठगों ने दंपती को डराया कि अगर पैसे नहीं दिए तो पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर लेगी। डर के मारे बुजुर्गों ने ऑनलाइन 80 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। ठगों ने उन्हें सख्त हिदायत दी कि अगले दिन बैंक जाकर अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) तोड़कर बाकी पैसे भी ट्रांसफर करें और घर से बाहर न निकलें। वे लगातार वीडियो कॉल पर नजर रखते रहे।

अगले दिन यानी 20 फरवरी को दंपती आईसीआईसीआई बैंक की भोटा चौक शाखा पहुंचे। वहां उन्होंने छह लाख रुपये की एफडी तोड़ने की बात की। शाखा प्रबंधक मनीष मनु को मामला संदिग्ध लगा। उन्होंने बुजुर्ग को अपने केबिन में बुलाया और पूरी बात पूछी। बुजुर्ग ने ठगों की धमकियां, वीडियो कॉल और पैसे ट्रांसफर करने की पूरी जानकारी बता दी।

प्रबंधक ने तुरंत ठगों से फोन पर बात की। बातचीत में ठगों का झूठ पकड़ा गया और मामला साफ हो गया। बैंक ने फौरन परिवार को सूचना दी। परिवार ने साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। बैंक ने बुजुर्ग का नया खाता खोलकर उनकी बाकी जमा पूंजी को सुरक्षित कर लिया। इस तरह छह लाख रुपये की रकम बच गई।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक शाखा प्रबंधक मनीष मनु ने बताया कि ठग अब नए-नए तरीके अपना रहे हैं। लोगों को सतर्क रहना चाहिए। किसी भी संदिग्ध कॉल पर तुरंत बैंक या पुलिस से पुष्टि करें। डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई प्रक्रिया नहीं होती। फोन पर कभी भी बैंक खाते या व्यक्तिगत जानकारी न दें।

उधर, एसपी हमीरपुर बलवीर ठाकुर ने अपील की है कि संदिग्ध कॉल आने पर कोई जानकारी न दें। पुलिस कभी फोन पर डिजिटल अरेस्ट नहीं करती। ऐसी कॉल की सूचना तुरंत पुलिस को दें। सतर्कता से ही ठगों से बचा जा सकता है।

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