HRTC News: हिमाचल प्रदेश में बस सेवाओं को नया रूप देने की कवायद तेज हो गई है। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के घाटे में चलने वाले 390 रूट अब निजी हाथों में जाने वाले हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इन रूटों के लिए परिवहन विभाग को अब तक 3100 से ज्यादा आवेदन मिल चुके हैं।
बता दें कि पहले इन रूटों को लेने के लिए कोई तैयार नहीं था, लेकिन सरकार ने 30 प्रतिशत सब्सिडी देने का फैसला किया तो आवेदनों की बाढ़ आ गई विभाग का मानना है कि यह संख्या 4500 तक पहुंच सकती है। पहले अंतिम तारीख 8 फरवरी थी, लेकिन बढ़ती रुचि देखकर अब 19 फरवरी तक समय बढ़ा दिया गया है।
गौरतलब है कि ये रूट ग्रामीण इलाकों में हैं जहां एचआरटीसी को नुकसान हो रहा था। अब निजी ऑपरेटर 18, 32 और 42 सीटर बसें चलाएंगे। पिछले दो साल में विभाग ने 400 से ज्यादा रूट विज्ञापित किए थे, लेकिन सिर्फ 40 ही निजी हाथों में गए। सब्सिडी के फैसले ने अब स्थिति बदल दी।
जिला-वार रूटों की संख्या भी सामने आई है। कांगड़ा में सबसे ज्यादा 101 रूट हैं। मंडी में 95, शिमला में 68, कुल्लू में 20, बिलासपुर में 19, हमीरपुर में 18, रामपुर में 14, ऊना में 13, चंबा में 11, नाहन में 15, सोलन में 7 और बद्दी-नालागढ़ में 9 रूट निजी ऑपरेटरों को मिलेंगे।
योजना के तहत आवेदक हिमाचल का स्थायी निवासी और बेरोजगार होना चाहिए। सरकारी या अर्ध-सरकारी नौकरी में नहीं होना चाहिए। परिवार से सिर्फ एक सदस्य को फायदा मिलेगा। आवेदनों की जांच क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी करेंगे। अगर रूट ज्यादा आवेदकों के लिए होंगे तो लॉटरी से चयन होगा।
सरकार ने साफ किया है कि 18 सीटर बस की आन-रोड कीमत का 30 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा। लेकिन यह सब्सिडी परमिट मिलने और बस खरीदने के बाद ही दी जाएगी। श्रम विभाग बैंक के जरिए पैसा देगा। प्राथमिकता स्थानीय और उपमंडल के निवासियों को मिलेगी, फिर जिला और बाकी पात्रों को।
परमिट मिलने के बाद रूट ट्रांसफर नहीं हो सकेगा। अगर कोई सब्सिडी लेकर बस नहीं चलाता तो परमिट रद्द कर दिया जाएगा और अनुदान की रकम वसूल की जाएगी।
















