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Kangra MNREGA Scam: मनरेगा के पैसों में ‘खेल’ पड़ा भारी! पूर्व प्रधान और 2 सचिवों पर बड़ा एक्शन, लोकपाल ने दिए रिकवरी के आदेश

Kangra News: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की रड़ा पंचायत में मनरेगा फंड के दुरुपयोग मामले में लोकपाल ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच में गड़बड़ी पाए जाने पर पूर्व प्रधान और दो सचिवों से वसूली का आदेश दिया गया है।
Kangra MNREGA Scam: मनरेगा के पैसों में 'खेल' पड़ा भारी! पूर्व प्रधान और 2 सचिवों पर बड़ा एक्शन, लोकपाल ने दिए रिकवरी के आदेश

Kangra MNREGA Scam News: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला अंतर्गत विकास खंड सुलह भेडू महादेव क्षेत्र की रड़ा पंचायत में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत स्वीकृत सरकारी बजट में कथित वित्तीय अनियमितता का गंभीर मामला सामने आया है। मनरेगा लोकपाल ने योजना के कार्यों में स्वीकृत धनराशि के दुरुपयोग के आरोपों को सही पाते हुए तत्कालीन पंचायत प्रधान और दो पूर्व पंचायत सचिवों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है।

लोकपाल कार्यालय की ओर से जारी आदेश में इन तीनों जिम्मेदार व्यक्तियों से कुल 61,310 रुपये की रिकवरी करने के निर्देश दिए गए हैं। यह पूरी कार्रवाई विभागीय जांच के दौरान मनरेगा विकास कार्यों से संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों और तकनीकी मूल्यांकन रिपोर्ट में स्पष्ट अंतर पाए जाने के बाद अमल में लाई गई है।

मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, रड़ा पंचायत के स्थानीय निवासी करम चंद और हिमाल चंद ने मनरेगा कार्यों में व्यापक स्तर पर धांधली और सरकारी धन के दुरुपयोग को लेकर 10 जनवरी 2026 और 16 जनवरी 2026 को मनरेगा लोकपाल के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। ग्रामीणों द्वारा दर्ज कराई गई इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए लोकपाल ने मामले की गहराई से पड़ताल करने के लिए विकास खंड अधिकारी सुलह को विस्तृत जांच का जिम्मा सौंपा था।

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ब्लॉक विकास अधिकारी द्वारा की गई विभागीय जांच के दौरान तत्कालीन पंचायत प्रधान लेखराज, तत्कालीन पंचायत सचिव मिशना देवी और पंचायत सचिव प्रवीण कुमार को मनरेगा के अंतर्गत कराए गए संबंधित निर्माण एवं विकास कार्यों में सरकारी बजट के अनुचित इस्तेमाल के लिए सीधे तौर पर उत्तरदायी पाया गया।

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निष्पक्ष जांच प्रक्रिया के तहत जब तकनीकी सहायक द्वारा तैयार की गई भौतिक गणना रिपोर्ट का पंचायत द्वारा विकास खंड कार्यालय में जमा कराए गए आधिकारिक कागजात से मिलान किया गया, तो दोनों के बीच बड़ा अंतर उजागर हुआ। दस्तावेजों में दर्शाए गए आंकड़े और धरातल पर हुए तकनीकी कार्य के बीच पाई गई इस असमानता ने वित्तीय धांधली की पुष्टि कर दी।

मामले में प्रस्तुत सभी तथ्यों और जांच रिपोर्ट का अनुशीलन करने के बाद, मनरेगा लोकपाल ने 23 जुलाई को अपना निर्णय सुनाते हुए दोषी अधिकारियों और प्रतिनिधि पर वित्तीय देनदारी तय की। जारी आदेश के तहत तत्कालीन पंचायत सचिव मिशना देवी से 30,655 रुपये तथा पूर्व पंचायत प्रधान लेखराज से 30,665 रुपये की वसूली करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त पूर्व पंचायत सचिव प्रवीण कुमार पर 10 रुपये की सांकेतिक रिकवरी भी आयोजित की गई है। इस प्रकार तीनों से मिलाकर कुल 61,310 रुपये की राशि वसूल कर सरकारी खाते में जमा कराई जाएगी।

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वित्तीय रिकवरी के अतिरिक्त प्रशासनिक स्तर पर भी कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। लोकपाल ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को आदेश दिया है कि दोनों पंचायत सचिवों के विरुद्ध की गई इस अनुशासनात्मक कार्रवाई का पूरा विवरण उनकी आधिकारिक सर्विस बुक में दर्ज किया जाए। इसके साथ ही संस्था ने सभी दोषियों को भविष्य में मनरेगा या अन्य किसी भी प्रशासनिक कार्य में इस प्रकार की कार्यप्रणाली अथवा अनियमितता न दोहराने की सख्त चेतावनी जारी की है।

विकास खंड सुलह स्थित भेडू महादेव के वरिष्ठ प्राविधिक अधिकारी (एस.वी.पी.ओ.) सतीश कुमार तथा पंचायत निरीक्षक संजीव सूद ने इस पूरी प्रशासनिक कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि की है। अधिकारियों ने बताया कि रड़ा पंचायत में मनरेगा विकास कार्यों में सामने आई गड़बड़ी के संदर्भ में लोकपाल द्वारा तत्कालीन पंचायत प्रधान तथा दोनों सचिवों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई पूरी कर ली गई है और रिकवरी आदेश का पालन कराया जा रहा है।

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