Himachal News: हिमाचल प्रदेश सरकार के वित्त विभाग ने रविवार को एक अहम और चिंता बढ़ाने वाली जानकारी सार्वजनिक की। विभाग ने साफ कहा कि सोलहवें वित्त आयोग ने रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (आरडीजी) को समाप्त कर दिया है, जिससे राज्य की आर्थिक व्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा। लंबे समय से हिमाचल का बजट इसी ग्रांट पर काफी हद तक निर्भर रहा है, लेकिन अब यह सहारा खत्म हो चुका है।
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, सत्ता और विपक्ष के नेता तथा मीडिया की मौजूदगी में वित्त सचिव देवेश कुमार ने एक प्रेजेंटेशन के जरिए सरकार की वित्तीय स्थिति सामने रखी। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मौजूदा हालात में सरकार न तो कर्मचारियों को महंगाई भत्ता दे पाएगी और न ही पुराने एरियर का भुगतान संभव होगा।
प्रेजेंटेशन में बताया गया कि ओल्ड पेंशन स्कीम लागू करने के बाद राज्य को 1800 करोड़ रुपये के अतिरिक्त कर्ज की कटौती झेलनी पड़ी थी। अब भविष्य की भर्तियों के लिए यूनिफाइड पेंशन स्कीम यानी यूपीएस पर विचार करना जरूरी होगा। साथ ही दो साल से खाली पड़े पदों को समाप्त करने, मौजूदा कर्मचारियों का युक्तिकरण करने और करीब 30 प्रतिशत संस्थानों को बंद करने की सलाह दी गई है।
वित्त सचिव ने बताया कि पंद्रहवें वित्त आयोग से हिमाचल को पांच साल में 37,199 करोड़ रुपये की आरडीजी मिली थी। इससे राज्य के खजाने को राहत मिली, लेकिन अब खुद के संसाधन सीमित होने के कारण स्थिति बिगड़ गई है। बजट का बड़ा हिस्सा वेतन, पेंशन और कर्ज चुकाने में ही खर्च हो जाता है।
प्रेजेंटेशन में यह भी सामने आया कि कर्मचारियों और पेंशनर्स के पिछले वेतन आयोग से जुड़े करीब 8500 करोड़ रुपये के एरियर बकाया हैं। इसके अलावा लगभग 5000 करोड़ रुपये का डीए और डीआर एरियर भी लंबित है। वित्त सचिव ने कहा कि सरकार के पास इतना धन नहीं है कि इन भुगतानों को किया जा सके।
आरडीजी खत्म होने से सब्सिडी पर भी सीधा असर पड़ेगा। बिजली सब्सिडी, जो इस वर्ष 1200 करोड़ रुपये रही, आगे देना संभव नहीं होगा। सामाजिक सुरक्षा पेंशन पर इस वर्ष 1661 करोड़ रुपये खर्च हुए, इसके लिए भी नए उपाय तलाशने होंगे। हिमकेयर और सहारा जैसी योजनाओं के 400 से 500 करोड़ रुपये के भुगतान भी अटके हुए हैं। कुल मिलाकर, वित्त विभाग की प्रस्तुति ने राज्य की आर्थिक चुनौतियों को साफ तौर पर उजागर कर दिया है।















