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PM Modi-Putin Meeting: पीएम मोदी और पुतिन की ऐतिहासिक वार्ता, 100 अरब डॉलर के व्यापार का तय हुआ रोडमैप, जानें 5 बड़े फैसले

PM Modi Putin Meeting BRICS 2026: ब्रिक्स 2026 सम्मेलन से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई, जिसमें व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा, और व्यापार घाटे को कम करने जैसे 5 महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत रणनीति तैयार की गई।
Updated By ND Prajasatta
Published on: 12 सितम्बर 2026
PM Modi-Putin Meeting: पीएम मोदी और पुतिन की ऐतिहासिक वार्ता, 100 अरब डॉलर के व्यापार का तय हुआ रोडमैप, जानें 5 बड़े फैसले

PM Modi-Putin Meeting: रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन रूस से बाहर किसी ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे हैं। बता दें कि ब्रिक्स 2026 सम्मेलन का आधिकारिक आगाज होने से ठीक एक दिन पहले शुक्रवार को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक संपन्न हुई।

वैश्विक पटल पर हुए इस बड़े घटनाक्रम और दोनों शीर्ष नेताओं की इस मुलाकात पर दुनिया के कई प्रमुख देशों की नजरें बनी हुई थीं। इस उच्च स्तरीय वार्ता में मुख्य रूप से भारत और रूस के बीच वर्ष 2030 तक वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया। इसके अतिरिक्त रक्षा, ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में आपसी सहयोग को और अधिक मजबूत करने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।

दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, ऊर्जा और सुरक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में जारी साझेदारी की गहन समीक्षा की।मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु व्यापार और निवेश संबंधों को नई गति देना रहा। वर्तमान में दोनों देशों के बीच सालाना व्यापार लगभग 65 अरब अमेरिकी डॉलर का है। 2030 तक इसे 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श के साथ ही भारत ने रूस के समक्ष भारतीय निर्यातकों के लिए अधिक बाजार पहुंच की मांग मजबूती से रखी।

भारत का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ रहे व्यापार घाटे को नियंत्रित करना और व्यापार को संतुलित बनाना है। द्विपक्षीय चर्चा के दौरान राष्ट्रपति पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी को यूक्रेन युद्ध की वर्तमान स्थिति और वहां जारी शांति पहलों के विषय में जानकारी दी।

इसके जवाब में प्रधानमंत्री मोदी ने संघर्ष के स्थायी समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति के मार्ग को ही सबसे उपयुक्त माध्यम बताते हुए भारत के पुराने और स्पष्ट रुख को दोहराया। इससे पूर्व दोनों नेताओं की मुलाकात अस्ताना में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी, जहां प्रधानमंत्री मोदी ने संघर्ष को तत्काल समाप्त कर अंतहीन युद्ध से शांति की ओर बढ़ने का आह्वान किया था।

इस बैठक के दौरान भारत और रूस के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए मुख्य रूप से 5 प्रमुख मुद्दों पर सहमति और ध्यान केंद्रित किया गया:

  • वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंचाना।
  • मैन्युफैक्चरिंग, रेलवे, स्टील और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में तकनीकी व व्यापारिक साझेदारी बढ़ाना।
  • परमाणु ऊर्जा और इससे संबंधित परियोजनाओं में आपसी सहयोग को और मजबूत करना।
  • रूस में भारतीय कुशल कामगारों (skilled workers) और पेशेवरों (professionals) के लिए रोजगार के नए अवसर निर्मित करना।
  • महत्वपूर्ण खनिजों (critical minerals) की आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) में भारत-रूस सहयोग को विस्तार देना।

दोनों देशों के बीच औद्योगिक सहयोग बढ़ाने के तहत रेलवे सेक्टर, टनल निर्माण और स्टील वैल्यू चेन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साझेदारी की नई संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। इसके साथ ही बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) अवसरों को बढ़ावा देकर भारतीय और रूसी कंपनियों को एक-दूसरे के करीब लाने की तैयारी है।

वर्तमान में रूस से भारत का आयात काफी अधिक है, जिससे व्यापार का संतुलन प्रभावित हुआ है। ऐसे में फार्मा, मशीनरी, ऑटोमोबाइल कंपोनेंट, इंजीनियरिंग गुड्स और अन्य भारतीय उत्पादों को रूसी बाजार में अधिक अवसर मिलने से इस व्यापारिक असंतुलन को सुधारा जा सकेगा और भारतीय अर्थव्यवस्था को नया बल मिलेगा।

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