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Solan News: परवाणू नगर परिषद में भाजपा के ठाकुर दास शर्मा बने अध्यक्ष, उपाध्यक्ष पद पर कांग्रेस के मोहन आजाद का कब्जा

Parwanoo MC President Election:परवाणू नगर परिषद चुनाव में भाजपा ने अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की है, जबकि उपाध्यक्ष पद कांग्रेस के पक्ष में गया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यहां राजनीतिक मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया था।
By PNT
Published on: 9 July 2026
Solan News: परवाणू नगर परिषद में भाजपा के ठाकुर दास शर्मा बने अध्यक्ष, उपाध्यक्ष पद पर कांग्रेस के मोहन आजाद का कब्जा

Solan News: कसौली विधानसभा की परवाणू नगर परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के लिए चुनाव प्रक्रिया गुरूवार को आखिरकार संपन्न हो गई। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी ठाकुर दास शर्मा को लॉटरी सिस्टम से नया अध्यक्ष चुना गया है। जिसके बाद कसौली भाजपा में खुशी का माहौल है, और बधाईयों का सिलसिला जारी है।

बता दें कि ठाकुर दास शर्मा का परवाणू की राजनीति में एक लंबा अनुभव रहा है। वह पहले भी नगर परिषद के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। गौरतलब है कि ठाकुर दास शर्मा किसी समय कसौली ब्लॉक कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर कार्यरत थे, लेकिन निकाय चुनाव की घोषणा से ठीक पहले उन्होंने कांग्रेस पार्टी का साथ छोड़कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी।

दूसरी ओर, नगर परिषद के उपाध्यक्ष पद पर कांग्रेस पार्टी ने अपना कब्जा जमाया है। इस पद के लिए भी दोनों दलों के बीच मुकाबला बराबरी पर छूटने के बाद अंततः टॉस का सहारा लिया गया। किस्मत का साथ मिलने के बाद कांग्रेस के मोहन आजाद परवाणू नगर परिषद के नए उपाध्यक्ष निर्वाचित घोषित किए गए।

अगर परवाणू नगर परिषद की जमीनी राजनीतिक स्थिति पर नजर डालें तो यहां कुल 9 निर्वाचित पार्षद हैं। इनमें से भाजपा के पास 5 पार्षदों का स्पष्ट बहुमत था, जबकि कांग्रेस के पास केवल 4 पार्षद मौजूद थे। शुरुआती दौर में राजनीतिक समीक्षकों का यह मानना था कि भाजपा अपने इस संख्याबल के आधार पर दोनों ही शीर्ष पदों यानी अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पर बेहद आसानी से विजय प्राप्त कर लेगी।

उधर, जून माह में आए एक फैसले में हाई कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश की नगर परिषदों और नगर पंचायतों में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष चुनने के लिए विधायकों के वोट डालने पर रोक लगा दी थी। कोर्ट के इस निर्णय के बाद सुक्खू सरकार बैकफुट पर आ गई थी। दरअसल, यह मामला कुछ निर्वाचित पार्षदों द्वारा दायर याचिकाओं के बाद हाई कोर्ट पहुंचा था। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि नगर निकायों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव केवल जनता द्वारा चुने गए पार्षदों का अधिकार है।

उनके अनुसार, विधायक नगर निकायों के कामकाज और प्रस्तावों पर तो मतदान का अधिकार रख सकते हैं, लेकिन अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में भाग नहीं ले सकते। याचिकाकर्ताओं ने यह भी दलील दी कि जब मनोनित सदस्य इन चुनावों में मतदान नहीं कर सकते, तो विधायकों को भी यह अधिकार नहीं दिया जा सकता। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की खंडपीठ ने प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ताओं की दलीलों को स्वीकार करते हुए सरकारी स्पष्टीकरण पर रोक लगाने का यह आदेश दिया।

हालांकि, मतदान से ठीक पहले सुप्रीम कोर्ट के एक नए आदेश ने पूरा चुनावी गणित पूरी तरह बदल दिया। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश के बाद निकाय चुनाव में स्थानीय विधायक के वोट को भी शामिल कर लिया गया। चूंकि परवाणू विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व वर्तमान में कांग्रेस पार्टी के विधायक कर रहे हैं, इसलिए इस नियम के लागू होते ही कांग्रेस का कुल आंकड़ा 4 वोटों से बढ़कर 5 वोटों पर पहुंच गया।

इस नए बदलाव के कारण परवाणू नगर परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव में दोनों ही प्रमुख दलों, भाजपा और कांग्रेस की ताकत 5-5 वोटों की सटीक बराबरी पर आकर टिक गई। राजनीतिक जानकारों ने पहले ही यह संभावना जताई थी कि यदि दोनों दल अपने-अपने पार्षदों और समर्थकों के वोट सुरक्षित रखने में कामयाब रहते हैं, तो स्थिति पूरी तरह टाई की बन जाएगी। जो अंतिम समय तक बरकरार रही।

चुनाव नियमों के अनुसार, ऐसी असाधारण परिस्थिति उत्पन्न होने पर विजेता का निर्णय करने के लिए टॉस, लॉटरी या पर्ची प्रणाली का विकल्प मौजूद रहता है। इसी नियम के तहत हुए फैसले में अध्यक्ष भाजपा और उपाध्यक्ष पद कांग्रेस की झोली में चला गया, जिससे परवाणू नगर परिषद में सत्ता का संतुलन दोनों दलों के बीच बंट गया है।

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