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1 अप्रैल से हिमाचल में एंट्री होगी महंगी, जानें प्राइवेट और कमर्शियल वाहनों की नई रेट लिस्ट

Himachal Entry Fee Hike 2026: हिमाचल सरकार ने नई बैरियर नीति लागू करने का फैसला किया है। 1 अप्रैल से अन्य राज्यों के वाहनों पर एंट्री शुल्क बढ़ जाएगा। राज्य के छह प्रमुख बैरियर फास्टैग से जुड़ेंगे, जिससे नकद लेन-देन कम होगा और राजस्व में 2-3 गुना वृद्धि की उम्मीद
1 अप्रैल से हिमाचल में एंट्री होगी महंगी, जानें प्राइवेट और कमर्शियल वाहनों की नई रेट लिस्ट
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Himachal Pradesh Entry Fee Hike April 2026: हिमाचल प्रदेश सरकार ने आने वाले वित्तीय साल के लिए नई बैरियर नीति जारी कर दी है। यह नीति 1 अप्रैल से पूरे प्रदेश में लागू हो जाएगी। इस नीति के लागू होने से अब अन्य राज्यों से आने वाले प्राइवेट और कमर्शियल वाहनों को हिमाचल में प्रवेश के लिए ज्यादा शुल्क चुकाना पड़ेगा। यानि की हिमाचल आने वाले पर्यटकों की जेबों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ने वाला है।

सरकार के इस नए फैसले के तहत छोटे सामान्य वाहनों पर पहले 70 रुपये एंट्री शुल्क लगता था, लेकिन अब यह बढ़ाकर 170 रुपये कर दिया गया है। इसी तरह कुछ वाहनों पर पहले 110 रुपये लिए जाते थे, अब उनसे भी 170 रुपये वसूले जाएंगे। बड़े ट्रकों और अन्य हैवी वाहनों पर भी शुल्क में इजाफा किया गया है। पहले इन पर सबसे ज्यादा 720 रुपये तक शुल्क था, जो अब बढ़ाकर 900 रुपये हो गया है।

इसके अलावा सुक्खू सरकार ने इस बार एक बड़ा कदम उठाया है। पहली बार छह मुख्य बैरियरों को फास्टैग से जोड़ा जाएगा। इनमें सिरमौर जिले का गोविंदघाट, नूरपुर का कंडवाल, ऊना का मैहतपुर, बद्दी, परवाणू और बिलासपुर जिले का गरामोड़ा बैरियर शामिल हैं। बैरियर चलाने वाले ठेकेदारों को मिलान मिलने के 15 दिन के अंदर फास्टैग सिस्टम शुरू करना अनिवार्य होगा। इससे वाहनों की लंबी कतारें खत्म होंगी, आवाजाही तेज होगी और नकद पैसे का लेन-देन लगभग खत्म हो जाएगा।

सरकार ने यह भी तय किया है कि सभी बैरियरों की नीलामी अब ऑनलाइन तरीके से होगी। हर जिले में उपायुक्त की अध्यक्षता वाली एक समिति बनाई गई है, जिसमें आबकारी और कराधान विभाग के अधिकारी भी शामिल होंगे। अगर किसी बैरियर को लेकर कोई विवाद होता है, तो उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक और संबंधित अधिकारी मिलकर उसका समाधान करेंगे।

बता दें कि आर्थिक संकट से जूझ रहे हिमाचल प्रदेश कि सरकार को उम्मीद है कि इस नई नीति और फास्टैग सिस्टम से प्रदेश के राजस्व में पहले की तुलना में दो से तीन गुना तक की बढ़ोतरी हो सकती है। बता दें कि यह कदम ऐसे समय में  प्रदेश की आय बढ़ाने और सिस्टम को पारदर्शी बनाने में मददगार साबित होगा जब केंद्र से मिलने वाली आर्थिक मदद में कमी और RDG को बंद कर दिया गया है।

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