Mandi Poison Case: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के पधर उपमंडल के अंतर्गत आने वाली जिल्हण पंचायत के सिल्हासवाड़ गांव में मां और चार वर्षीय बेटे के जहरीला पदार्थ निगलने की सनसनीखेज घटना की गुत्थी अब पूरी तरह से सुलझ चुकी है। पुलिस जांच और महिला के आधिकारिक बयानों के बाद इस पूरे मामले का सच सामने आया है। उपचार के बाद दोनों मां-बेटे अब पूरी तरह स्वस्थ हैं और महिला अस्पताल से डिस्चार्ज होकर अपने घर लौट आई है।
इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी, लेकिन पुलिस की पैनी जांच से सभी संदेह दूर हो गए हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, यह पूरी घटना गत चार अक्टूबर की है। 26 वर्षीय महिला जय ललिता ने पुलिस को दिए अपने बयान में खुलासा किया है कि उस दिन उनके चार वर्षीय मासूम बेटे ने अनजाने में गलती से घर में रखा कोई जहरीला पदार्थ खा लिया था। बच्चे को ऐसी हालत में देखकर मां का घबरा जाना स्वाभाविक था।
अत्यधिक मानसिक तनाव, डर और सदमे में आकर महिला ने खुद भी वही जहरीला पदार्थ निगल लिया। इस अप्रत्याशित और खतरनाक कदम के बाद दोनों की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी, जिससे परिवार और आसपास के क्षेत्र में हड़कंप मच गया। घटना के खुलासे का मुख्य कारण एक सतर्क राहगीर की सूझबूझ रही। चार अक्टूबर को जब यह दुर्घटना घटी, तो घर के भीतर से मां और बच्चे के चिल्लाने की दर्दनाक आवाजें बाहर आईं।
आवाज सुनकर एक राहगीर तुरंत मौके पर पहुंचा और स्थिति को भांपते हुए तुरंत मदद जुटाई। इसके बाद दोनों को तुरंत नजदीकी नागरिक अस्पताल जोगिंद्रनगर पहुंचाया गया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने उन्हें नेरचौक स्थित श्री लाल बहादुर शास्त्री राजकीय मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया, जहां उनका इलाज शुरू हुआ।
अस्पताल में चले लंबे और सघन उपचार के बाद चार वर्षीय मासूम बच्चा महज दो दिनों के भीतर ही पूरी तरह से स्वस्थ हो गया था। हालांकि, जहरीला पदार्थ अधिक मात्रा में शरीर में जाने के कारण मां जय ललिता की स्थिति अधिक गंभीर बनी रही और उन्हें करीब एक सप्ताह तक मेडिकल कॉलेज नेरचौक में उपचाराधीन रहना पड़ा। डॉक्टरों की देखरेख में चले इलाज के बाद अब महिला की सेहत में पूरी तरह सुधार आ चुका है और वह अस्पताल से छुट्टी पाकर अपने घर वापस लौट आई है।
बच्चे और मां दोनों के स्वस्थ होने से परिजनों ने राहत की सांस ली है। वहीं मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस ने तुरंत कानूनी और प्रशासनिक जांच शुरू कर दी थी। जांच प्रक्रिया के तहत पुलिस ने महिला के मायके और ससुराल पक्ष के कुल 12 लोगों के विस्तृत बयान दर्ज किए। हैरानी की बात यह रही कि पूछताछ के दौरान किसी भी पक्ष ने इस घटना को लेकर किसी पर कोई संदेह या आरोप नहीं लगाया। महिला के अस्पताल से स्वस्थ होकर लौटने के बाद पुलिस ने उसका आधिकारिक बयान दर्ज किया, जिसके बाद घटना के पीछे का असली कारण पूरी तरह से स्पष्ट हो गया।
मंडी के पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार ने मीडिया को जानकारी देते हुए महिला के बयान दर्ज किए जाने की आधिकारिक पुष्टि की है। पुलिस ने इस घटना से जुड़े सभी तकनीकी तथ्यों, चिकित्सीय रिपोर्टों और परिस्थितियों की गहराई से जांच-पड़ताल की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि महिला के स्पष्ट बयानों के बाद इस मामले में किसी भी प्रकार के संशय की गुंजाइश नहीं बची है। समय पर मिली चिकित्सीय सहायता और राहगीर की सतर्कता के कारण एक बड़ा हादसा टल गया और दोनों की जान सुरक्षित बचा ली गई।


















