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खालरा हत्याकांड का दोषी पूर्व DSP जेल से बाहर आते ही हुआ गायब, ‘Satluj Movie’ विवाद के बाद शुरू हुई थी तलाश

Jaswant Singh Khalra Case DSP Jaspal Singh Missing: मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा पूर्व डीएसपी जसपाल सिंह जमानत के बाद से लापता है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है।
Published on: 10 July 2026
खालरा हत्याकांड का दोषी पूर्व DSP जेल से बाहर आते ही हुआ गायब, 'Satluj Movie' विवाद के बाद शुरू हुई थी तलाश

Satluj Movie: मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के अपहरण और हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा पाए पंजाब पुलिस के पूर्व डीएसपी जसपाल सिंह एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। ओटीटी प्लेटफॉर्म से फिल्म ‘सतलुज’ को हटाए जाने के बाद शुरू हुए हालिया विवाद के बीच जसपाल सिंह की तलाश तेज कर दी गई थी। इसी प्रक्रिया के तहत जब नाभा ओपन जेल प्रशासन ने उनके दिए गए पते की जांच शुरू की, तो एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है।

अदालती दस्तावेजों और जमानत आदेश में जसपाल सिंह ने होशियारपुर जिले का जो पता दर्ज कराया था, वह पूरी तरह से फर्जी या असत्यापित निकला है। स्थानीय स्तर पर पुलिस द्वारा की गई गहन पूछताछ में यह साफ हो गया है कि उस पते पर जसपाल सिंह नाम का कोई भी व्यक्ति कभी रहा ही नहीं। इस खुलासे के बाद जेल प्रशासन और स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पूर्व डीएसपी जसपाल सिंह को मई 2023 में अदालत से अंतरिम जमानत मिली थी। जमानत पर रिहा होने के बाद से ही वह पुलिस और जेल प्रशासन की पहुंच से लगातार बाहर चल रहे हैं। जब होशियारपुर सदर थाना पुलिस को उनके वर्तमान ठिकाने और पते की भौतिक पुष्टि करने की आधिकारिक जिम्मेदारी सौंपी गई, तो जांच टीम को जमीनी स्तर पर कोई सुराग नहीं मिला।

होशियारपुर सदर के थाना प्रभारी बलजिंदर सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वयं जांच का नेतृत्व किया। पुलिस टीम ने जब जमानत फॉर्म में उल्लेखित गांव ‘मांझी’ का दौरा किया, तो वहां के सरपंच ने लिखित और मौखिक बयानों में स्पष्ट किया कि उनके गांव में पूर्व डीएसपी जसपाल सिंह नाम का कोई व्यक्ति कभी नहीं रहा है। इसके बाद जांच अधिकारी एएसआई सुरिंदरपाल सिंह ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर नाभा जेल प्रशासन को सौंप दी है।

दूसरी ओर, इस पूरे मामले पर जसपाल सिंह के कानूनी सलाहकार और वकील गगनदीप सिंह घीरे ने एक अलग दलील पेश की है। वकील का कहना है कि किसी भी दोषी के पते का बार-बार सत्यापन करना तभी अनिवार्य होता है, जब अदालत द्वारा इसके लिए विशेष रूप से कोई दिशा-निर्देश या आदेश जारी किया गया हो। उन्होंने यह भी संभावना जताई कि शुरुआती एफआईआर या पुराने अदालती रिकॉर्ड की तकनीकी त्रुटि के कारण मांझी गांव का पता दर्ज हो गया होगा।

बचाव पक्ष के वकील ने स्पष्ट किया कि जसपाल सिंह को अदालत से एक लाख रुपये के निजी जमानती बॉन्ड और उतनी ही राशि की स्थानीय जमानत मिलने के बाद ही रिहा किया गया था। वकील गगनदीप सिंह घीरे के अनुसार, उनका मुवक्किल लगभग दो दशकों का समय जेल की सलाखों के पीछे पहले ही बिता चुका है। उन्हें पंजाब सरकार की विशेष नीति के तहत उनकी दया याचिका पर अंतिम निर्णय आने तक ही अंतरिम जमानत का लाभ दिया गया था।

खालरा हत्याकांड के इस मुख्य दोषी के अचानक लापता होने और पते के सत्यापन में विफलता आने के बाद से पंजाब की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में सरगर्मी बढ़ गई है। जेल प्रशासन अब इस मामले में कानूनी विकल्पों और जसपाल सिंह की तलाश के लिए अगले कदमों पर विचार कर रहा है, ताकि अदालती नियमों के उल्लंघन पर उचित कार्रवाई की जा सके।

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