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MLA Sanjay Awasthy Case: संजय अवस्थी को दर्ज भ्रष्टाचार मामले में राहत नहीं, हाईकोर्ट में सुनवाई 15 सितंबर तक टली

MLA Sanjay Awasthy Case: संजय अवस्थी पर दर्ज भ्रष्टाचार मामले में राहत नहीं, हाईकोर्ट में सुनवाई 15 सितंबर तक टली

MLA Sanjay Awasthy Case: हिमाचल प्रदेश के अर्की से कांग्रेस विधायक संजय अवस्थी के खिलाफ भ्रष्टाचार और जालसाजी से जुड़े एक आपराधिक मामले को वापस लेने की याचिका पर सुनवाई 15 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी गई है। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान विधायक को कोई राहत नहीं मिली।

मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधवालिया और न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की खंडपीठ ने राज्य सरकार की ओर से दायर उस आवेदन पर सुनवाई की, जिसमें संजय अवस्थी के खिलाफ दर्ज मामले को वापस लेने की अनुमति मांगी गई थी।

जानकारी मुतबिक संजय अवस्थी ने हाईकोर्ट की एकल पीठ में याचिका दायर कर अपने खिलाफ दर्ज मामले को खारिज करने की मांग की थी। उनकी दलील थी कि राज्य सरकार ने इस मामले को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस पर कोर्ट ने सरकार को इस दलील से संबंधित निर्देश पेश करने को कहा था। इसके जवाब में सरकार ने खंडपीठ में आवेदन दायर कर मामले को वापस लेने की अनुमति मांगी।

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संजय अवस्थी के खिलाफ भ्रष्टाचार और जालसाजी से जुडा क्या है मामला?
दरअसल, यह विवाद 21 अप्रैल 2022 को विशेष न्यायाधीश सोलन की अदालत के फैसले से शुरू हुआ, जिसमें संजय अवस्थी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (BNS) की धारा 467 (जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के लिए जालसाजी), और 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत आरोप तय किए गए थे। साथ ही, चूंकि अवस्थी उस समय सोलन नगर पालिका के पार्षद थे, इसलिए उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी मामला बनता है।

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आरोप है कि संजय अवस्थी ने पार्षद रहते हुए हरियाणा के क्रिकेटर विक्रमजीत सिंह मलिक को फर्जी हिमाचली प्रमाणपत्र जारी किया था। इस प्रमाणपत्र के आधार पर मलिक ने तहसीलदार, सोलन से बोनाफाइड हिमाचली प्रमाणपत्र हासिल किया और हिमाचल प्रदेश के लिए क्रिकेट खेला। विशेष अदालत ने 14 मई 2001 को अवस्थी द्वारा जारी प्रमाणपत्र को झूठा करार दिया, जिसमें दावा किया गया था कि मलिक पिछले 15 साल से सोलन का निवासी है। कोर्ट ने इसे मलिक और अवस्थी की मिलीभगत का परिणाम बताया।

संजय अवस्थी का पक्ष
अवस्थी ने दलील दी कि पार्षद के रूप में वह हिमाचली प्रमाणपत्र जारी करने के लिए अधिकृत नहीं थे, और तत्कालीन तहसीलदार को मलिक को प्रमाणपत्र देने से पहले तथ्यों की जांच करनी चाहिए थी।

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हालांकि, विशेष अदालत ने सभी पक्षों और रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद अवस्थी के खिलाफ आरोप तय किए, क्योंकि हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के नियमों के अनुसार केवल वास्तविक हिमाचली ही राज्य के लिए क्रिकेट खेल सकता है। मलिक, जो हरियाणा के पानीपत जिले के सींख गांव का निवासी है, इस योग्यता को पूरा नहीं करता था।

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