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Indian Air Force को मिले नए 17 टेस्ट पायलट और फ्लाइट टेस्ट इंजीनियर, रक्षा क्षेत्र को मिलेगी मजबूती

Indian Air Force: बेंगलुरु के एयर फोर्स टेस्ट पायलट स्कूल से 48वें फ्लाइट टेस्ट कोर्स के 17 सैन्य अधिकारी कठिन प्रशिक्षण पूरा कर ग्रेजुएट हुए,
Published on: 24 May 2026
Indian Air Force को मिले नए 17 टेस्ट पायलट और फ्लाइट टेस्ट इंजीनियर, रक्षा क्षेत्र को मिलेगी मजबूती

Indian Air Force Test Pilot School, 48th Flight Test Course: बेंगलुरु स्थित एयर फोर्स टेस्ट पायलट स्कूल (AFTPS) में 48 हफ्तों का कड़ा और विविध विधाओं वाला प्रशिक्षण पूरा कर 48वें फ्लाइट टेस्ट कोर्स के 17 सैन्य अधिकारी पास आउट हो गए हैं। इस बैच में भारतीय वायुसेना के 14, नौसेना के दो और थल सेना का एक अधिकारी शामिल है, जिनमें 11 टेस्ट पायलट और छह फ्लाइट टेस्ट इंजीनियर हैं।

ये सभी स्नातक अब भारतीय वायुसेना की प्रतिष्ठित विंग ‘एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टैब्लिशमेंट’ का हिस्सा बनकर देश की विमानन क्षमताओं को आगे बढ़ाएंगे। इस दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह (PVSM AVSM), जो खुद इसी संस्थान के 17वें कोर्स के छात्र रह चुके हैं, ने उत्तीर्ण अधिकारियों को प्रमाणपत्र और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को पुरस्कार सौंपे।

इस दौरान स्क्वाड्रन लीडर केके सिंह (VM) को सर्वश्रेष्ठ ऑल-राउंडर टेस्ट पायलट के रूप में “सुरंजन दास ट्रॉफी” से नवाजा गया, जबकि उड़ान मूल्यांकन में अव्वल रहने पर स्क्वाड्रन लीडर आदित्य जमदग्नि को “चीफ ऑफ द एयर स्टाफ ट्रॉफी” मिली। वहीं, विंग कमांडर अभिनव कुमार ने बेस्ट ऑल-राउंडर फ्लाइट टेस्ट इंजीनियर की “महाराजा हनुमंत सिंह स्वॉर्ड” अपने नाम की। इसके अलावा, विंग कमांडर प्रणव शर्मा को उड़ान मूल्यांकन के लिए “डनलप ट्रॉफी” और स्क्वाड्रन लीडर पारस शर्मा को ग्राउंड सब्जेक्ट्स में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए “कपिल भार्गव ट्रॉफी” दी गई।

समारोह को संबोधित करते हुए वायुसेना प्रमुख ने नए टेस्ट क्रू को सैन्य आधुनिकीकरण और देश की रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने में उनकी बड़ी भूमिका की याद दिलाई। उन्होंने देश को रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर’ बनाने पर जोर देते हुए कहा कि स्वदेशीकरण और एयरोस्पेस इकोसिस्टम को मजबूत करने की जिम्मेदारी अब इन अधिकारियों के कंधों पर है।

वायुसेना प्रमुख ने सुरक्षा और गुणवत्ता से समझौता किए बिना सैन्य उपकरणों के डिजाइन से लेकर उनकी डिलीवरी तक के समय को कम करने की जरूरत बताई। साथ ही, उन्होंने अधिकारियों से पेशेवर क्षमता, ईमानदारी, सटीकता और उच्च मानकों को बनाए रखने का आह्वान किया ताकि नए विमान और प्रणालियां सेना की परिचालन जरूरतों पर पूरी तरह खरी उतर सकें।

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