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Kinner Kailash Yatra 2026: “शिवलिंग को कर रहे अशुद्ध…” देवी-देवताओं के आदेश के बाद किन्नर कैलाश यात्रा रोकने के लिए किन्नौर में भारी प्रदर्शन

Kinner Kailash Yatra Controversy: किन्नौर में जिला प्रशासन के प्रतिबंध के बावजूद चोरी-छिपे चल रही किन्नर कैलाश यात्रा के खिलाफ देव समाज और ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। स्थानीय लोगों ने पवित्र शिवलिंग को अशुद्ध करने का आरोप लगाया है।
Kinner Kailash Yatra 2026: "शिवलिंग को कर रहे अशुद्ध..." देवी-देवताओं के आदेश के बाद किन्नर कैलाश यात्रा रोकने के लिए किन्नौर में भारी प्रदर्शन

Kinner Kailash Yatra 2026: हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिले किन्नौर में प्रसिद्ध किन्नर कैलाश यात्रा 2026 को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस धार्मिक यात्रा के संचालन को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और प्रशासन के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। मंगलवार को किन्नौर जिला के मुख्यालय रिकांग पीओ में हजारों की संख्या में स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए।

गुस्साए ग्रामीणों ने जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। यह प्रदर्शन हाल ही में जिला प्रशासन द्वारा किन्नर कैलाश यात्रा पर लगाए गए प्रतिबंध के बावजूद अवैध रूप से चल रही यात्रा को लेकर किया गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा रोक लगाए जाने के बावजूद रोजाना सैकड़ों की संख्या में बाहरी और स्थानीय लोग चोरी-छिपे किन्नर कैलाश के दर्शन के लिए जा रहे हैं।

इस अवैध गतिविधि से नाराज किन्नौर जिला के टुकपा खुन्द क्षेत्र के लोगों ने मंगलवार को उपायुक्त (डीसी) किन्नौर डॉ. अमित कुमार शर्मा से मुलाकात की। ग्रामीणों ने डीसी को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपकर इस अवैध तरीके से चल रही यात्रा पर तत्काल पूर्ण प्रतिबंध लगाने की अपील की। ग्रामीणों की इस गंभीर मांग पर संज्ञान लेते हुए डीसी ने उचित विचार करने और आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया है।

इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे देव समाज के वरिष्ठ सदस्य और टुकपा खुन्द के मेबर गांव के निवासी परमेश्वर नेगी ने रिकांग पीओ में मीडिया से बात करते हुए गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि किन्नर कैलाश की इस पवित्र यात्रा को बेहद गुपचुप और अवैध तरीके से करवाया जा रहा है, जो न केवल प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन है बल्कि धार्मिक आस्था के साथ भी खिलवाड़ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किन्नर कैलाश एक अत्यंत पवित्र स्थल है, जिसके प्रति किन्नौर, शिमला और पड़ोसी राज्य उत्तराखंड तक के देवी-देवताओं और श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा है। यहां सभी देवी-देवता पूजा-पाठ कर शीश नवाते हैं।

परमेश्वर नेगी ने आगे बताया कि इस अनियंत्रित और अवैध यात्रा के कारण पहाड़ों के नाजुक पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है। यात्रा मार्ग और पहाड़ों पर जगह-जगह भारी मात्रा में गंदगी फैलाई जा रही है। इसके अलावा, कैलाश पर्वत पर उगने वाले अत्यंत पवित्र ब्रह्म कमल, दुर्लभ जड़ी-बूटियों और अन्य स्थानीय फूलों को निर्दयता से तोड़ा जा रहा है। श्रद्धालुओं और पर्यटकों की इस लापरवाही के कारण पहाड़ों का शांत और शुद्ध वातावरण पूरी तरह खराब हो रहा है, जिससे भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं का खतरा भी बढ़ सकता है।

देव समाज ने इस यात्रा के दौरान धार्मिक मान्यताओं को ठेस पहुंचाने के गंभीर आरोप भी लगाए हैं। उनका कहना है कि प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, किन्नर कैलाश की पहाड़ियां भगवान शिव का शीतकालीन निवास स्थान मानी जाती हैं। धार्मिक मर्यादा के कारण आज तक कोई भी स्थानीय निवासी या श्रद्धालु कैलाश पर मौजूद पवित्र शिवलिंग के बिल्कुल करीब नहीं जाता था।

लेकिन वर्तमान में चल रही इस अवैध यात्रा के दौरान रोजाना सैकड़ों लोग नियमों को ताक पर रखकर वहां पहुंच रहे हैं। आरोप है कि लोग जूतों समेत पवित्र शिवलिंग के पास जा रहे हैं और उस पर चल रहे हैं, जिससे यह पावन स्थल अशुद्ध हो रहा है।

देव समाज किन्नौर के संयोजक परमेश्वर नेगी ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि अभी तो इस अवैध यात्रा के विरोध में केवल टुकपा खुन्द के लोग सड़कों पर उतरे हैं। यदि प्रशासन ने इस पर तुरंत कार्रवाई करते हुए कैलाश यात्रा को पूरी तरह से बंद नहीं किया, तो आने वाले दिनों में पूरा किन्नौर जिला और संपूर्ण देव समाज सड़कों पर उतरकर उग्र धरना-प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होगा। उन्होंने दो टूक कहा कि यदि ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे इस अवैध यात्रा को रुकवाने के लिए अब तक करीब छह बार प्रशासन को ज्ञापन सौंप चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। जबकि दूसरी ओर, किन्नौर और शिमला जिले के कई प्रमुख देवी-देवताओं ने भी देवआदेशों के माध्यम से किन्नर कैलाश यात्रा को तुरंत रोकने के निर्देश जारी किए हैं। देव समाज ने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरी अवैध यात्रा को संचालित करने में कुछ स्थानीय लोग भी शामिल हैं, जो अपने निजी स्वार्थ के लिए नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।

उधर,  इस संवेदनशील मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए डीसी किन्नौर डॉ. अमित कुमार शर्मा ने कहा कि देव समाज द्वारा सौंपे गए ज्ञापन पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। उन्होंने आश्वस्त किया कि इस मामले में दूसरे पक्ष की दलीलों और बातों को भी सुना जाएगा। इसके बाद सभी कानूनी नियमों और प्रशासनिक दिशा-निर्देशों के अनुसार उचित कार्रवाई अमल में लाई जाएगी ताकि क्षेत्र की शांति और कानून व्यवस्था बनी रहे।

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