Himachal News: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भारतीय जनता पार्टी नेताओं द्वारा पेपर लीक मामले को लेकर दिए गए बयान पर कड़ा पलटवार किया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि जेपी नड्डा को प्रदेश भाजपा के स्थानीय नेताओं द्वारा अधूरी और भ्रामक जानकारी दी गई है। उन्होंने साफ किया कि राज्य में भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाना उनकी सरकार की पहली प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश में पेपर लीक और भर्ती घोटालों की वास्तविक शुरुआत 2017 से 2022 के बीच भाजपा के शासनकाल में हुई थी। उन्होंने कहा कि पुलिस भर्ती पेपर लीक और तत्कालीन कर्मचारी चयन आयोग में व्याप्त भ्रष्टाचार के मामले भाजपा सरकार के कार्यकाल के ही दौरान सामने आए थे। वर्तमान सरकार ने सत्ता में आते ही ऐसे मामलों पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की है।

अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड पर की गई कार्रवाई का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि उनकी सरकार ने सत्ता संभालने के महज चार महीने के भीतर ही तत्कालीन अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड को भंग कर दिया था। इस मामले में जांच के बाद कई दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की गई और उन्हें जेल भेजा गया। उन्होंने कहा कि जिस मुद्दे पर आज भाजपा कांग्रेस सरकार को घेरने का प्रयास कर रही है, वह वास्तव में भाजपा के अपने शासनकाल की सबसे बड़ी विफलताओं में से एक रहा है।
पूर्व सरकार के दौरान हुए कथित भ्रष्टाचार और भर्ती घोटालों की पूरी सच्चाई जनता के सामने लाने के लिए मुख्यमंत्री ने एक बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने घोषणा की कि राज्य सरकार इस संबंध में एक ‘व्हाइट पेपर कमेटी’ का गठन करने जा रही है। आगामी मंत्रिमंडल की बैठक में इस समिति के गठन से संबंधित एक विस्तृत प्रस्ताव पेश किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने विस्तार से बताया कि यह समिति भाजपा शासनकाल के दौरान सामने आए भ्रष्टाचार और पेपर लीक मामलों का एक समग्र दस्तावेज तैयार करेगी। इसके आधार पर सरकार द्वारा एक विस्तृत श्वेत पत्र जारी किया जाएगा, ताकि पूरे घटनाक्रम और इसमें शामिल जिम्मेदार लोगों की भूमिका जनता के सामने पूरी पारदर्शिता के साथ रखी जा सके।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री सुक्खू ने राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए राहत कार्यों और आर्थिक सहायता का ब्यौरा भी प्रस्तुत किया। उन्होंने दावा किया कि हिमाचल सरकार ने देश का सबसे बड़ा राहत पैकेज लागू किया है। आपदा प्रभावितों के लिए पूर्ण या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों की सहायता राशि को 7 लाख रुपये से बढ़ाकर 7.5 लाख रुपये कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त घरेलू सामान, बर्तन, पलंग और बच्चों की किताबों के नुकसान की भरपाई के लिए 1 लाख रुपये अलग से दिए जा रहे हैं, जिससे प्रत्येक प्रभावित परिवार को कुल 8.5 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद मिल रही है।
पुनर्वास प्रयासों पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पशुधन और कृषि क्षेत्र में हुए नुकसान के लिए भी राहत राशि में बढ़ोतरी की गई है। इसके तहत गाय की मृत्यु पर 55 हजार रुपये, भेड़-बकरी की मृत्यु पर 15 हजार रुपये, दुकान क्षतिग्रस्त होने पर 1 लाख रुपये तथा खेत बह जाने की स्थिति में प्रति दो कनाल 10 हजार रुपये तक की सहायता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों और वित्तीय चुनौतियों के बावजूद पुनर्वास कार्यों में धन की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी और सरकार ‘आत्मनिर्भर हिमाचल’ के संकल्प के साथ हर प्रभावित के साथ खड़ी है।


















