Himachal News: हिमाचल प्रदेश में पुलिस कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है, जो अब राज्य के उच्च न्यायालय की चौखट तक पहुंच चुका है। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और नियमों के पालन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने पुलिस कांस्टेबल भर्ती के विज्ञापित पदों और वास्तव में भरे जा रहे पदों की संख्या के बीच पाए गए अंतर को बेहद गंभीरता से लिया है। इस मामले में कोर्ट ने राज्य सरकार और भर्ती का जिम्मा संभाल रहे आयोग से तुरंत स्पष्टीकरण की मांग की है।
दरअसल यह पूरा मामला न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की एकल पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया था। यह सुनवाई ‘प्रियंका शर्मा बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य व अन्य’ शीर्षक से दायर याचिका पर की गई। सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रथम दृष्टया यह माना कि हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग (HPPSC) द्वारा जारी किए गए मूल विज्ञापन और भर्ती किए जा रहे पदों की वास्तविक संख्या में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है।
उच्च न्यायालय ने इस बात पर विशेष चिंता व्यक्त की है कि राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन द्वारा 139 अतिरिक्त पुलिस कांस्टेबलों के पदों को भरा जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इन 139 अतिरिक्त पदों को मूल भर्ती विज्ञापन में शामिल ही नहीं किया गया था। बिना विज्ञापन में दर्शाए इन अतिरिक्त पदों की भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की कार्रवाई पर अदालत ने कड़ी आपत्ति जताई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की पीठ ने हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग और राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ताओं को सख्त निर्देश जारी किए हैं। पीठ ने वकीलों से कहा है कि वे इस पूरे विषय पर राज्य सरकार, पुलिस प्रशासन और संबंधित उच्च अधिकारियों से ताजा निर्देश (Fresh Instructions) प्राप्त करें और अदालत के समक्ष स्थिति स्पष्ट करें।
अदालत की इस सख्त टिप्पणी और कार्रवाई के बाद कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता और नियमों की अनदेखी को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। मूल विज्ञापन से बाहर जाकर पदों को शामिल करने की प्रक्रिया ने पूरी पारदर्शी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब इस बहुचर्चित और महत्वपूर्ण मामले को अगली सुनवाई के लिए 13 अक्टूबर 2026 की तारीख पर सूचीबद्ध किया गया है। 13 अक्टूबर को यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार और लोक सेवा आयोग अदालत के समक्ष इस अंतर और नियमों के उल्लंघन के आरोपों पर क्या तर्क व जवाब दाखिल करते हैं।


















