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Khushwant Singh Litfest: अमिताभ कांत ने किया खुलासा : भारत 2047 तक कैसे बनेगा विकसित देश

Khushwant Singh Litfest: अमिताभ कांत ने किया खुलासा : भारत 2047 तक कैसे बनेगा विकसित देश

Khushwant Singh Litfest 3rd Day : पर्यटक कसौली में आयोजित तीन दिवसीय खुशवंत सिंह लिट फेस्ट (Khushwant Singh Litfest) के अंतिम दिन आयोजित संवाद सत्र में नीति आयोग के पूर्व CEO अमिताभ कांत ने भाग लिया। उन्होंने “विकसित भारत 2047” पर अपने विचार रखें। इस दौरान उनके साथ सत्र में प्रेम शंकर झा वॉर्ताकार के रूप में मौजूद रहे।

उन्होंने जी20 अध्यक्षता से जुड़ी अपनी महत्वपूर्ण उपलब्धियों और भारत के आर्थिक विकास की दिशा में चर्चा की। उन्होंने बताया कि G20 की अध्यक्षता करने से भारत ने वैश्विक मुद्दों पर सहमति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, और उनकी अध्यक्षता में जी20 के कई विषयों को उजागर किया गया।

अमिताभ कांत (Amitabh Kant) ने कहा कि भारत ने जी20 के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनाई है। एक इंटरव्यू में अमित कांत ने भारत के जी20 अध्यक्ष पद से हटने पर कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी उपलब्धि थी कि उसने वैश्विक दक्षिण की आवाज़ उठाई और अफ्रीकी संघ को जी20 का अभिन्न सदस्य बनाने में सफल रहा।

अमिताभ कांत ने कहा कि भारत ने इस दौरान दुनिया के सामने आने वाले सभी प्रमुख मुद्दों पर आम सहमति बनाने में सक्षमता दिखाई। इसमें कोविड के कारण प्रभावित सतत विकास लक्ष्यों के लिए कार्य योजना, वैश्विक अर्थव्यवस्था में संतुलित विकास, हरित विकास संधि, तकनीकी परिवर्तन, और महिलाओं के विकास जैसे मुद्दे शामिल थे। विशेष रूप से, भारत ने जी20 को जी21 बनाने में सफलता पाई, जो इसे और अधिक समावेशी बनाता है। अब यह संस्था वैश्विक आबादी के लगभग 90% और वैश्विक जीडीपी के 80% को कवर करती है।

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उन्होंने आगे बताया कि भारत ने जी20 शिखर सम्मेलन को 60 से अधिक शहरों में आयोजित किया, जो एक अनूठा कदम था। हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ने इसमें सक्रिय भाग लिया, जिससे यह “लोगों का जी20” बन गया।

अमिताभ कांत ने आगे बताया कि भारत को तीन दशक की अवधि में 9-10% की उच्च दर से बढ़ना होगा, ताकि 2047 तक एक विकसित अर्थव्यवस्था बन सके। इसके लिए जीडीपी को नौ गुना, काम की आय को आठ गुना, और विनिर्माण को 16 गुना बढ़ाना होगा। कृषि पर निर्भरता को कम करके लोगों को बेहतर भुगतान वाली नौकरियों में लगाना आवश्यक है। कांत ने यह भी बताया कि भारत ने व्यापार करने में आसानी के मामले में बहुत सफलता प्राप्त की है। उन्होंने कहा कि पिछले आठ वर्षों में किए गए सुधार पिछले 60 वर्षों के कार्यों से अधिक हैं।

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कांत ने  कहा कि भारत ने दिवालियापन संहिता, रियल एस्टेट विनियमन, और माल एवं सेवा कर जैसे कई क्षेत्रों में बड़े सुधार किए हैं। कॉर्पोरेट कर को कम किया गया है और निजी क्षेत्र के लिए अर्थव्यवस्था को खोला गया है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत को निर्यात बढ़ाने, शहरीकरण को प्रोत्साहित करने और स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण जैसे सामाजिक संकेतकों में सुधार पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत ने 40 मिलियन घर बनाए हैं, 253 मिलियन लोगों को पानी का कनेक्शन प्रदान किया है, और 130 मिलियन शौचालय बनाए हैं। यह बुनियादी ढांचा अन्य देशों के मुकाबले बहुत तेजी से विकसित हुआ है। भारत ने डिजिटल लेनदेन में भी अभूतपूर्व वृद्धि की है, जिससे हमने डिजिटलाइजेशन में एक नया मापदंड स्थापित किया है।

अंत में, कांत ने इस बात पर जोर दिया कि हर राज्य को व्यापार करने में आसानी के लिए खुद को सुधारने की आवश्यकता है। भारत की प्रगति इसी दिशा में निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि भारत ने सात वर्षों में जो हासिल किया, उसे हासिल करने में 50 साल लग जाते तो भारत एक बहुत बड़ा और परिपूर्ण देश है मुझे लगता है कि यह बहुत बढ़िया है ।

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समान नागरिक संहिता से कुछ भला नहीं होने वाला 

सौरभ किरपाल व रोहिन भट्ट
सौरभ किरपाल व रोहिन भट्ट

खुशवंत सिंह लिटफेस्ट के दौरान “सम इंडियन्स आर मोर इकुवल देन अदर्ससी” सत्र में सर्वोच्च न्यायालय के वकील सौरभ किरपाल व रोहिन भट्ट ने विभिन्न विषयों पर चर्चा की। सौरभ किरपाल ने कहा कि समान नागरिक संहिता से मुस्लिम महिलाओं को कोई भला नहीं होने वाला है। इसके लिए सभी पर्सनल लॉ में सुधार लाने की आवश्यकता है। मुस्लिम लॉ में तो पिछले 80 वर्षों में कोई सुधार नहीं हुआ है। यदि सरकार इसमें रिफॉर्म की प्रक्रिया शुरू होती है तो इसका प्रभाव समान नागरिक संहिता से अधिक होगा। समान नागरिक संहिता को केवल मात्र राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 1952 में हिंदू लॉ लागू हुआ था, जिसमें वर्ष 2005 में कुछ सुधार किए गए। वहीं मुस्लिम लॉ में अभी तक कोई रिफॉर्म नहीं किया गया है, जब तक यह नहीं होगा तब तक मुस्लिम महिलाओं को समानता नहीं मिलेगी, इसलिए जरूरी है कि पर्सनल लॉ में रिफॉर्म की प्रक्रिया को शुरू किया जाए। इसके अलावा उन्होंने समलैंगिक विवाह व अन्यों विषयों पर भी खुलकर चर्चा की।

Kasauli International Public School, Sanwara (Shimla Hills)
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