New UGC Rules: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के ज्वाली में एससी, एसटी और ओबीसी समुदाय के हजारों लोगों ने यूजीसी नियमों के समर्थन में बड़ी रैली निकाली। यह रैली यूजीसी के नए नियमों के समर्थन में थी। जहां हजारों लोग इसमें शामिल हुए, जिनमें युवा बाइक और अन्य गाड़ियों पर सवार होकर आए। रैली का मुख्य उद्देश्य सरकार को संदेश देना था कि एससी-एसटी-ओबीसी लोग इन नियमों को जल्द लागू होते देखना चाहते हैं।
रैली का आह्वान हिमाचल के एससी-एसटी-ओबीसी नेताओं ने किया था। प्रमुख दलित नेता रवि कुमार ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि आज हमारी मांग है कि प्रदेश के एससी-एसटी और ओबीसी को उनके हक दिए जाएं। उन्होंने कहा कि हमारी लड़ाई अधिकारों की है, लेकिन कुछ लोगों के सीने पर सांप लोटने लगे हैं। ओबीसी समाज देश में सबसे ज्यादा पिछड़ा हुआ है। यूजीसी नियम लागू होने से ओबीसी को सबसे ज्यादा फायदा होगा।
रवि कुमार दलित ने कहा कि अभी तक ओबीसी को न सही आरक्षण मिला है न अधिकार। इसी कारण ओबीसी समाज सबसे पिछड़ा है। अगर सब हिंदू हैं और भाई-भाई हैं तो अधिकारों के खिलाफ मत बोलें। कुछ लोगों की मानसिकता ऐसी है जैसे एससी-एसटी-ओबीसी हिंदू ही नहीं हैं। उन्होंने मीडिया से कहा कि यूजीसी की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि विश्वविद्यालयों में एससी-एसटी-ओबीसी के साथ अत्याचार में 118 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में ये नियम बहुत जरूरी हैं ताकि सबको बराबरी मिले।
उन्होंने कहा कि अभी यूजीसी नियम पूरी तरह लागू नहीं हुए हैं। जब तक लागू नहीं होते, दुरुपयोग की बात नहीं हो सकती। कुछ लोग काल्पनिक माहौल बना रहे हैं और तथाकथित उच्च वर्ग को डरा रहे हैं। पहले नियम लागू तो कर लें, उसके बाद देखेंगे कि दुरुपयोग हो रहा है या नहीं।
रवि कुमार दलित ने जोर देकर कहा कि हमारे लोग दबे-कुचले और पिछड़े हैं। उन्हें शिक्षा, रोजगार और राजनीति में बराबरी का मौका नहीं दिया गया। उनके अधिकार षड्यंत्र से छीने जाते हैं। अगर यूजीसी नियम लागू नहीं हुए तो एससी-एसटी-ओबीसी बड़े पैमाने पर आंदोलन करेंगे। आज की रैली सिर्फ ट्रेलर है, अगर मांग नहीं मानी गई तो पूरी फिल्म दिखाई जाएगी।
रैली में चौधरी फाउंडेशन से रौवीन चौधरी, प्रवक्ता महिंद्र चौधरी, श्री गुरु रविदास महासभा बैजनाथ इकाई से महासचिव संजय भाटिया, प्रचार सचिव दीप चंद, सुरजीत कुमार, संजय कुमार, गुलसन गैरी , बंटी बेगमपुरिया और गदर फ्रंट हिमाचल प्रदेश के संयोजक रवि कुमार दलित समेत, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कई बड़े नेता शामिल हुए।

















