HP High Court News: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य कैडर के कर्मचारियों के तबादलों को लेकर सरकार को कड़े निर्देश दिए हैं। कोर्ट का कहना है कि नई नीति में यह साफ होना चाहिए कि स्टेट कैडर के कर्मचारी अपनी पहली जॉइनिंग के बाद शुरुआती दो-तीन पोस्टिंग तक अपने होम डिस्ट्रिक्ट (गृह जिले) में तैनात नहीं किए जाएंगे।
कोर्ट ने कहा है कि अगर कोई कर्मचारी पहले से अपने जिले में तैनात है, तो उसका तबादला उसी जिले की किसी दूसरी जगह पर नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने सुझाव दिया है कि पक्षपात और भेदभाव को खत्म करने के लिए दो पोस्टिंग के बीच कम से कम 100 से 150 किलोमीटर की दूरी रखी जानी चाहिए। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने पारदर्शिता लाने के लिए पूरी व्यवस्था को ऑनलाइन करने का सुझाव दिया है।
उन्होंने कहा कि सरकार एक ऐसा पोर्टल तैयार करे जहां सभी कर्मचारियों की तैनाती का ब्योरा हो। जब कोई कर्मचारी किसी जगह पर अपनी निर्धारित अवधि (तीसरी और चौथी श्रेणी के लिए 3 साल और बाकियों के लिए 2 साल) पूरी कर ले, तो सिस्टम में उसके नाम के आगे ‘रेड डॉट’ जैसा कोई संकेत दिखना चाहिए। इससे यह साफ रहेगा कि अब उस कर्मचारी का तबादला किया जाना है।
इसके अलावा कोर्ट ने कहा है कि खाली पदों की जानकारी भी ऑनलाइन होनी चाहिए ताकि ट्रांसफर प्रक्रिया में होने वाले भ्रष्टाचार और गलत धारणाओं को रोका जा सके। कोर्ट ने इस मामले में मुख्य सचिव से जवाब माँगा है और अगली सुनवाई 16 अप्रैल को तय की है। आदेश की कॉपियां शिक्षा, स्वास्थ्य और राजस्व जैसे बड़े विभागों को भी भेजी गई हैं, क्योंकि सबसे ज्यादा ट्रांसफर से जुड़े विवाद यहीं से आते हैं।
दरअसल एक याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने नाराजगी जताई कि आजकल कर्मचारियों की मानसिकता घर के पास ही टिके रहने की हो गई है, जबकि स्टेट कैडर के कर्मचारी इसे अपना अधिकार नहीं मान सकते। कोर्ट ने मंडी के एक वरिष्ठ सहायक की याचिका को भी रद कर दिया, जो लंबे समय से एक ही जिले में जमे हुए थे और तबादले को चुनौती दे रहे थे।


















