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Success Story: दो झूठी FIR और जेल की कालकोठरी, फिर ऐसे डीएसपी बने जैनेंद्र कुमार निगम

Jainendra Kumar Nigam Success Story: मध्य प्रदेश के भिंड जिले के जैनेंद्र कुमार निगम ने दो झूठी FIR, जेल की सलाखें और परिवार पर जानलेवा हमलों के बावजूद, भी हार नहीं मानी और 30 साल पुराना पिता का सपना पूरा कर DSP का पद हासिल किया।
Success Story: दो झूठी FIR और जेल की कालकोठरी, फिर ऐसे डीएसपी बने जैनेंद्र कुमार निगम

MPPSC Topper Jainendra Kumar Nigam Success Story: मध्य प्रदेश के भिंड जिले के रहने वाले जैनेंद्र कुमार निगम का जीवन संघर्ष, हिंसा, कानूनी लड़ाइयों और आर्थिक संकटों के बीच आगे बढ़ने की एक लंबी कहानी है। नवंबर 2025 में मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) 2023 के परिणाम में उनका चयन DSP पद पर हुआ। यह सफलता ऐसे समय आई जब उनके जीवन में कई बार पढ़ाई छूटने की स्थिति बनी और व्यक्तिगत तथा पारिवारिक संकट चरम पर थे।

जैनेंद्र का जन्म 1 दिसंबर 1995 को भिंड जिले के डोंगरपुरा गांव में हुआ। उनके पिता भी MPPSC की तैयारी कर चुके थे और DSP बनने का सपना रखते थे, लेकिन झूठे मामलों में फंसने और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण वे अपना लक्ष्य पूरा नहीं कर सके। यही सपना जैनेंद्र ने बचपन से अपने अंदर संजो लिया।

जैनेंद्र कुमार निगम बताते हैं कि उन्होंने बचपन से ही अपने पिता को MPPSC की तैयारी करते और DSP बनने का सपना देखते देखा था। हालांकि, 1999 में पिता पर लगे झूठे मुकदमों और जेल जाने की वजह से यह सपना अधूरा रह गया। जैनेंद्र ने इसे अपना लक्ष्य बनाया और तैयारी शुरू की।

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12वीं के बाद उन्होंने 2015 में पुलिस कांस्टेबल परीक्षा पास की, लेकिन पिता के कहने पर उन्होंने फिजिकल टेस्ट नहीं दिया और उच्च पद की तैयारी जारी रखने का फैसला किया। 2018 में उन्होंने पहली बार MPPSC प्री परीक्षा पास की, लेकिन परिणाम की जानकारी समय पर न मिलने के कारण वे मुख्य परीक्षा नहीं दे सके। इसके बाद उन्होंने 2019 की तैयारी शुरू की।

अक्टूबर 2019 में उनके परिवार पर गांव के कुछ लोगों द्वारा हमला किया गया। इसके बाद घटनाओं की श्रृंखला शुरू हुई, जिसमें मारपीट, झूठी FIR, और पुलिस कार्रवाई शामिल रही। जैनेंद्र, उनके पिता और भाई को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। जेल में उन्हें सामान्य कैदियों की तरह काम करना पड़ा, जिससे मानसिक स्थिति प्रभावित हुई और पढ़ाई बाधित हुई।

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इन घटनाओं के कारण वे 2019 की प्री परीक्षा में असफल रहे। इसी दौरान परिवार का सामाजिक बहिष्कार हुआ, कृषि संसाधन जब्त कर लिए गए और आजीविका के साधन खत्म हो गए। 2020 में परिवार ने गांव छोड़ दिया और आर्थिक रूप से बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन बिताया।

स्थिति और गंभीर तब हो गई जब उनके माता-पिता पर दोबारा हमला हुआ और बाद में दिल्ली में उनके परिवार का सड़क हादसा हुआ, जिसमें उनकी मां गंभीर रूप से घायल हो गईं। इस घटना ने जैनेंद्र को मानसिक रूप से झकझोर दिया, लेकिन उन्होंने पढ़ाई जारी रखने का निर्णय लिया।

2021 में उन्होंने इंदौर जाकर तैयारी शुरू की। इसी दौरान उन्होंने MPPSC 2020 की परीक्षा दी। प्रारंभिक परीक्षा में सफलता के बाद उन्होंने मुख्य परीक्षा की तैयारी की और धीरे-धीरे प्रदर्शन में सुधार किया। फरवरी 2023 में मुख्य परीक्षा का परिणाम आया, जिसमें वे सफल हुए और इंटरव्यू के लिए चयनित हुए।

9 जून 2023 को आए अंतिम परिणाम में उनका चयन नायब तहसीलदार पद पर हुआ। इसके बाद भी उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी। 2024 में MPPSC 2023 की परीक्षा के दौरान वे मलेरिया और टाइफाइड से ग्रसित हो गए, लेकिन इलाज के साथ परीक्षा देते रहे।

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अंततः नवंबर 2025 में MPPSC 2023 का परिणाम घोषित हुआ, जिसमें जैनेंद्र कुमार निगम का चयन DSP पद पर हुआ। उन्होंने सबसे पहले अपने पिता को फोन कर यह सूचना दी। अपनी सफलता की खबर पिता को देते ही वे भावुक हो गए। पिता की आंखों में पहली बार खुशी के आंसू थे, उन्होंने फोन पर कहा, “हाय मेरी जान, लल्ला डीएसपी बन गया।” परिवार में इस उपलब्धि पर खुशी का माहौल रहा। निगम कि यह सफलता कई वर्षों के संघर्ष, असफलताओं और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद लगातार प्रयास का परिणाम है।

जैनेंद्र ने अपनी तैयारी के दौरान नौकरी के साथ पढ़ाई जारी रखी और अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटे। जैनेंद्र कुमार निगम का यह सफर साबित करता है कि विपरीत परिस्थितियां भी दृढ़ संकल्प के आगे घुटने टेक देती हैं। उनका यह संघर्ष न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है जो विपरीत परिस्थितियों में अपनी राह तलाश रहे हैं।

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