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राज्य सरकार प्रदेश के लिए एकीकृत ड्रग प्रिवेंशन नीति तैयार करेगीः मुख्यमंत्री

Published on: 23 December 2020
राज्य सरकार प्रदेश के लिए एकीकृत ड्रग प्रिवेंशन नीति तैयार करेगीः मुख्यमंत्री

प्रजासत्ता।
प्रदेश सरकार राज्य के लिए एक एकीकृत ड्रग प्रिवेंशन नीति तैयार करेगी। यह नीति राज्य में मादक पदार्थों की रोकथाम, उपचार, प्रबन्धन और पुनर्वास/सोशल/इंटीग्रेशन कार्यक्रम के लिए होगी। यह बात मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आज यहां आयोजित हिमाचल प्रदेश नशा निवारण बोर्ड की पहली बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में नशीली दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए पुलिस, मीडिया और नशा निवारण बोर्ड के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में ड्रग पेडलर्स पड़ोसी राज्यों के हैं। उन्होंने कहा कि यह उनके द्वारा शुरू की गई पहल से ही संभव हुआ है कि इस क्षेत्र में ड्रग्स के खतरे की जांच के लिए एक संयुक्त रणनीति बनाने के लिए कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा के पंचकुला में एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्रियों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि सभी मुख्यमंत्री और अन्य उत्तरी राज्यों के प्रतिनिधि मादक पदार्थों की तस्करी के बारे में जानकारी सांझा करने के लिए सहमत हुए हैं। उन्होंने कहा कि एक अन्य बैठक की मेजबानी पंजाब ने की, जिसमें राजस्थान के मुख्यमंत्री ने भी भाग लिया। उन्होंने कहा कि यह पहल ड्रग्स के खतरे को रोकने में एक शानदार कदम साबित हुई है।

जय राम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार ने राज्य में छः नशामुक्ति केंद्र खोलने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि नशीली दवाओं के दुरुपयोग के कारण अपराध दर में वृद्धि होती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य में जरूरतमंदों को बेहतर सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए नशा और नशामुक्ति केंद्रों के लिए पहले से ही कार्यरत पुनर्वास केंद्रों को विनियमित और नियंत्रित करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करने पर भी विचार करेगी।

उन्होंने कहा कि राज्य में नशीली दवाओं के उत्पादन की मात्रा और स्वरूप, साइकोट्राॅपिक पदार्थों सहित प्रिक्यूरसोरस के विचलन और प्रदेश में मादक पदार्थों के सेवन के परिमाण को जानने के लिए आधिकारिक सर्वेक्षण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य वार ड्रग जागरूकता अभियान/संवेदीकरण कार्यक्रम शुरू किया जाएगा, जिसमें पंचायती राज संस्थानों, शहरी स्थानीय निकायों, एनसीसी कैडेट्स, एनएसएस स्वयंसेवकों और महिला मंडलों के निर्वाचित प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य पुलिस के मौजूदा नारकोटिक्स कंट्रोल सेल को इस खतरे से निपटने के लिए सुदृढ़ किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य में ड्रग की समस्या से निपटने के लिए कृत संकल्प है, क्योंकि यह राज्य और देश में एक गंभीर सामाजिक समस्या है। उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों के दुरूपयोग की जांच करने की दृष्टि से राज्य सरकार ने एक व्यापक योजना बनाई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का नशीली दवाओं के खिलाफ रणनीति का एक प्रमुख हिस्सा उन दवाओं पर ध्यान केन्द्रित करता है, जो मूल रूप से भांग और अफीम जैसे पौधों से प्राप्त होती हैं। राज्य सरकार ने उन पौधों के उन्मूलन के लिए कड़े कदम उठाए है, जिनसे ड्रग्स का उत्पादन होता है। ग्राम पंचायत, वन और अन्य सरकारी भूमि सहित सभी भूमि पर भांग/अफीम के उन्मूलन के लिए अभियान चलाया जा रहा है।

जय राम ठाकुर ने कहा कि पूरे प्रदेश में भांग और अफीम उन्मूलन अभियान प्रभावी तरीके से क्रियान्वित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भांग और अफीम उन्मूलन अभियान को तेज करने के लिए प्रदेश सरकार ने ऊंचाई वाले क्षेत्रों में इस समस्या के समाधान के लिए सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) को तैनात किया है और उन्हें भांग, अफीम के पौधों को खत्म करने के लिए आधुनिक उपकरण प्रदान किए गए हैं। उन्होंने कहा कि सामुदायिक पुलिसिंग योजना के अंतर्गत समय-समय पर विद्यालयों और महाविद्यालयों के निकट युवाओं में मादक पदार्थों के दुरूपयोग को रोकने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नारकोटिक सेल, सभी पुलिस अधीक्षकों और सीआईडी की फील्ड यूनिट द्वारा आम जनता और शैक्षणिक संस्थानों के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में बढ़ते नशे के खतरे के दृष्टिगत सरकार ने विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए सरकारी विद्यालयों के पाठ्यक्रम में नशे के दुरूपयोग से दुष्प्रभाव पर एक अध्याय शुरू करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार मादक पदार्थों की तस्करी को गैर जमानती अपराध बनाने के लिए एक बिल भी लाया है।

मुख्य सचिव अनिल खाची ने कहा कि बोर्ड की कार्यकारी समिति का गठन किया जाएगा और बोर्ड की सिफारिशों के उचित क्रियान्वयन के लिए नियमित बैठकें आयोजित की जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित विभाग हिमाचल प्रदेश को नशा मुक्त राज्य बनाने के लिए प्रदेश सरकार के विभिन्न योजनाओं के लिए अधिक समन्वय के साथ कार्य करेंगे।

पुलिस महानिदेशक संजय कुंडू ने कहा कि प्रदेश पुलिस राज्य में नशे के व्यापारियों पर शिकंजा कसने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विभाग ने अपने खुफिया तंत्र को सुदृढ़ किया है, ताकि मादक पदार्थों की तस्करी और बिक्रय के बारे में जानकारी सांझा की जा सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने एनडी एंड पीएस मामलों का पता लगाने के लिए विशेष अभियान चलाए गए हैं, जो समय-समय पर प्रदेश पुलिस द्वारा शुरू किए गए हैं।

हिमाचल प्रदेश नशा निवारण बोर्ड के संयोजक एवं सलाहकार ओ.पी. शर्मा ने इस अवसर पर ‘प्रिवेलिंग ड्रग सिचुएशन इन हिमाचल प्रदेश’ विषय पर प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा कि राज्य के लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करने के लिए गहन जनजागरूकता अभियान शुरू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नशीले पदार्थों के उपयोग से न केवल व्यक्ति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, बल्कि यह समाज को विकृत कर देता है और शिक्षा में खराब प्रदर्शन, खराब स्वास्थ्य, जघन्य अपराधों का कारण बनता है।

आबकारी एवं कराधान आयुक्त रोहन चन्द ठाकुर ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया और बैठक की कार्यवाही का संचालन किया।

इस अवसर पर बोर्ड के गैर सरकारी सदस्योें प्रकाश भारद्वाज, भानु लोहमी, अंकुर चैहान और देवेन्द्र दत्त शर्मा ने भी प्रदेश में मादक पदार्थों के दुरूपयोग को रोकने के बारे में अपने बहुमूल्य सुझाव दिए।

अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह मनोज कुमार, अतिरिक्त मुख्य सचिव राजस्व आरडी धीमान, अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त प्रबोध सक्सेना, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव जेसी शर्मा, सचिव स्वास्थ्य अमिताभ अवस्थी, सचिव शिक्षा राजीव शर्मा और प्रदेश सरकार के विभागाध्यक्षों ने बैठक में भाग लिया

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