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व्हाट्सएप पर चल रही हिमाचल की ट्रेजरी, मंत्रियों में सिरफुटौव्वल…’ जेपी नड्डा का सुक्खू सरकार पर तीखा हमला

Himachal Pradesh Political Controversy: केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने सुक्खू सरकार के 'फंड की कमी' वाले नैरेटिव को खारिज करते हुए केंद्र द्वारा दी गई वित्तीय सहायता के विस्तृत आंकड़े जारी किए और राज्य में प्रशासनिक विफलता का आरोप लगाया।
JP Nadda Himachal Government Press Conference: व्हाट्सएप पर चल रही हिमाचल की ट्रेजरी, मंत्रियों में सिरफुटौव्वल...' जेपी नड्डा का सुक्खू सरकार पर तीखा हमला

JP Nadda Himachal Government Press Conference: केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने हिमाचल प्रदेश की मौजूदा कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा बनाए  जा रहे इस नैरेटिव को पूरी तरह खारिज कर दिया कि केंद्र सरकार द्वारा राज्य को वित्तीय मदद नहीं मिल रही है। नड्डा ने एक विशेष मीडिया ब्रीफिंग में देश और प्रदेश के आर्थिक ढांचे का विवरण साझा करते हुए कहा कि राज्य सरकार अपनी अकर्मण्यता को छुपाने के लिए केंद्र पर झूठे आरोप लगा रही है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने हमेशा हिमाचल को बढ़-चढ़कर आर्थिक सहायता दी है और राज्य के लिए फंड की कोई कमी नहीं है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने विकास की एक लंबी छलांग लगाई है। उन्होंने बताया कि आजाद भारत में सबसे लंबी अवधि तक प्रधान सेवक के रूप में सेवा करने का सौभाग्य आदरणीय नरेंद्र मोदी जी को मिला है।

उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के 4398 दिनों के रिकॉर्ड को तोड़कर सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री के रूप में देश की सेवा करने का गौरव हासिल किया है। नड्डा ने हिमाचल प्रदेश की जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्ष 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में जनता ने भाजपा को शत-प्रतिशत परिणाम देकर चारों सीटें जिताईं। इसके साथ ही हाल ही में हुए पंचायती राज और नगर निगम चुनावों में भी भाजपा को एकतरफा सफलता मिली है, जो स्पष्ट करता है कि जनता का मूड पूरी तरह भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में है।

वैश्विक परिदृश्य का जिक्र करते हुए नड्डा ने कहा कि भारत ‘फ्रेजाइल फाइव’ से निकलकर चौथी सबसे बड़ी और सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और वर्ल्ड बैंक जैसे वैश्विक संस्थान भारत को एक मजबूत अर्थव्यवस्था और ‘एकमात्र उम्मीद’ के रूप में देख रहे हैं। उन्होंने बताया कि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से देश में लगभग 51 लाख करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजे गए हैं, जिससे बिचौलियों द्वारा की जाने वाली 4.3 लाख करोड़ रुपये की लीकेज को सफलतापूर्वक रोका गया है।

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हिमाचल प्रदेश को दी गई केंद्रीय वित्तीय सहायता के आंकड़े
नड्डा ने सुक्खू सरकार के दावों की हवा निकालते हुए वर्ष 2024-25 के दौरान हिमाचल प्रदेश को केंद्र से मिली सहायता के निम्नलिखित आधिकारिक आंकड़े प्रस्तुत किए:

  • विशेष सहायता (Special Assistance):₹2,381 करोड़
  • NDRF (आपदा पश्चात बहाली और पुनर्निर्माण): ₹2,006 करोड़
  • बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाएं (EAP पुनर्निर्माण): ₹2,150 करोड़
  • राष्ट्रीय राजमार्ग (फोर-लेनिंग प्रोजेक्ट्स): लगभग ₹40,000 करोड़ (668 किलोमीटर फोर-लेन का निर्माण)
  • रेलवे बुनियादी ढांचा: इस वर्ष चार परियोजनाओं पर ₹2,911 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं। भानुपल्ली-
  • बिलासपुर-बेरी जैसी 55 किलोमीटर की रेल लाइन पर कुल ₹13,168 करोड़ का प्रावधान है।
  • अमृत भारत स्टेशन योजना: अम्ब अंदौरा, बैजनाथ पपरोला, पालमपुर और शिमला रेलवे स्टेशनों को वर्ल्ड क्लास बनाया जा रहा है।

उन्होंने आगे बताया कि पर्यटन और कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए कीरतपुर-मनाली, शिमला-धर्मशाला, पठानकोट-मंडी, शिमला-मटौर, पिंजौर-बद्दी-नालागढ़ और परवाणू-सोलन-शिमला फोर-लेन परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है। इसके अतिरिक्त, रेनुका डैम को राष्ट्रीय महत्व का प्रोजेक्ट घोषित कर ₹7,000 करोड़ और लूरी स्टेज-1 हाइड्रो प्रोजेक्ट के लिए ₹1,800 करोड़ स्वीकृत किए जा चुके हैं। शिक्षा के क्षेत्र में आईआईएम सिरमौर के लिए ₹531 करोड़ खर्च किए गए हैं और ट्रिपल आईटी ऊना को 13 अक्टूबर 2022 को राष्ट्र को समर्पित किया जा चुका है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शिमला और धर्मशाला पर ₹1,188 करोड़ खर्च किए गए हैं।

स्वास्थ्य क्षेत्र में केंद्रीय निवेश और राज्य की विफलता
केंद्रीय मंत्री ने स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे का ब्यौरा देते हुए कहा कि ₹1,400 करोड़ की लागत से बिलासपुर में एम्स  बनकर तैयार है और इसके संचालन के लिए प्रति वर्ष ₹2,000 करोड़ का आवर्ती खर्च केंद्र वहन कर रहा है। इसके अलावा चम्बा, नाहन और हमीरपुर मेडिकल कॉलेजों को चलाने के लिए ₹547 करोड़ दिए गए हैं। पीजीआई सैटेलाइट सेंटर पर ₹400 करोड़ से अधिक खर्च हो चुके हैं और चम्याना में ₹200 करोड़ की लागत से सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक बनाया गया है। नड्डा ने चुटकी लेते हुए कहा कि उन्होंने इसका शिलान्यास 2012 में किया था, लेकिन राज्य सरकार ने इसे बनाने में 2026 लगा दिया।

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जायका परियोजना पर स्थिति स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि 22 मई 2025 को हिमाचल के मुख्यमंत्री ने उनसे दिल्ली में मुलाकात की थी, जिसके बाद 30 जून 2025 को ₹1,482 करोड़ का जायका प्लान मंजूर किया गया। यह कुल परियोजना का 90% ग्रांट है जिसे भारत सरकार वहन करेगी, इसलिए यह दावा करना गलत है कि यह पैसा राज्य सरकार सीधे जापान से लाई है। इस पैसे का उपयोग हमीरपुर, नाहन, टांडा, चम्बा, मंडी नेरचौक मेडिकल कॉलेजों और आईजीएमसी शिमला को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है।

नड्डा ने राज्य सरकार की भारी नाकामी को उजागर करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत हिमाचल को ₹360 करोड़ दिए गए थे ताकि 15 क्रिटिकल केयर ब्लॉक, 12 इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब और 73 प्राइमरी हेल्थ यूनिट ब्लॉक बनाए जा सकें। वर्ष 2025-26 आ गया है और यह योजना बंद होने जा रही है, लेकिन राज्य सरकार एक भी यूनिट चालू नहीं कर पाई। अब यह पैसा केंद्र को वापस चला जाएगा। इसी तरह, 15वें वित्त आयोग के तहत स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए स्वीकृत ₹521 करोड़ में से राज्य सरकार केवल 52% ही खर्च कर सकी और शेष राशि लैप्स हो गई।

बल्क ड्रग पार्क और मेडिकल डिवाइस पार्क की वर्तमान स्थिति
नड्डा ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के आग्रह पर हिमाचल को बल्क ड्रग पार्क दिया गया था, जिसमें ₹1,000 करोड़ की केंद्रीय ग्रांट शामिल है। केंद्र इसमें से ₹225 करोड़ जारी कर चुका है, लेकिन राज्य सरकार पर्यावरण मंजूरी मिलने के बाद अब तक केवल ₹102 करोड़ ही खर्च कर पाई है। इससे भी बदतर स्थिति मेडिकल डिवाइस पार्क की रही, जिसके लिए 10 फरवरी 2022 को ₹100 करोड़ का परिव्यय स्वीकृत किया गया था। सुक्खू सरकार ने इस योजना को उपयोग करने के बजाय वर्ष 2024 में केंद्र को वापस लौटा दिया, जबकि गुजरात जैसे राज्यों में ऐसे पार्क अंतरराष्ट्रीय गंतव्य बन चुके हैं।

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बदहाल वित्तीय स्थिति और प्रशासनिक पंगुता
कैपिटल आउटले के तकनीकी आंकड़ों का हवाला देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्ष 2026-27 का कैपिटल आउटले मात्र ₹3,090 करोड़ है, जो कि वर्ष 2025-26 की तुलना में 70 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्शाता है। यह गिरावट इसलिए हुई है क्योंकि राज्य सरकार नए एसेट क्रिएट करने में विफल रही है। वर्तमान में राज्य का 88 प्रतिशत पैसा केवल वेतन, पेंशन और प्रतिबद्ध देनदारियों में जा रहा है। जयराम सरकार के समय जो कुल कर्ज जीडीपी का 37.7% था, वह आज बढ़कर जीडीपी का 41% हो चुका है और राजकोषीय घाटा बढ़कर 6.5% तक पहुंच गया है। कैग की रिपोर्ट के अनुसार राज्य पर लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का कर्ज हो चुका है।

नड्डा ने राज्य सरकार को ‘एडहॉक सरकार’ करार देते हुए कहा कि प्रदेश में एडिशनल चीफ सेक्रेटरी और डीजीपी अतिरिक्त प्रभार पर चल रहे हैं, और खुद मुख्यमंत्री भी अतिरिक्त प्रभार की तरह काम कर रहे हैं क्योंकि सरकार दिल्ली से चलाई जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की ट्रेजरी व्हाट्सएप संदेशों पर चल रही है, अधिकारी एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं, और कैबिनेट मंत्री आपस में झगड़ रहे हैं। प्रशासनिक मॉरल पूरी तरह खत्म हो चुका है और राज्य के सक्षम अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली जाने के लिए आतुर हैं। उन्होंने राज्य की स्थिति को ‘नो मैनेजमेंट’ और ‘नो गवर्नेंस’ बताते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार पूरी तरह से दिशाहीन और निर्णयहीन हो चुकी है।

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