Google News Preferred Source
साइड स्क्रोल मेनू

सुप्रीम कोर्ट आया किसान आंदोलन के समर्थन में, मोदी सरकार झटके में

देश की सर्वोचत्म अदालत सुप्रीम कोर्ट को भी किसान आंदोलन से लगाव दिखाई दे रहा है , आज सुनवाई में अदालत ने किसान आंदोलन पर किसानो की हालत पर चिंता ज़ाहिर की है , अदालत ने आज मोदी सरकार को किसान आंदोलन की चिंता करते हुए कहा है की जल्द बातचीत से सरकार इस मामले का हल निकाले,कृषि कानूनों (Farm Bills) से जुड़ी हुई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सु्प्रीम कोर्ट ने किसान प्रदर्शन (Farmer Protest) को लेकर चिंता जाहिर की है. सीजेआई ने कहा कि हम हालात को समझते है और हम चाहते हैं कि बातचीत से मामले को सुलझाया जाए. इसके साथ ही तीन कृषि कानूनों को रद्द के खिलाफ एक और याचिका दाखिल की गई है. CJI ने याचिकाकर्ता एमएल शर्मा से पूछा आपको पता है कोर्ट में किसान प्रदर्शन को लेकर क्या चल रहा है? एमएल शर्मा ने कहा कि उन्होंने संशोधित याचिका दाखिल कर दी है.

इसे भी पढ़ें:  Shimla News: जयराम सरकार के Shimla Development Plan को सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी

इसके बाद CJI ने SG तुषार मेहता से पूछा कि किसान प्रदर्शन पर कब सुनवाई होनी है? तुषार मेहता ने कहा अभी तारीख तय नहीं हुई है. साथ ही कहा कि दूसरे मामलों के साथ इसको मत सुनिए. CJI ने कहा हम इसको दूसरे मामलों के साथ इसलिए सुनना चाहते है कि क्योंकि प्रदर्शन को लेकर अभी तक कोई हल नहीं निकला है. अब सभी याचिकाओं पर 11 जनवरी को सुनवाई होगी. CJI ने कहा हम सभी मामलों पर एक साथ सोमवार को सुनवाई करेंगे. और अगर उस दिन अटॉर्नी जनरल मामले को टालने की मांग रखते है तो सुनवाई टाल दी जाएगी. कोर्ट भी चाहता है कि बातचीत से हल निकाला जाए.

इसे भी पढ़ें:  जुब्बल में नेपाली मूल की नाबालिग से पड़ोसियों ने किया सामूहिक दुराचार

CJI एस ए बोबडे ने कहा कि किसानों के विरोध के बारे में स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है. एजी के के वेणुगोपाल ने कहा कि इस बात की अच्छी संभावना है कि पार्टियां निकट भविष्य में किसी नतीजे पर पहुंच सकती हैं.

YouTube video player
मुझे महिलाओं से जुड़े विषयों पर लिखना बेहद पसंद है। महिलाओं की ताकत, उनकी चुनौतियों और उनकी उपलब्धियों को उजागर करने में विश्वास करती हूँ। मेरे लेखन का उद्देश्य महिलाओं की आवाज़ को मजबूती से पेश करना और समाज में उनकी भूमिका को पहचान दिलाना है।

Join WhatsApp

Join Now

प्रजासत्ता के 10 साल