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HRTC Electric Bus: हिमाचल में जल्द दौड़ेंगी नई ई-बसें, लेकिन इन 2 रूटों पर ट्रायल फेल! जानें मुकेश अग्निहोत्री ने बैठक में क्या लिया बड़ा फैसला

HRTC Electric Bus Update: हिमाचल प्रदेश में 297 नई इलेक्ट्रिक बसों के संचालन को लेकर परिवहन निगम की 163वीं बैठक में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कड़ा रुख अपनाया। कंपनी द्वारा दो रूटों पर ट्रायल से छूट की मांग को खारिज कर दिया गया है।
Published on: 16 July 2026
HRTC Electric Bus: हिमाचल में जल्द दौड़ेंगी नई ई-बसें, लेकिन इन 2 रूटों पर ट्रायल फेल! जानें मुकेश अग्निहोत्री ने बैठक में क्या लिया बड़ा फैसला

HRTC Electric Bus: हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़, आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में शीघ्र ही नई इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन बसों के संचालन से संबंधित सभी प्रशासनिक और तकनीकी औपचारिकताओं को तेजी से पूरा किया जा रहा है, ताकि इन्हें जल्द से जल्द प्रदेशवासियों की सेवा में समर्पित किया जा सके।

इसके साथ ही, राज्य में हरित परिवहन को बढ़ावा देने के लिए चार नए ई-डिपो भी जल्द ही क्रियाशील कर दिए जाएंगे। यह महत्वपूर्ण निर्णय हिमाचल प्रदेश राज्य पथ परिवहन निगम (HRTC) के निदेशक मंडल की 163वीं बैठक में लिए गए, जिसकी अध्यक्षता स्वयं उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री कर रहे थे। इस उच्च स्तरीय बैठक में निगम के संचालन, यात्री सुविधाओं में सुधार और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने से जुड़े विभिन्न गंभीर विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक के दौरान प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से शामिल की जा रही 297 इलेक्ट्रिक बसों के ट्रायल तथा उनके सफल संचालन की तैयारियों की व्यापक समीक्षा की गई। इस खरीद प्रक्रिया के तहत एचआरटीसी कुल 297 ई-बसें खरीद रहा है, जिनमें से 150 बसें पहले ही हिमाचल प्रदेश पहुंच चुकी हैं। आपूर्ति करने वाली कंपनी ने टेंडर शर्तों में दावा किया था कि ये बसें एक बार पूरी तरह चार्ज होने पर 180 किमी की दूरी तय करेंगी।

हालांकि, शिमला जिला के दो विशिष्ट रूटों पर ट्रायल के दौरान इन बसों की माइलेज उम्मीद से कम पाई गई। इस पर संबंधित निर्माण कंपनी ने तर्क दिया था कि उक्त सड़कों की स्थिति बेहद खराब है, जिसके कारण वहां बस चलाना मुश्किल है। इस तकनीकी विवाद को सुलझाने के लिए निगम ने पहले लोक निर्माण विभाग (PWD) से इन विवादित सड़कों की विस्तृत जांच करवाई, जिसकी पूरी रिपोर्ट इस बैठक में प्रस्तुत की गई।

इसके बाद, कंपनी द्वारा इन दो विशिष्ट रूटों पर ट्रायल से छूट दिए जाने की मांग को प्रबंधन और निदेशक मंडल ने पूरी तरह से ठुकरा दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब इन बसों का ट्रायल अन्य वैकल्पिक रूटों पर अनिवार्य रूप से किया जाएगा। बसें भले ही संबंधित डिपुओं को भेज दी गई हैं, लेकिन इनका व्यावसायिक संचालन तभी शुरू होगा जब उनका ट्रायल पूरी तरह सफल साबित होगा।

बैठक में यह भी तय किया गया कि इन 297 इलेक्ट्रिक बसों को राज्य के अलग-अलग डिपो में आवंटित कर दिया गया है। आवंटन के विवरण के अनुसार, 35-35 बसें ऊना और हमीरपुर डिपो को भेजी गई हैं। इसके अलावा, बिलासपुर डिपो को 20 बसें, जबकि नालागढ़ और नाहन डिपो को 15-15 बसें आवंटित की गई हैं। देहरा और पालमपुर डिपो को 10-10 बसें मिली हैं, जबकि धर्मशाला और शिमला के तारादेवी डिपो को 5-5 बसें भेजी गई हैं। इनके अतिरिक्त, राज्य के कुछ अन्य छोटे डिपुओं को भी आवश्यकतानुसार 1 से 2 बसें आवंटित की गई हैं।

बैठक के दौरान उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने निगम की बसों में टायरों की भारी कमी पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि भविष्य में किसी भी परिस्थिति में किसी भी बस का संचालन टायर, स्पेयर पार्ट्स अथवा अन्य आवश्यक तकनीकी सामग्री के अभाव में प्रभावित नहीं होना चाहिए। उन्होंने प्रबंधन को आदेश दिया कि इन आवश्यक सामग्रियों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ वैकल्पिक प्रबंध भी पहले से तैयार रखे जाएं, ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

इस समस्या के स्थाई समाधान के लिए निदेशक मंडल (BOD) ने एचआरटीसी बसों के लिए नए टायर और लुब्रिकेंट की सप्लाई का ऑर्डर जारी करने को मंजूरी दे दी है। इसके पीछे एक लंबा प्रशासनिक घटनाक्रम रहा है, क्योंकि निगम ने इस आपूर्ति के लिए तीन बार टेंडर आमंत्रित किए थे। परंतु, हर बार केवल एक ही कंपनी निविदा प्रक्रिया में शामिल हो रही थी। लगातार दो बार सिंगल टेंडर आने के चलते नियमों के तहत इसे रद्द कर दिया गया था। जब तीसरी बार भी वही सिंगल टेंडर प्राप्त हुआ, तो इस गंभीर मामले को अंतिम निर्णय के लिए बीओडी के समक्ष रखा गया, जहां इसे आवश्यक सेवाओं को सुचारू रखने के लिए मंजूरी दे दी गई।

इसके अतिरिक्त, बैठक में परिवहन बेड़े में पहले से शामिल पुरानी इलेक्ट्रिक बसों के रख-रखाव पर भी अहम फैसला हुआ। निगम ने इन पुरानी ई-बसों के लिए 50 नई बैटरियों की खरीद को हरी झंडी दे दी है। इन बसों को बनाने वाली मूल कंपनियों के साथ एक विशेष करार किया जाएगा, जिसके तहत उन्हें वार्षिक रखरखाव अनुबंध (AMC) सौंपा जाएगा। इस अनुबंध के लागू होने के बाद, इन बसों की मरम्मत और तकनीकी देखरेख का पूरा काम संबंधित कंपनी द्वारा ही संभाला जाएगा।

इस उच्च स्तरीय और निर्णायक बैठक में हिमाचल प्रदेश राज्य पथ परिवहन निगम के उपाध्यक्ष अजय वर्मा, निदेशक मंडल के सम्मानित सदस्य धर्मेंद्र धामी, प्रदीप सूर्या, मोहिंदर संधू और निशांत ठाकुर उपस्थित रहे। उनके साथ ही अतिरिक्त सचिव (परिवहन) ओंकार चंद शर्मा, निगम के प्रबंध निदेशक डॉ. निपुण जिंदल सहित परिवहन विभाग के कई अन्य वरिष्ठ और मुख्य अधिकारी भी इस समीक्षा व नीतिगत बैठक में शामिल थे।

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