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Govt Lawyers Fee Hike: केंद्र सरकार की 11 साल बाद सरकारी वकीलों को बड़ी सौगात! फीस में की गई भारी बढ़ोतरी

Law Ministry Hikes Fees of Government Lawyers 2026: केंद्र सरकार ने सरकारी वकीलों की फीस बढ़ाने का फैसला लिया है। महंगाई और कानूनी सेवाओं की बढ़ती लागत को देखते हुए नई फीस संरचना जारी की गई है।
Govt Lawyers Fee Hike: केंद्र सरकार की 11 साल बाद सरकारी वकीलों को बड़ी सौगात! फीस में की गई भारी बढ़ोतरी

Govt Lawyers Fee Hike: केंद्र सरकार ने सरकारी वकीलों के लिए अच्छी खबर दी है। लगभग 11 साल बाद केंद्रीय कानून मंत्रालय ने देशभर की अदालतों में केंद्र की तरफ से पैरवी करने वाले वकीलों की फीस में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। यह फैसला 5 फरवरी को जारी अधिसूचना के जरिए लिया गया है। उल्लेखनीय है कि पिछली बार सरकारी वकीलों की फीस में बदलाव अक्टूबर 2015 में हुआ था।

बता दें कि बढ़ती महंगाई और कानूनी पेशे की लागत को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। लंबे समय से वकील इस मांग को उठा रहे थे कि उनकी फीस में संशोधन किया जाए। अब सरकार ने इस लंबित मांग को पूरा कर दिया है।

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नई फीस संरचना के अनुसार, नियमित अपील और डिफेंडेड पिटीशन की फाइनल सुनवाई के लिए ग्रुप ‘A’ के वकीलों को अब प्रति केस प्रति दिन 21,600 रुपये मिलेंगे। पहले उन्हें 13,500 रुपये मिलते थे। इसी तरह ग्रुप ‘B’ और ‘C’ के वकीलों को अब 14,400 रुपये प्रति केस प्रति दिन दिए जाएंगे। पहले यह राशि 9,000 रुपये थी। इस तरह फीस में करीब 60 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है।

हालांकि सरकार ने सिर्फ फाइनल हियरिंग की फीस ही नहीं बढ़ाई है। विभिन्न तरह के मामलों में पेश होने की फीस, केंद्रीय मंत्रालयों के साथ होने वाली कानूनी बैठकों की फीस और मुख्यालय से बाहर अदालत में जाने पर मिलने वाले भुगतान में भी इजाफा किया गया है।

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कानून मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पिछले 11 सालों में महंगाई बहुत बढ़ गई है। कानूनी सेवाओं की लागत भी काफी ऊपर चली गई है, लेकिन वकीलों की फीस में कोई बदलाव नहीं हुआ था। इस वजह से यह संशोधन बहुत जरूरी हो गया था।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पूर्व केंद्रीय कानून सचिव अंजू राठी राणा ने कहा कि फीस बढ़ाने का फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे योग्य और अनुभवी वकील सरकार के लिए काम करने के लिए ज्यादा उत्साहित होंगे। अच्छे वकीलों की उपलब्धता से केंद्र सरकार के केस बेहतर तरीके से लड़ सकेंगे। गौरतलब है कि यह फैसला सरकारी वकीलों के बीच राहत की सांस लेकर आया है। अब वे अपनी मेहनत और जिम्मेदारी के अनुरूप बेहतर पारिश्रमिक पा सकेंगे।

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