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Himachal News: प्राकृतिक संसाधनों से बदलेगी हिमाचल की अर्थव्यवस्था, सुक्खू सरकार का बिजली-पानी से राजस्व बढ़ाने पर फोकस

Himachal Pradesh Economy: हिमाचल प्रदेश अपनी बिजली और पानी का बाजार मूल्य तय कर राजस्व बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है। मुख्यमंत्री सुक्खू का दावा है कि 2032 तक राज्य देश का सबसे अमीर प्रदेश बनेगा।
Published on: 22 September 2026
Himachal News: प्राकृतिक संसाधनों से बदलेगी हिमाचल की अर्थव्यवस्था, सुक्खू सरकार का बिजली-पानी से राजस्व बढ़ाने पर फोकस

Himachal News: हिमाचल प्रदेश अब अपनी प्राकृतिक संपदाओं को केवल संसाधन नहीं, बल्कि प्रदेश की आर्थिक मजबूती का आधार बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार बिजली और पानी जैसे प्राकृतिक संसाधनों से अधिक राजस्व जुटाने के विकल्पों पर काम कर रही है। सरकार का फोकस बाजार के अनुरूप कीमत तय कर हिमाचल के संसाधनों से प्रदेश को अधिक आर्थिक लाभ दिलाने पर है।

जिसके संकेत मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार को नए मुख्यमंत्री कार्यालय के उद्घाटन के दौरान दे दिए हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल अब अपनी बिजली की कीमत स्वयं तय करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि केरल को करीब 14.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली बेचने को लेकर कीमत तय की जा रही है, जबकि तमिलनाडु को फिलहाल 13.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली दी जा रही है। मार्च के बाद इस दर में संशोधन किया जाएगा।

मुख्यमंत्री के अनुसार पहले हिमाचल प्रदेश विद्युत बोर्ड करीब पांच से साढ़े पांच रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली बेचता था। अब बिजली की बिक्री का जिम्मा ऊर्जा निदेशालय को देने की दिशा में कदम उठाया गया है, ताकि बाजार की मांग और कीमतों के अनुसार बिजली से प्रदेश को अधिक राजस्व मिल सके।

पीक टाइम में बिजली की ज्यादा कीमत से बढ़ेगी आय

इसके अलावा सरकार अब बिजली की बिक्री में पीक टाइम को भी कमाई के अवसर के तौर पर देख रही है। जिन घंटों में बिजली की मांग अधिक होती है, उस दौरान बेहतर कीमत हासिल करने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य हिमाचल के जल संसाधनों से पैदा होने वाली बिजली का अधिकतम आर्थिक लाभ प्रदेश को दिलाना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन के प्रयासों के परिणामस्वरूप वर्ष 2032 तक हिमाचल देश का सबसे अमीर राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि सभी तरह के खर्चों के बाद प्रदेश सरकार की वार्षिक आय 7,000 करोड़ रुपये से अधिक होने का लक्ष्य है। कर्मचारियों के लंबित बकाये और अन्य देनदारियों का भुगतान भी चरणबद्ध तरीके से करने की बात मुख्यमंत्री ने कही।

बिजली के बाद अब पानी से भी राजस्व जुटाने की तैयारी

हिमाचल सरकार की रणनीति केवल बिजली तक सीमित नहीं है। अब प्रदेश के जल संसाधनों से भी राजस्व जुटाने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा के पंचकूला के शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों की पेयजल जरूरतों को पूरा करने के लिए हिमाचल संभावनाओं पर विचार कर रहा है।

इसके लिए सुरंग के माध्यम से पंचकूला तक पानी पहुंचाने की योजना पर भी मंथन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसा कोई बंधन नहीं है कि हिमाचल सतलुज नदी के पानी को रोककर अपने हित में उसका उपयोग नहीं कर सकता। इसी सोच के तहत प्रदेश सरकार पानी के उपयोग के बदले राजस्व हासिल करने की संभावनाएं तलाश रही है।

संसाधन हिमाचल के, तो आर्थिक लाभ भी प्रदेश को मिले

सरकार की इस रणनीति का मूल आधार हिमाचल के प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर आर्थिक उपयोग दिखाई दे रहा है। बिजली उत्पादन और जल संसाधनों से होने वाले आर्थिक लाभ में प्रदेश की हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश के तौर पर इसे देखा जा रहा है।

यानी सुक्खू सरकार अब केवल अधिक बिजली पैदा करने या पानी के उपयोग तक सीमित रहने के बजाय यह सोच लेकर आगे बढ़ रही है कि हिमाचल के प्राकृतिक संसाधनों का बाजार मूल्य क्या है और उनसे प्रदेश को अधिकतम राजस्व कैसे मिल सकता है। सरकार के अनुसार, यही रणनीति आने वाले वर्षों में प्रदेश की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

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