Aadhaar Deactivate Process: आज के समय में आधार कार्ड भारत का सबसे महत्वपूर्ण पहचान दस्तावेज बन चुका है। बैंकिंग सेवाओं से लेकर सरकारी योजनाओं तक, हर जगह आधार की जरूरत होती है। लेकिन अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद भी उसका आधार कार्ड एक्टिव रहता है, तो यह परिवार के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।
सरकार और UIDAI लगातार लोगों को यह सलाह दे रहे हैं कि किसी की मौत के बाद उसका आधार समय पर डीएक्टिवेट जरूर कराया जाए। आधार एक्टिव रहने की स्थिति में उसके गलत इस्तेमाल का खतरा बना रहता है। कोई भी व्यक्ति मृत व्यक्ति के नाम पर पेंशन, सब्सिडी या अन्य सरकारी लाभ लेने की कोशिश कर सकता है। कई मामलों में पहचान की चोरी और धोखाधड़ी की घटनाएं भी सामने आई हैं।
इन्हीं खतरों को देखते हुए UIDAI अब तक करोड़ों मृत लोगों के आधार नंबर बंद कर चुका है, ताकि सिस्टम को सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जा सके। आधार डीएक्टिवेट कराना सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि परिवार की जिम्मेदारी भी मानी जाती है। अगर भविष्य में किसी जांच के दौरान आधार के दुरुपयोग का मामला सामने आता है, तो परिवार को जवाब देना पड़ सकता है।
लोगों की सुविधा के लिए UIDAI ने आधार डीएक्टिवेशन की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है। अब इसके लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है। myAadhaar पोर्टल पर उपलब्ध सुविधा के जरिए परिवार का कोई भी सदस्य आवेदन कर सकता है।
ऑनलाइन आवेदन के लिए पहले आवेदनकर्ता को अपनी पहचान सत्यापित करनी होती है। इसके बाद मृत व्यक्ति का आधार नंबर, नाम, जन्मतिथि और मृत्यु से जुड़ी जानकारी भरनी होती है। साथ ही मृत्यु पंजीकरण का विवरण देना जरूरी है। सभी जानकारियों की जांच के बाद UIDAI आधार नंबर डीएक्टिवेट कर देता है।
UIDAI आधार को सुरक्षित रखने के लिए बायोमेट्रिक लॉक, फेस ऑथेंटिकेशन और डेटा प्राइवेसी जैसे कई उपाय भी उपलब्ध कराता है। सही समय पर आधार डीएक्टिवेट कराना न सिर्फ परिवार को आर्थिक और मानसिक परेशानी से बचाता है, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड को भी सही बनाए रखता है।














