IDFC First Bank Fraud Case: हरियाणा में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक धोखाधड़ी मामले में स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो ने IDFC फर्स्ट बैंक से जुड़े धोखाधड़ी के मामले में चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। इनमें से दो लोग बैंक के पूर्व कर्मचारी हैं और बाकी दो एक साझेदार कंपनी के मालिक हैं। ये गिरफ्तारियां मंगलवार शाम को की गईं, जब जांच अभी भी चल रही थी।
बता दें कि मामला उजागर होने के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी। हरियाणा सरकार ने भी धोखाधड़ी की पूरी जांच के लिए एक समिति बनाई थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, अधिकारी चंडीगढ़ की एक महिला और उसके भाई की तलाश में थे। उनकी कंपनी में करीब 100 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन हुए थे।
यह मामला तब सामने आया जब IDFC फर्स्ट बैंक ने 22 फरवरी को बताया कि चंडीगढ़ ब्रांच में हरियाणा सरकार के कुछ खातों में 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई है। बैंक ने यह बात रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को बताई और पुलिस में भी शिकायत दर्ज कराई।
बैंक के अनुसार, हरियाणा सरकार का एक विभाग इस बैंक से लेन-देन करता था। बैंक को अचानक एक अनजान तारीख पर खाता बंद करने और बैलेंस दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने की मांग मिली। जांच में पता चला कि बताई गई रकम और असली बैलेंस में काफी अंतर था। कुछ अन्य सरकारी खातों में भी ऐसी ही गड़बड़ी दिखी।
बैंक ने स्पष्ट किया कि यह धोखाधड़ी सिर्फ हरियाणा सरकार से जुड़े कुछ खास खातों तक सीमित है, जो चंडीगढ़ ब्रांच से चलाए जा रहे थे। यह फ्रॉड ब्रांच के बाकी ग्राहकों तक नहीं फैला। बैंक ने मामले की जांच के दौरान अपने चार अधिकारियों को निलंबित भी कर दिया।
अच्छी खबर यह है कि हरियाणा सरकार के उन विभागों के खातों में पूरी रकम वापस आ गई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 24 फरवरी को विधानसभा में कहा कि सरकार धोखाधड़ी में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शेगी नहीं। उन्होंने बताया कि सारी रकम वसूल हो चुकी है। IDFC फर्स्ट बैंक ने भी पुष्टि की कि उसने मूल राशि के साथ ब्याज मिलाकर कुल 583 करोड़ रुपये सरकार के खातों में जमा करा दिए हैं।
विपक्ष में बैठे नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कांग्रेस के हरियाणा अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने इस मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग की है। यह घोटाला राज्य में काफी चर्चा में है और जांच अभी जारी है।















