Himachal News: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए राज्यस्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह के आयोजन के लिए बड़सर स्थित स्कूल के खेल मैदान के उपयोग की सशर्त अनुमति प्रदान की है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि राज्य सरकार 15 अगस्त के कार्यक्रम के लिए उपयोग शुल्क के रूप में पांच लाख रुपये की राशि जमा नहीं करवाती है, तो स्कूल परिसर में किसी भी प्रकार के आयोजन की अनुमति नहीं दी जाएगी।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी नेगी की खंडपीठ ने यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। दरअसल, यह आदेश उपायुक्त हमीरपुर द्वारा दाखिल उस आवेदन की सुनवाई के दौरान आया, जिसमें हमीरपुर जिले के बड़सर स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के खेल मैदान के अस्थायी उपयोग की अनुमति मांगी गई थी। अदालत ने जनहित याचिका की पिछली सुनवाई का हवाला देते हुए प्रशासनिक ढर्रे पर गंभीर सवाल खड़े किए।

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने अधिकारियों की कार्यशैली पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। खंडपीठ ने टिप्पणी की कि यदि सरकार ने बड़सर स्कूल में स्वतंत्रता दिवस के राज्यस्तरीय आयोजन को लेकर निमंत्रण पत्र छपवाने और मेहमानों को आमंत्रित करने जैसी तमाम तैयारियां पहले ही पूरी न कर ली होतीं, तो अदालत किसी भी कीमत पर स्कूल परिसर में आयोजन की इजाजत नहीं देती।
कोर्ट ने अधिकारियों को सख्त शब्दों में फटकार लगाते हुए कहा कि सभी तैयारियां पहले से कर लेने के बाद अंतिम समय में अदालत से अनुमति मांगना बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है। हालांकि, स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व के महत्व और विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने यह सशर्त स्वीकृति दी है, ताकि आयोजन में अंतिम समय पर कोई बाधा न उत्पन्न हो।
अदालत ने यह भी तय किया है कि राज्य सरकार द्वारा भुगतान की जाने वाली पांच लाख रुपये की यह राशि सीधे बड़सर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के बच्चों की कल्याणकारी योजनाओं के लिए इस्तेमाल की जाएगी। इसके अतिरिक्त, खंडपीठ ने आयोजकों के लिए यह अनिवार्य शर्त भी रखी है कि स्वतंत्रता दिवस का कार्यक्रम समाप्त होने के तुरंत बाद स्कूल के खेल मैदान और पूरे परिसर की सफाई व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाए।
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने पूर्व में एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को सख्त निर्देश दिए थे। उस आदेश में स्पष्ट कहा गया था कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि प्रदेश के किसी भी शैक्षणिक संस्थान, चाहे वह स्कूल हो या कॉलेज, के परिसर और खेल मैदान का उपयोग किसी भी प्रकार की गैर-शैक्षणिक गतिविधियों के लिए बिल्कुल नहीं किया जाएगा। इसी पुराने आदेश के तहत बड़सर स्कूल मैदान पर स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित करने के लिए सरकार को कोर्ट का रुख करना पड़ा था।


















