Driving License New Rules: केंद्र सरकार ड्राइविंग लाइसेंस (DL) और वाहन संबंधी सेवाओं को अधिक सुगम और आसान बनाने के लिए नियमों में एक बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। इस नए प्रस्ताव के अंतर्गत, ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता अवधि को बढ़ाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। वर्तमान व्यवस्था में जहां अधिकांश मामलों में ड्राइविंग लाइसेंस 20 साल के लिए जारी किया जाता है, वहीं नए प्रस्ताव के तहत अब इसकी वैधता सीधे लाइसेंस धारक की 50 वर्ष की उम्र तक की जा सकती है।
इस कदम का मुख्य उद्देश्य आम जनता को बार-बार क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) के चक्कर लगाने से राहत देना और सेवाओं को अधिक सुविधाजनक बनाना है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, सड़क परिवहन मंत्रालय इस नए नियम को लागू करने पर विचार कर रहा है। इस बदलाव के बाद वाहन चालकों को बार-बार अपने लाइसेंस के रिन्यूअल के लिए आवेदन करने की झंझट से मुक्ति मिल जाएगी, जिससे पूरी प्रक्रिया बेहद सरल और सुव्यवस्थित हो जाएगी।
इसके अलावा, सरकार गाड़ी के मालिकाना हक को ट्रांसफर करने और परमिट को रिन्यू करने की पूरी प्रक्रिया को भी पूरी तरह से ऑनलाइन यानी डिजिटल बनाने की योजना पर काम कर रही है। मंत्रालय की इस डिजिटल योजना से वाहन खरीदने और बेचने वाले लोगों को आरटीओ कार्यालय जाने की आवश्यकता काफी हद तक कम हो जाएगी। सभी प्रकार के डाक्यूमेंटेशन और कागजी काम ऑनलाइन माध्यम से ही पूरे किए जा सकेंगे, जिससे न केवल लोगों के कीमती समय की बचत होगी बल्कि पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता भी आएगी।
इसी तरह, वाहन परमिट के रिन्यूअल की प्रक्रिया को भी सुगम बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। अभी कई मामलों में वाहन मालिकों को भौतिक रूप से आरटीओ जाकर अपनी औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं, लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह सारा काम घर बैठे ऑनलाइन माध्यम से किया जा सकेगा। नियमों में होने वाले इन बड़े बदलावों को लेकर कई तरह के सवाल भी उठ रहे थे, जिन पर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट की गई है।
अधिकारियों का साफ कहना है कि इन नई व्यवस्थाओं के लागू होने से राज्य सरकारों के राजस्व पर किसी भी प्रकार का कोई विपरीत असर नहीं पड़ेगा। लाइसेंस जारी करने और उनके रिन्यूअल से जुड़े सभी तरह के शुल्क ऑनलाइन माध्यम से ही जमा किए जाते रहेंगे। इसके विपरीत, ऑनलाइन भुगतान प्रणाली से राज्यों का रेवेन्यू कलेक्शन प्रोसेस पहले की तुलना में कहीं अधिक पारदर्शी और मजबूत बन सकता है।
लाइसेंस की अवधि बढ़ाने के साथ-साथ सरकार सड़क सुरक्षा को लेकर भी अत्यधिक सतर्क है। यही कारण है कि इस प्रस्ताव में ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले ड्राइवरों पर पैनी नजर रखने के लिए एक सख्त सिस्टम तैयार किया जा रहा है। सरकार ड्राइवरों के लिए एक ‘नेगेटिव प्वाइंट सिस्टम‘ को मजबूत करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इस नई प्रणाली के तहत, यदि कोई ड्राइवर ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करता हुआ पाया जाता है, तो उसे प्रोफाइल पर नेगेटिव रेटिंग दी जा सकती है।
इस नेगेटिव रेटिंग सिस्टम का सीधा असर चालक के ड्राइविंग अधिकारों पर पड़ेगा। यदि कोई वाहन चालक बार-बार यातायात नियमों का उल्लंघन करता है और उसकी नेगेटिव रेटिंग एक निश्चित सीमा से अधिक हो जाती है, तो ऐसी स्थिति में उसका ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित या हमेशा के लिए रद्द भी किया जा सकता है। केंद्र सरकार को उम्मीद है कि इस कड़े कदम से वाहन चालकों के बीच नियमों के प्रति जिम्मेदारी बढ़ेगी और देश में सड़क सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।















