Uttarakhand Dhami Model Disaster Management: उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति और प्राकृतिक सौंदर्य जहां दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करता है, वहीं यह राज्य समय-समय पर गंभीर प्राकृतिक आपदाओं का भी सामना करता है। जब पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन, बादल फटने या बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो इसका सीधा प्रभाव वहां के जनजीवन, स्थानीय अर्थव्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं पर पड़ता है।
ऐसी परिस्थितियों से निपटने और प्रभावितों तक त्वरित सहायता पहुंचाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में ‘द धामी मॉडल’ के तहत राहत और पुनर्वास कार्यों का संचालन किया जा रहा है।

धराली और थराली में त्वरित राहत और पुनर्निर्माण कार्य
करीब एक वर्ष पूर्व धराली और थराली क्षेत्रों में अचानक आई आपदा, बादल फटने और मलबे के सैलाब के कारण व्यापक नुकसान हुआ था। पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं के क्षतिग्रस्त होने से कई गांवों का संपर्क कट जाता है। इस संकट के समय प्रशासनिक तंत्र ने तत्काल कदम उठाते हुए न केवल आपातकालीन राहत पहुंचाई, बल्कि दीर्घकालिक पुनर्निर्माण कार्यों को भी प्राथमिकता दी।
आपदा से प्रभावित परिवारों के पुनरुत्थान के लिए सरकार द्वारा 33 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का आवंटन किया गया। इस योजना के अंतर्गत विभिन्न विकास विभागों जैसे पशुपालन, सिंचाई, बागवानी, कृषि, ऊर्जा, पर्यटन और खाद्य आपूर्ति के माध्यम से 16 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाएं संचालित की गईं। इसके अतिरिक्त, राहत उपायों के तहत 17 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता सीधे प्रभावित परिवारों के बैंक खातों में हस्तांतरित की गई या सीधे वितरित की गई।
कृषि, पशुपालन और स्थानीय आजीविका का पुनरुत्थान
आपदा के कारण नष्ट हुए बागानों, फसलों और मवेशियों की क्षति की भरपाई के लिए विशेष कदम उठाए गए। सरकार द्वारा कृषकों और बागवानों को बीज एवं पौधे वितरित किए गए तथा भेड़-बकरी पालन में लगे पशुपालकों को वित्तीय सहायता प्रदान की गई, ताकि वे अपनी आजीविका को पुनः स्थापित कर सकें।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पुनर्निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए स्पष्ट किया कि धराली की आपदा केवल भौतिक ढांचे को पुनः खड़ा करने की चुनौती नहीं थी, बल्कि यह प्रभावित परिवारों के जीवन और भविष्य को सुरक्षित करने की प्रशासनिक जिम्मेदारी थी। उन्होंने दोहराया कि राज्य सरकार संकट की घड़ी में प्रत्येक प्रभावित परिवार के साथ तत्परता से खड़ी है।
भविष्य की आपदाओं से बचाव हेतु तकनीकी तैयारियां
दीर्घकालिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन प्रणाली को आधुनिक तकनीकों से लैस किया गया है। मौसम की सटीक जानकारी के लिए उन्नत प्लेटफॉर्म, अर्ली वार्निंग सिस्टम (पूर्व चेतावनी प्रणाली) और नियमित मॉक ड्रिल के माध्यम से प्रशासनिक तंत्र को सजग रखा जा रहा है।
नदियों के तटीय क्षेत्रों में बाढ़ नियंत्रण हेतु सुरक्षा दीवारों का निर्माण, पहाड़ी ढलानों का स्थिरीकरण और आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है, ताकि भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले संभावित नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।
जोशीमठ भू-धंसाव संकट में त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई
‘द धामी मॉडल’ का प्रभाव जोशीमठ में उत्पन्न भू-धंसाव संकट के समय भी देखा गया था। दिसंबर 2022 और जनवरी 2023 के दौरान प्रभावित परिवारों को तत्काल सुरक्षित स्थानों जैसे होटलों, स्कूलों और सरकारी गेस्ट हाउसों में स्थानांतरित किया गया। स्थानीय निवासियों को त्वरित राहत प्रदान करने के उद्देश्य से 4,000 रुपये प्रति माह का किराया भत्ता और 1.5 लाख रुपये की फौरी वित्तीय सहायता दी गई।
इसके साथ ही प्रभावित क्षेत्र में बिजली और पानी के बिल माफ किए गए। पुनर्वास प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए प्रभावितों को नकद मुआवजा, वैकल्पिक भूमि एवं मकान, या सरकार द्वारा निर्मित सुरक्षित आवास के विकल्प दिए गए। केंद्र सरकार के सहयोग से जोशीमठ के वैज्ञानिक पुनरुत्थान के लिए 1,658 करोड़ रुपये से अधिक की रिकवरी एवं रिकंस्ट्रक्शन योजना स्वीकृत की गई।


















