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Himachal Teacher Recruitment: हिमाचल में अस्थायी शिक्षक भर्ती का फॉर्मूला तय: ₹25,000 मिलेगी सैलरी, जानें 100 नंबरों के मूल्यांकन से कैसे बनेगी मेरिट!

हिमाचल प्रदेश के दुर्गम और जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए समग्र शिक्षा अभियान के तहत अस्थायी भर्ती का प्रारूप तैयार किया गया है। जानिए क्या हैं इसके नियम और चयन प्रक्रिया।
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Himachal Teacher Recruitment: हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के दूरदराज और जनजातीय इलाकों में लंबे समय से चली आ रही शिक्षकों की कमी को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। सरकार इन दुर्गम क्षेत्रों के स्कूलों में पठन-पाठन की व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से नए अस्थायी शिक्षकों की भर्ती की योजना पर काम कर रही है। इस बार भर्ती की पूरी प्रक्रिया और क्रियान्वयन का जिम्मा समग्र शिक्षा अभियान (एसएसए) को सौंपा गया है।

पूर्व के वर्षों में जब भी एसएमसी (SMC) या पीटीए (PTA) के माध्यम से इस प्रकार के अस्थायी अध्यापकों का चयन किया जाता था, तो वह प्रक्रिया सीधे शिक्षा विभाग द्वारा संचालित की जाती थी। हालांकि, इस बार प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव करते हुए समग्र शिक्षा अभियान को इसका खाका तैयार करने और प्रक्रिया पूरी करने की जिम्मेदारी दी गई है। समग्र शिक्षा अभियान ने इस संदर्भ में अपना विस्तृत प्रारूप तैयार कर लिया है, जिसे अंतिम मंजूरी के लिए राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा।

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तैयार किए गए नए प्रस्ताव के अनुसार, यह पूरी नियुक्ति प्रारंभिक रूप से केवल एक वर्ष की अवधि के लिए होगी। एक वर्ष का कार्यकाल समाप्त होने के पश्चात दोबारा नए सिरे से मेरिट सूची तैयार की जाएगी। यदि अगली बार मूल्यांकन में किसी अन्य अभ्यर्थी के अंक पूर्व में चयनित उम्मीदवार से अधिक पाए जाते हैं, तो उच्च मेरिट वाले उम्मीदवार को प्राथमिकता देकर नियुक्त किया जाएगा। इस व्यवस्था के अंतर्गत हर साल चयनित शिक्षकों के साथ सेवा अनुबंध का नवीनीकरण किया जाएगा।

पारदर्शी और निष्पक्ष चयन प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए समग्र शिक्षा अभियान ने 100 अंकों का एक मूल्यांकन मानदंड निर्धारित किया है। जिस भी पद और श्रेणी के लिए यह भर्ती की जाएगी, उसमें संबंधित भर्ती एवं पदोन्नति (R&P) नियमों के तहत निर्धारित शैक्षणिक योग्यता का होना अनिवार्य रहेगा। इसके अतिरिक्त, स्नातकोत्तर (PG) डिग्री, एमफिल (MPhil), पीएचडी (PhD) और पूर्व शैक्षिक अनुभव रखने वाले अभ्यर्थियों को मूल्यांकन के दौरान अतिरिक्त अंक प्रदान किए जाएंगे। इस योजना के तहत चयनित होने वाले अध्यापकों को प्रतिमाह 25,000 रुपये का निश्चित मानदेय दिया जाएगा।

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राज्य के जनजातीय और अति-दुर्गम इलाकों में नियमित शिक्षकों की उपलब्धता हमेशा से एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती रही है। कई अवसरों पर देखा गया है कि नियमित रूप से नियुक्त शिक्षक इन कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में अपनी तैनाती से बचते हैं और स्थानांतरण रुकवाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर प्रयास करते हैं। हालांकि, मौजूदा राज्य सरकार ने अपनी नीति स्पष्ट करते हुए हालिया नई नियुक्तियों में सबसे पहले दूरदराज के क्षेत्रों में पदस्थापना दी है ताकि प्राथमिक स्तर पर ही खाली पदों को भरा जा सके।

उल्लेखनीय है कि इस मॉडल की रूपरेखा शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में जम्मू-कश्मीर गए अध्ययन दल के दौरे के बाद तैयार हुई है। जम्मू-कश्मीर में यह मॉडल पहले से सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है, जिसे देखने के बाद शिक्षा मंत्री ने स्कूल शिक्षा निदेशक को रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया था। उसी रिपोर्ट के आधार पर समग्र शिक्षा अभियान ने यह नया प्रस्ताव तैयार किया है। हाल ही में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में इस प्रस्ताव पर गहन विचार-विमर्श किया जा चुका है।

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