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सेना दिवस विशेष: जानिए क्यों 15 जनवरी को मनाया जाता है सेना दिवस( Army Day)

Published on: 15 January 2022
सेना दिवस विशेष: जानिए क्यों 15 जनवरी को मनाया जाता है सेना दिवस( Army Day)

भारत में हर वर्ष 15 जनवरी का दिन सेना दिवस के तौर पर मनाया जाता है। 1949 में इसी दिन केएम करियप्पा भारतीय थल सेना के पहले कमांडर-इन-चीफ बने थे। तब से 15 जनवरी को सेना दिवस के रूप में मनाया जाता है। फील्ड मार्शल केएम करियप्पा ने जनरल फ्रांसिस बुचर से भारतीय सेना की कमान संभाली थी।

आजादी के बाद सेना के पहले दो चीफ ब्रिटिश थे। 1986 में उन्हें बेहतरीन सैन्य सेवाओं के लिए करियप्पा को पंच-सितारा रैंक फील्ड मार्शल से सम्मानित किया गया। आज तक ये पंच-सितारा रैंक भारतीय सेनाओं में केवल तीन सैन्य अधिकारियों को मिली है- करियप्पा, फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ और मार्शल ऑफ इंडियन एयर फोर्स अर्जन सिंह।

बता दें कि 15 जनवरी को आर्मी डे पर दिल्ली के परेड ग्राउंड पर आर्मी डे परेड का आयोजन होता है। आर्मी डे के तमाम कार्यक्रमों में से यह सबसे बड़ा आयोजन होता है। जनरल ऑफिसर कमांडिंग, हेडक्वार्टर दिल्ली की अगुवाई में परेड निकाली जाती है। आर्मी चीफ सलामी लेते हुए परेड का निरीक्षण करते हैं।

गौर हो कि सेना दिवस के अवसर पर पूरा देश थल सेना की वीरता अदम्य साहस और शौर्य की कुर्बानी की दास्ताँ को बयान करता है। जगह-जगह कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। दिल्ली में सेना मुख्यालय के साथ-साथ देश के कोने-कोने में शक्ति प्रदर्शन के अन्य कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है।

उल्लेखनीय है कि 15 अगस्त 1947 को जब भारत स्वतंत्र हुआ, तब देश भर में व्याप्त दंगे-फसादों तथा शरणार्थियों के आवागमन के कारण उथल-पुथल का माहौल था। इस कारण कई प्रशासनिक समस्याएं पैदा होने लगी और फिर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सेना को आगे आना पड़ा। इसके पश्चात एक विशेष सेना कमांड का गठन किया गया, ताकि विभाजन के दौरान शांति-व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।

परन्तु भारतीय सेना के अध्यक्ष तब भी ब्रिटिश मूल के ही हुआ करते थे। 15 जनवरी 1949 को फील्ड मार्शल के एम करिअप्पा स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय सेना प्रमुख बने थे। उस समय भारतीय सेना में लगभग 2 लाख सैनिक थे। उनसे पहले यह पद कमांडर जनरल रॉय फ्रांसिस बुचर के पास था। उसके बाद से ही प्रत्येक वर्ष 15 जनवरी को सेना दिवस मनाया जाता है। के एम करिअप्पा पहले ऐसे अधिकारी थे जिन्हें फील्ड मार्शल की उपाधि दी गई थी। उन्होंने साल 1947 में भारत-पाक युद्ध में भारतीय सेना का नेतृत्व किया था।

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