LPG Price Today In India: भारत के विभिन्न शहरों में 9 मई 2026 को एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी होने की संभावना को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। मध्य पूर्व देशों में चल रहे विवाद के चलते मई महीने की शुरुआत से ही ऊर्जा क्षेत्र में आए बड़े बदलावों का सीधा असर अब बाजार पर दिखने लगा है। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की सप्लाई को लेकर जो अनिश्चितता बनी हुई है, उसका सीधा दबाव हमारे देश के फ्यूल रेट्स पर पड़ रहा है। घरेलू रसोई से लेकर औद्योगिक इकाइयों तक, गैस की कीमतें आम आदमी के बजट को प्रभावित कर रही हैं।
भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा, जो लगभग 90% है, पश्चिम एशियाई देशों से आयात करता है। बता दें कि वर्तमान में मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में चल रहे तनाव के कारण सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाली मामूली हलचल भी भारत में कीमतों के समीकरण बिगाड़ देती है। चाहे वह घर में इस्तेमाल होने वाली रसोई गैस हो या फिर गाड़ियों में भरने वाली सीएनजी, कीमतें लगातार चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं।
उल्लेखनीय है कि मई महीने की शुरुआत के साथ ही कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम आसमान छूने लगे हैं। 1 मई को ही 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में ₹993 की ऐतिहासिक बढ़ोतरी की गई थी। इस बड़े उछाल के बाद, देश की राजधानी दिल्ली में एक कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹3,071.50 तक पहुंच गई है। हालांकि, आम उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि 14.2 किलो वाले घरेलू रसोई गैस सिलेंडर के दाम फिलहाल स्थिर रखे गए हैं।
आज क्या हैं घरेलू और कमर्शियल LPG सिलेंडर के रेट?
| शहर | घरेलू LPG सिलेंडर (14.2 किलो) | कमर्शियल LPG सिलेंडर (19 किलो) |
|---|---|---|
| नई दिल्ली | ₹913.00 | ₹3,071.50 |
| कोलकाता | ₹939.00 | ₹3,202.00 |
| मुंबई | ₹912.50 | ₹3,024.00 |
| चेन्नई | ₹928.50 | ₹3,237.00 |
| गुरुग्राम | ₹921.50 | ₹3,088.00 |
| नोएडा | ₹910.50 | ₹3,071.50 |
| बेंगलुरु | ₹915.50 | ₹3,152.00 |
| भुवनेश्वर | ₹939.00 | ₹3,238.00 |
| चंडीगढ़ | ₹922.50 | ₹3,092.50 |
| हैदराबाद | ₹965.00 | ₹3,315.00 |
| जयपुर | ₹916.50 | ₹3,099.00 |
| लखनऊ | ₹950.50 | ₹3,194.00 |
| पटना | ₹1,002.50 | ₹3,346.50 |
| तिरुवनंतपुरम | ₹922.00 | ₹3,106.00 |
कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में हुई इस वृद्धि का सीधा असर आम आदमी की जेब पर बाहर खाना खाने के दौरान पड़ सकता है। रेस्टोरेंट, कैंटीन और ढाबा संचालकों के लिए लागत बढ़ गई है, जिससे अब बाहर का खाना और नाश्ता महंगा होने की संभावना प्रबल हो गई है। दिल्ली से लेकर पटना तक, लोग अब गैस की कीमतों में हो रहे इन बदलावों को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि ऊर्जा की बढ़ती कीमतें अंततः महंगाई को बढ़ावा देती हैं।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने इस स्थिति पर अपनी चिंता व्यक्त की है। मंत्रालय के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतें काफी ऊंची बनी हुई हैं, इसके बावजूद भारत सरकार आम जनता को सीधे महंगाई के झटके से बचाने का प्रयास कर रही है। तेल कंपनियां वैश्विक बाजार से महंगे दाम पर गैस और तेल की खरीद कर रही हैं, लेकिन घरेलू उपभोक्ताओं के लिए कीमतों को नियंत्रित रखा गया है।
इस नीतिगत निर्णय का बोझ अब तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर साफ तौर पर देखा जा सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार, तेल मार्केटिंग कंपनियों को हर महीने करीब ₹30,000 करोड़ का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। कंपनियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिस कीमत पर गैस और LPG खरीद रही हैं, उसकी तुलना में घरेलू ग्राहकों को बहुत कम कीमत पर बेच रही हैं, जो उनके वित्तीय स्वास्थ्य के लिए चुनौतीपूर्ण है।
उल्लेखनीय है कि ऊर्जा संकट की इस स्थिति के पीछे का एक प्रमुख कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में उपजा तनाव भी है। संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने होर्मुज जलडमरूमध्य की वर्तमान स्थिति को अब तक का सबसे बड़ा व्यापारिक व्यवधान बताया है। यह समुद्री मार्ग अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस परिवहन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, और यहां होने वाले किसी भी व्यवधान का सीधा असर भारत जैसे उन देशों पर पड़ता है जो भारी मात्रा में आयात पर निर्भर हैं।
वर्तमान में दिल्ली, पटना, कोलकाता और लखनऊ जैसे शहरों में गैस की कीमतें अलग-अलग टैक्स स्लैब के कारण भिन्न हो सकती हैं। दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर के ₹3,000 के पार चले जाने से छोटे कारोबारियों में हड़कंप है। वहीं घरेलू गैस के ग्राहकों को डर है कि यदि तेल कंपनियों का घाटा इसी तरह बढ़ता रहा, तो आने वाले समय में 14.2 किलो वाले सिलेंडर की कीमतों में भी बदलाव की संभावना बन सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $100 के ऊपर बनी रहेंगी और मिडिल ईस्ट का तनाव कम नहीं होगा, तब तक घरेलू बाजार में ऊर्जा की कीमतों पर दबाव बना रहेगा। फिलहाल, सरकार की कोशिश है कि घरेलू रसोई बजट को महंगाई से सुरक्षित रखा जाए, लेकिन कमर्शियल दरों में हुई यह भारी वृद्धि अप्रत्यक्ष रूप से खाद्य वस्तुओं की कीमतों को बढ़ा सकती है।
महंगाई बढ़ने से बिगड़ने लगा रसोई का बजट
क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2026 में शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह की थाली की लागत में करीब 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसकी सबसे बड़ी वजह LPG सिलेंडर, टमाटर और खाद्य तेल की बढ़ती कीमतें बताई गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार LPG और खाद्य तेल दोनों के दाम सालाना आधार पर करीब 7 प्रतिशत तक बढ़े हैं।
जानकारों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं, तो आने वाले समय में महंगाई बढ़ सकती है। रॉयटर्स के एक सर्वे के मुताबिक अप्रैल में भारत की खुदरा महंगाई दर रिजर्व बैंक के 4 प्रतिशत लक्ष्य के करीब पहुंच सकती है। हालांकि पिछले एक साल से महंगाई नियंत्रित रही है, लेकिन अब बढ़ती ऊर्जा कीमतें चिंता बढ़ा रही हैं।
















